अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मामला


म्मू-कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर आए यूरोपीय संघ (ईयू) के सांसदों ने 30 अक्टूबर को कहा कि अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मामला है और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में वह देश के साथ खड़े हैं।

फ्रांस के हेनरी मेलोसे ने कहा, ‘‘अनुच्छेद 370 की बात करें, तो यह भारत का आंतरिक मामला है। हमारी चिंता का विषय आतंकवाद है जो दुनिया भर में परेशानी का सबब है और इससे लड़ाई में हमें भारत के साथ खड़ा होना चाहिए। मेलोसे ने कहा कि दल ने सेना और पुलिस से बात की है। युवा कार्यकर्ताओं से भी उनकी बातचीत हुई तथा अमन कायम करने के विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

पोलैंड के सांसद रेजार्ड जारनेकी ने कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जो दिखाया वह पक्षपातपूर्ण था। हमने जो देखा है, अपने देश लौटकर हम उसकी जानकारी देंगे।” ब्रिटेन के न्यूटन डन ने इसे ‘आंखे खोलने वाला दौरा’ बताया। डन ने कहा, ‘‘हम यूरोप से आते हैं, जो वर्षों के संघर्ष के बाद अब शांतिपूर्ण स्थान है। हम भारत को दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बनता देखना चाहते हैं। इसके लिए जरूरत है कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम भारत के साथ खड़े रहें। यह दौरा आंखें खोलने वाला रहा है और जो कुछ हमने ग्राउंड जीरो पर देखा है हम उस पर अपनी बात रखेंगे।”

फ्रांस के ही एक अन्य सांसद थियेरी मारियानी ने मीडिया को बताया कि वह पहले भी कई बार भारत आ चुके हैं और यह दौरा भारत के आंतरिक मामले में दखल देने के लिए नहीं है, बल्कि कश्मीर में जमीनी हालात के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी लेने के लिए किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आतंकवादी एक देश को बरबाद कर सकते हैं। मैं अफगानिस्तान और सीरिया जा चुका हूं और आतंकवाद ने वहां जो किया है वह देख चुका हूं। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हम भारत के साथ खड़े हैं।”

यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर यात्रा के पहले प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से नयी दिल्ली में मुलाकात की थी। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने इनका स्वागत करने के साथ उम्मीद जताई थी कि जम्मू कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में उनकी यात्रा सार्थक रहेगी।

पीएमओ ने एक बयान जारी करके कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के इस दौरे से शिष्टमंडल को जम्मू, कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही वे इस क्षेत्र के विकास एवं शासन से संबंधित प्राथमिकताओं की सही स्थिति से अवगत होंगे।” राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल ने भी शिष्टमंडल को जम्मू-कश्मीर के हालात की जानकारी दी थी। उन्होंने मेहमानों के लिए दोपहर के भोज का आयोजन भी किया था।