सही शब्द : सही अर्थ-1

दीनदयाल उपाध्याय समाज, संस्कृति, धर्म और राष्ट्र-ये चारों ही ऐसे शब्द हैं, जिनके साथ जीवन का घनिष्ठ संबंध होते हुए भी उनके बारे में देश में बहुत भ्रम फैला हुआ […]

राष्ट्र के वैभव में व्यक्ति का वैभव

     (12 जून, 1959 को संघ शिक्षा वर्ग, दिल्ली में दिए गए बौद्धिक का प्रथम भाग)   दीनदयाल उपाध्याय   जिन संस्कारों के परिणामस्वरूप सामूहिक भावनाओं की सृष्टि राष्ट्र […]

संस्कृति का अर्थ

दीनदयाल उपाध्याय आम लोगों ने यहां संघ कार्य के अनेक रूपों का विचार किया होगा। एक प्रश्न हमारे सामने यह भी आता है कि समय-समय पर हम कहते हैं कि […]

सांस्कृतिक अधिष्ठान

भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा 4 जून, 1959 को कानपुर में संपन्न संघ शिक्षा वर्ग में दिए गए बौद्धिक का अंतिम […]

सांस्कृतिक अधिष्ठान

भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा 4 जून, 1959 को कानपुर में संपन्न संघ शिक्षा वर्ग में दिए गए बौद्धिक का द्वितीय […]

सांस्कृतिक अधिष्ठान

भारतीय जनसंघ के पूर्व अध्यक्ष एवं एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय द्वारा 4 जून, 1959 को कानपुर में संपन्न संघ शिक्षा वर्ग में दिए गए बौद्धिक का संपादित […]

संस्कृति और समाज

दीनदयाल उपाध्याय गतांक का शेष… संघ के काम में वह चीज़ अपने आप आती है। इसलिए हमने वहीं पर इस बात पर जोर दिया कि हम संघ का कार्य निस्स्वार्थ […]

संस्कृति और समाज

दीनदयाल उपाध्याय गतांक का शेष… लेकिन कभी जब व्यक्ति प्रकृति का पालन नहीं करता, तब गड़बड़ हो जाती है। जैसे भोजन कर लिया है, फिर भी यदि किसी ने आग्रह […]