बुद्धिजीवियों द्वारा शुरू की गयी ‘एकेडेमिक्स फॉर नमो’ अभियान


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में बुद्धिजीवियों एवं िशक्षाविदों के बीच एक माह पूर्व शुरू हुए एकेडेमिक्स फॉर नमो अभियान में देश के करीब 300 शिक्षण संस्थानों के लगभग 1500 प्रोफेसर, विचारक एवं बुद्धिजीवी शामिल हो गये हैं और विभिन्न प्रांतों, शहरों एवं कस्बों में मोदी सरकार के कार्यकाल में आये ऐतिहासिक परिवर्तन को अपने-अपने दृष्टिकोण से रेखांकित कर रहे हैं।

इस अिभयान को एक माह पूर्व राजधानी में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के करीब 30 प्रोफेसरों ने मिल कर शुरू किया था और उन्होंने बुद्धिजीवी तबकों में मोदी सरकार के काम से आये बदलाव को लेकर गुणवत्तापूर्ण बहस शुरू करने और इस वर्ग में उनकी स्वीकार्यता को बढ़ाने के लिए शुरू किया था। इस अभियान को सोशल मीडिया के माध्यम से देश भर में फैलाया गया है और विचारों के समन्वय के मंच के रूप में एक वेबसाइट www.academics4namo.com भी शुरू की गयी है।

इसके लिए मोदी सरकार की योजनाअों पर लेख प्रतियोगिता आदि का भी आयोजन किया जा रहा है। अभियान के कोर टीम के सदस्य और दिल्ली विश्वविद्यालय के सहायक प्राध्यापक श्री स्वदेश सिंह का कहना है कि 2019 का चुनाव सिर्फ एक सरकार चुनना या सांसद चुनना नहीं है बल्कि एक विचार को भी चुनना है। एक तरफ भाजपा की विचारधारा है, देश के विकास, सुशासन, सुरक्षा, राष्ट्रवाद पल्लवित करने की, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस वंशवाद पर आधारित राजनीति, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की विचारधारा है।