हरिवंश राज्यसभा के उपसभापति चुने गये


जदयू के राज्यसभा सदस्य श्री हरिवंश को 9 अगस्त को उच्च सदन के उपसभापति पद के लिए चुना गया। उन्हें विपक्ष की ओर से कांग्रेस के उम्मीदवार श्री बी. के. हरिप्रसाद को मिले 105 मतों के मुकाबले 125 मत मिले। सदन की कार्यवाही शुरु होने पर सभापति श्री एम वैंकेया नायडू ने सदन पटल पर आवश्यक दस्तावेज रखवाने के बाद उपसभापति पद की चुनाव प्रक्रिया शुरु करवायी। मतदान में दो सदस्यों ने हिस्सा नहीं लिया। सदन में कुल 232 सदस्य मौजूद थे।

श्री हरिवंश के पक्ष में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह, जदयू के श्री आर. सी. पी. सिंह, शिव सेना के श्री संजय राउत और अकाली दल के श्री सुखदेव सिंह ढींढसा ने प्रस्ताव किया। वहीं श्री हरिप्रसाद के लिये बसपा के श्री सतीश चंद्र मिश्रा, राजद की मीसा भारती, कांग्रेस के श्री भुवनेश्वर कालिता, सपा के श्री रामगोपाल यादव और राकांपा की वंदना चव्हाण ने प्रस्ताव पेश किया। इन प्रस्तावों पर मतविभाजन के बाद सभापति श्री नायडू ने श्री हरिवंश को उपसभापति निर्वाचित घोषित किया। इसके बाद श्री हरिप्रसाद ने श्री हरिवंश को उनके स्थान पर जाकर बधाई दी।

नेता सदन श्री अरुण जेटली, नेता प्रतिपक्ष श्री गुलाम नबी आजाद, संसदीय कार्यमंत्री श्री अनंत कुमार और संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री विजय गोयल ने श्री हरिवंश को बधाई देते हुये उन्हें उपसभापति के निर्धारित स्थान पर बिठाया। इसके बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने श्री हरिवंश को शुभकामनायें देते हुये उनके विभिन्न क्षेत्रों के अनुभव के हवाले से उनके निर्वाचन को सदन के लिये गौरव का विषय बताया। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सदस्य श्री पी जे कुरियन के पिछले महीने सेवानिवृत्त होने के बाद उपसभापति का पद खाली हुआ था।

जीवन परिचय

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के सिताबदियारा गांव में 30 जून, 1956 को जन्मे श्री हरिवंश को श्री जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए और पत्रकारिता में डिप्लोमा की पढ़ाई की। पढ़ाई के दौरान ही मुंबई में उनका ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ समूह में प्रशिक्षु पत्रकार के रूप में 1977-78 में चयन हुआ। वह टाइम्स समूह की साप्ताहिक पत्रिका ‘धर्मयुग’ में 1981 तक उपसंपादक रहे।
उन्होंने 1981-84 तक हैदराबाद एवं पटना में बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की।

1984 में उन्होंने पत्रकारिता में वापसी की और 1989 अक्तूबर तक आनंद बाजार पत्रिका समूह से प्रकाशित ‘रविवार’ साप्ताहिक पत्रिका में सहायक संपादक रहे। श्री हरिवंश ने वर्ष 1990-91 के कुछ महीनों तक तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त सूचना सलाहकार (संयुक्त सचिव) के रूप में प्रधानमंत्री कार्यालय में भी काम किया। ढाई दशक से अधिक समय तक ‘प्रभात खबर’ के प्रधान संपादक रहे श्री हरिवंश को जनता दल (यूनाइटेड) ने राज्यसभा में भेजा।

श्री हरिवंश ने कई पुस्तकें लिखी और संपादित की हैं। इनमें ‘दिसुम मुक्तगाथा और सृजन के सपने’, ‘जोहार झारखंड’, ‘झारखंड अस्मिता के आयाम’, ‘झारखंड सुशासन अभी भी संभावना है’, ‘बिहार रास्ते की तलाश’ शामिल हैं।

हरिवंशजी के अनुभवों से सांसदों को मिलेगा लाभ : नरेन्द्र मोदी

जदयू नेता श्री हरिवंश के राज्यसभा के उपसभापति चुने जाने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि वह समाज के निचले स्तर के लोगों से जुड़े रहे हैं और उनके अनुभवों से पूरे सदन को लाभ मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि हरिवंशजी के चार दशक की पत्रकारिता सामाजिक कारणों से जुड़ी हुई थी, राज-कारण से नहीं। यह सबसे बड़ा कारण था कि उन्होंने समाज कारण वाली पत्रकारिता से अपने को जोड़े रखा और राज- कारण वाली पत्रकारिता से खुद को दूर रखा। वह जन आंदोलन के रूप में अखबार को चलाते थे। उन्होंने उम्मीद जतायी कि हरिवंश के अनुभव और समाज कारणों के प्रति समर्पण से सबको लाभ मिलेगा।