पिछले साढ़े चार वर्षों में गंगा कार्यों के लिए 27,000 करोड़ रुपयों की मंजूरी


केंन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण, सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा नौवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों में गंगा कार्यों के लिए 27,000 करोड़ रुपयों की मंजूरी दी जा चुकी है, जबकि पिछले 50 वर्षों में केवल 4,000 करोड़ रुपये दिये गये। अब तक 276 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी हैं, जिनमें से 82 पूरी हो चुकी हैं। श्री गडकरी ने यह बात 27 फरवरी को नई दिल्ली में स्वच्छ गंगा आंदोलन पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही।

उन्होंने कहा कि गंगा की 40 सहायक नदियों और प्रमुख नालों पर काम शुरू हो चुका है, जो नदी की पूरी सफाई के लिए आवश्यक होगा। श्री गडकरी ने कहा कि 145 में से 70 घाट पूरे हो चुके है और 53 मुक्ति धामों पर कार्य पूरा होने वाला है।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा कि स्वच्छ गंगा मिशन हमेशा से सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में रहा है। इसके परिणामस्वरूप सफल कुंभ देखने को मिला, जहां लोगों ने गंगा जल के स्वच्छ प्रवाह के लिए सरकार को बधाई दी। उन्होंने कहा कि गंगा हमारे इतिहास, संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है और यह हजारों मछुआरों, नाविकों और इसके तट पर रहने वाले लोगों की जीवन रेखा है।

पेट्रोलियम मंत्री श्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि उनका मंत्रालय गंगा नदी की सफाई में हर संभव सहायता देगा। उन्होंने कहा कि ओएनजीसी उत्तराखंड सरकार की मदद से पहले से ही गंगोत्री में नमामि गंगे परियोजना में शामिल है। उन्होंने इस अवसर पर आईओसीएल की ओर से 34 करोड़ रुपये और खुद की ओर से स्वच्छ गंगा कोष में एक लाख रुपये का योगदान दिया। राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल और डॉ. सत्यपाल सिंह ने भी इस कोष में एक-एक लाख रुपये का योगदान दिया। जल संसाधन सचिव श्री यूपी सिंह ने 25,000 रुपये का योगदान दिया।

स्वच्छ गंगा कोष की स्थापना संस्थानों और व्यक्तियों को जोड़ने और उनके योगदान के लिए जनवरी-2015 में एक न्यास के रूप में की गई थी, जिसके केन्द्रीय वित्त मंत्री पदेन अध्यक्ष है। घरेलू स्तर पर सीजीएफ में योगदान करने वाले को आयकर कानून 1961 की धारा 80जी (1)(i) के अंतर्गत आयकर में शत-प्रतिशत छूट मिलती है। सीजीएफ में योगदान सीएसआर कियाकलापों के दायरे में आते है, जिसे कंपनी कानून, 2013 की अनुसूची-VII में परिभाषित किया गया है।

सीजीएफ को इस महीने की 20 तारीख तक 270.41 करोड़ रुपये का कुल योगदान मिल चुका है। सीजीएफ में योगदान (i)चैक/डीडी के जरिये ‘क्लीन गंगा कोष’ के नाम से, (ii) एसबीआई की नई दिल्ली स्थित मुख्य शाखा के साथ सीधे इलेक्ट्रॉनिक मोड के जरिये सीजीएफ खाता संख्या 34213740838 (SWIFT Code: SBININBB104) और (iii) सीजीएफ की वेबसाइट में प्रदान किये गये भुगतान मार्ग, जहां यूआरएल: www.cleangangafund.com के जरिये पहुंचा जा सकता है।

अनेक कॉरपोरेट कंपनियां, बैंक और अन्य संस्थान अलग-अलग तरीके से गंगा संरक्षण का समर्थन कर रहे हैं। येस बैंक ने अपनी शाखाओं पर स्वच्छ गंगा का संदेश देते हुए बैनरों पर तथा अपने एटीएम पर स्वच्छ गंगा संदेश दिखाने का काम शुरू किया है। एचसीएल फाउंडेशन गौतम बुद्ध नगर और उत्तर प्रदेश के अन्य भाग में वन लगाने के कार्यों में सहायता कर रहा है और साथ ही उसने इन्टैक के साथ मिलकर उत्तराखंड में रूद्राक्ष के पेड़ लगाने की परियोजना को भी समर्थन दिया है।

भारतीय नौवहन निगम ने पश्चिम बंगाल में कटवा घाट में सुविधाएं प्रदान करने के लिए 35 लाख रुपये की एक परियोजना शुरू की है। ब्रिटेन की एक कंपनी-इंडोरामा चेरिटेबल फाउंडेशन ने गंगोत्री और बद्रीनाथ में दो घाटों को विकसित करने की परियोजना हाथ में ली है, जिस पर 25.65 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एनडीटीवी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के सहयोग से उत्तराखंड में गंगा आधारित विषय वस्तुओं पर भित्ति चित्र बनाने की परियोजना शुरू की है।