कांग्रेस देश से माफी मांगे


देश में एक अत्यंत दुर्भाग्यजनक स्थिति बन रही है। कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दलों के लिए देश की सेना के पराक्रम पर प्रश्न खड़े करना एक आदत सी बन गई है। कोई भी स्वाभिमानी राष्ट्र अपने राजनेताओं की इन शर्मनाक राजनीति को न तो सहन कर सकता है, न ही उन्हें देश की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने दे सकता है। कांग्रेस जानबूझकर अपने नेताओं को ऐसे प्रश्न करने की छूट दे रखी है जिससे हमारी सेना का आत्मविश्वास डिग जाये। क्या कोई देश के जवानों के बलिदान पर राजनीति करने की सोच भी सकता है? क्या कोई हमारी पराक्रमी सेनाओं पर प्रश्न कर अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकने की सोच सकता है? क्या कोई दल पाकिस्तान की भाषा बोल उसके पक्ष के समर्थन करने का दुस्साहस कर सकता है? यदि कोई इस तरह की राजनीति के बारे में सोच भी सकता है, तो यह केवल यह दर्शाता है कि उसकी सोच कितनी सड़ चुकी है और उस सड़ांध की दुर्गंध अब देश बर्दाश्त नहीं कर सकता। कांग्रेस ने वो पाप किये हैं जिसे न तो भुलाया जा सकता है न ही जिसकी माफी हो सकती है।

सैम पित्रोदा का बयान न केवल अत्यंत निंदनीय है, बल्कि यह कांग्रेस की मानसिकता को भी दर्शाता हैं। पुलवामा में 40 सीआरपीएफ जवानों की शहादत के बारे में यह कहना कि ‘इस प्रकार की घटनाएं होती रहती हैं’ सैम पित्रोदा की घृणित एवं शर्मनाक मानसिकता का परिचायक है। साथ ही, सेना से हवाई हमले का सबूत मांगकर एक बार फिर सेना का अपमान करने का प्रयास हुआ है। आतंकी प्रशिक्षण कैंपों पर हवाई हमले को सैम पित्रोदा ‘गलत’ मान सकते हैं, परन्तु शायद उन्हें नहीं पता कि पूरा देश इस कदम के समर्थन में है। यह अब स्पष्ट है कि क्यों कांग्रेस आतंकवाद का कोई जवाब नहीं ढूंढ पाई और 26/11 मुंबई आतंकी हमले पर हाथ पर हाथ धरे बैठे रही। कांग्रेस नेतृत्व के पास न तो आतंकवाद से लड़ने का जज्बा है और न ही राजनैतिक इच्छाशक्ति। वास्तव में आज कांग्रेस में वे लोग हावी हैं जो आतंकवाद का बचाव करते हैं और उसे समय–समय पर उसे अपना बौद्धिक समर्थन देते रहे हैं।

यह अत्यंत दुर्भाग्यजनक है कि सोनिया–राहुल के नेतृत्व में कांग्रेस आतंकवाद, आईएसआई एवं पाकिस्तान तक के बचाव से पीछे नहीं हट रही है। भारतीय वायुसेना के पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर शौर्यपूर्ण हमले पर सैम पित्रोदा के प्रश्नों को राहुल गांधी के बयान से जोड़कर देखना चाहिए, जिसमें वायुसेना से हर प्रश्न के उत्तर की मांग की गई थी। यह कांग्रेस की रणनीति है कि वायुसेना पर प्रश्न खड़े कर उसका अपमान किया जाय। कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू का शर्मनाक बयान जिसमें उन्होंने वायुसेना का मजाक उड़ाते हुए कहा कि वे आतंकी ठिकाने तबाह करने गये थे या पेड़ उखाड़ने, की देश में कड़ी भर्त्सना हुई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह के द्वारा सेना से सबूत मांगना एवं उन पर कटाक्ष करना देश अभी तक भूला नहीं है। कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद का निंदनीय बयान कभी भूला नहीं जा सकता। सपा नेता रामगोपाल यादव का पुलवामा के बलिदानियों पर दिए गए बयान से यह प्रमाणित होता है कि वोट–बैंक की राजनीति के लिये ये नेता कितने हद तक नीचे गिर सकते हैं।

पुलवामा आतंकी हमले और बालाकोट में वायुसेना के जबरदस्त प्रहार पर कांग्रेस ने जिस प्रकार की प्रतिक्रिया दी है, उससे यह स्पष्ट है कि कांग्रेस न तो आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ने की क्षमता रखती है और न ही जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान का सामना कर सकती है। अपने राजनैतिक हितों के लिए कांग्रेस राष्ट्रीय हितों को भी दांव पर लगा सकती है और अपने बयानों से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से पाकिस्तान का समर्थन भी कर सकती है। यह कितनी बड़ी विडंबना है कि आज जब पूरा विश्व भारत के साथ खड़ा है, कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दल आतंकवाद, आईएसआई एवं पाकिस्तान के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह प्रमाणित हो गया है कि कांग्रेस राष्ट्रीय हित में दलगत राजनीति से ऊपर नहीं उठ सकती है। राष्ट्रीय हितों की अनदेखी तथा सेना का अपमान करने के लिए कांग्रेस को तुरंत पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। राहुल गांधी को अविलंब पूरे देश से क्षमा याचना करनी चाहिए। यदि अब भी वे देश से क्षमा मांगने से चूक जाते हैं, तो जनता उन्हें ऐसा सबक सिखाएगी जिसे वे कभी भूल नहीं पायेंगे।

                                                                                                                                            shivshakti@kamalsandesh.org