बजट 2020–भारत की प्रगति में एक नया मील का पत्थर


जट 2020 से भारत को 5 ट्रिलियन डाॅलर की अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प और भी अधिक मजबूत हुआ है। इसने अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर बल देते हुए भविष्य की एक उत्साहवर्द्धक रूपरेखा देश के सामने रखी है। वर्तमान आवश्यकताओं के साथ दूरगामी लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अर्थव्यवस्था का एक व्यापक चित्र इस बजट से प्रस्तुत हुआ है। जिसमें जन–जन की जरूरतें और आकांक्षाएं परिलक्षित हो रही हैं। यही कारण है कि समाज के हर वर्ग में बजट का स्वागत हुआ है। इसने अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की समस्याओं का समाधान रखते हुए एक सुनहरे भविष्य का मार्ग प्रशस्त किया है। मोदी सरकार द्वारा प्रस्तुत बजटों से निरंतरता स्थापित करता हुआ यह बजट अभिनव योजनाओं से भी परिपूर्ण है। यह बजट इस बात का परिचायक है कि चाहे चुनौतियां कितनी भी क्यों न हो, भारत अब एक आत्मविश्वास से ओत–प्रोत राष्ट्र है जो मजबूती से अपने कदम आगे बढ़ाता रहेगा।

‘महत्वाकांक्षी भारत’, ‘सभी के लिए आर्थिक विकास’ और ‘जिम्मेदार समाज’ जैसे तीन सूत्र जिनमें इस बजट को पिरोया गया है, इसे और भी अधिक सर्व-स्पर्शी एवं सर्वसमावेशी बनाता है। ‘महत्वाकांक्षी भारत’ के अंतर्गत कृषि, सिंचाई और ग्रामीण विकास पर 16-सूत्री कार्यक्रम तथा 2.83 लाख करोड़ के बजटीय आवंटन के माध्यम से विशेष ध्यान दिया गया है जो कि मोदी सरकार के पिछले बजटों में ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सर्वांगीण विकास के संकल्प पर आधारित है। साथ ही बजट स्वास्थ्य, जल एवं सिंचाई के विषय जो देश के स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए अति महत्वपूर्ण हैं उन पर विशेष बल दिया है। शिक्षा एवं कौशल पर विशेष बल दिये बिना जनाकांक्षाओं की पूर्ति नहीं की जा सकती इसलिए बजट में इस क्षेत्र के लिए 99,300 करोड़ रुपये का बड़ा प्रावधान किया गया है। इससे नए अवसर मिलेंगे और भविष्योन्मुखी क्षेत्रों का विकास हो पायेगा।

‘सभी के लिए आर्थिक विकास’ के सूत्र को क्रियान्वित करते हुए बजट में उद्योग एवं व्यापार के विकास एवं प्रोत्साहन के लिए 27,300 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मोदी सरकार आने वाले पांच वर्षों में एक लाख करोड़ रुपए आधारभूत संरचना के विकास के लिए खर्च करने वाली है, जिससे इस क्षेत्र का विकास 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के अनुरूप होगा। आधारभूत पाइपलाइंस, आर्थिक गलियारा, राजपथ, एक्सप्रेस–वे, तटीय तथा बंदरगाह सड़कें, रेलवे का विद्युतीकरण, 100 हवाई अड्डों के निर्माण पर बल से देश की अर्थव्यवस्था का भविष्य संवारा जा रहा है। ‘अंत्योदय’ की अवधारणा के आधार पर एक ‘जिम्मेदार समाज’ के निर्माण को ध्यान में रखते हुए महिला, बच्चे एवं सामाजिक कल्याण पर भी विशेष बल दिया गया है। अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग के लिये 85,000 करोड़ रुपये, अनुसूचित जनजातियों के लिए 53,700 करोड़ रुपयों का प्रावधान इस बजट में है। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों एवं िदव्यांग जनों के लिए भी 9,500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।

भारत आज विश्व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसने 2014–19 के बीच 7.4 प्रतिशत की दर से विकास किया जबकि मुद्रास्फीति केवल 4.5 प्रतिशत रही। यह अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। मोदी सरकार को उन अनेक अभिनव पहलों का श्रेय जाता है जिससे देश कांग्रेसनीत यूपीए शासनकाल के भयंकर भ्रष्टाचार, जनता के धन की लूट, ‘पॉलिसी पैरेलिसिस’ एवं कुशासन से बाहर निकला। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शिता तथा कड़े निर्णय लेने की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण ही आज यह संभव हो पाया है कि भारत की उपलब्धियों को पूरे विश्व में सराहा जा रहा है। ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ एवं ‘इज ऑफ लिविंग’ के पैमानों पर प्राप्त उपलब्धियां आज दूसरे देशों के लिए शानदार उदाहरण बन चुके हैं। बजट 2020 हर चुनौती एवं विपरीत परिस्थितियों के सामने उसी दूरदर्शिता, दृढ़ संकल्प एवं राजनैतिक इच्छाशक्ति से आगे बढ़ने का परिचायक है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन को जन–जन की आकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं को इस बजट से पूरा करने के लिए बहुत–बहुत बधाई। इसमें कोई संदेह नहीं कि देश की गौरवशाली यात्रा में यह बजट एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

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