10 बैंकों के विलय से बनेंगे चार बड़े बैंक


भाजपानीत केंद्र की राजग सरकार ने देश में विश्वस्तरीय बैंक बनाने की दिशा में बड़ी पहल करते हुये सार्वजनिक क्षेत्र के 10 बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की 30 अगस्त को घोषणा की। इस पहल से न केवल आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी, बल्कि देश को 5,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनाने में भी मदद मिलेगी।

पिछले सप्ताह कर प्रोत्साहन उपायों की घोषणा करने वाली वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने बैंकों के विलय का एलान किया। बैंकों में प्रस्तावित इस विलय के बाद सरकारी बैंकों की संख्या घटकर 12 रह जायेगी। वर्ष 2017 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या 27 थी।

श्रीमती सीतारमण ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया और ओरिएंटल बैंक आफ कामर्स का पंजाब नेशनल बैंक में विलय किया जायेगा। इस विलय के बाद पीएनबी भारतीय स्टेट बैंक के बाद दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जायेगा। सिंडिकेट बैंक का केनरा बैंक में जबकि आंध्रा बैंक और कार्पोरेशन बैंक का यूनियन बैंक आफ इंडिया में विलय होगा। वहीं इलाहाबाद बेंक का विलय इंडियन बैंक में करने की घोषणा की गई।

सरकार 10 बैंकों में उनका पूंजी आधार मजबूत बनाने के लिये 52,250 करोड़ रुपये की पूंजी भी डालेगी। वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘हम घरेलू स्तर पर मजबूत और वैश्विक पहुंच वाले बैंक चाहते हैं …इस विलय से उनके पास काफी संसाधन होंगे और कर्ज की लागत कम होगी।”

उन्होंने कहा कि विलय के बाद भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के मजबूत, पर्याप्त पूंजी वाले वाले 12 बैंक होंगे। ‘‘हम अगली पीढ़ी का बैंक तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।”

गौरतलब है कि श्रीमती सीतारमण ने पिछले सप्ताह करों में कटौती, बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की नकदी में सुधार, वाहन और बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर सरकार का खर्च बढ़ाने और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) रिफंड कार्य में तेजी जैसे उपायों की घोषणा की।

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले दिनों कोयला खनन, अनुबंध विनिर्माण, एकल खुदरा ब्रांड और डिजिटल मीडिया में विदेशी निवेश के नियमों को उदार बनाया।