मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों ने 27 विधेयक किए पारित


केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री श्री प्रहलाद जोशी ने मानसून सत्र 2020 को लेकर 24 सितंबर को बताया कि मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में लगभग 167 प्रतिशत और राज्यसभा में लगभग 100.47 प्रतिशत कामकाज हुआ। उन्होंने कहा कि सत्र के दौरान 22 विधेयक (16 लोक सभा में और 6 राज्य सभा में) पेश किए गए।

श्री जोशी ने कहा कि संसद के दोनों सदनों द्वारा 27 विधेयक पारित किए गए, जो विधेयकों के पारण की अभी तक की सर्वोत्तम दर अर्थात 2.7 विधेयक प्रतिदिन है। 11 अध्यादेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अंत:सत्रावधि के दौरान प्रख्यापित किए गए सभी 11 अध्यादेशों को मानसून सत्र के दौरान संसद के अधिनियमों द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।

श्री जोशी ने कहा कि 14 सितंबर को शुरू हुए संसद का मानसून सत्र का समापन 1 अक्टूबर को होना था, लेकिन लोकसभा और राज्यसभा में आवश्यक कामकाज के बाद कोविड-19 महामारी के जोखिम के कारण सदन की कार्यवाही 23 सितंबर को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान 10 दिनों में कुल 10 बैठकें हुईं।

लोक सभा ने तीन ऐतिहासिक श्रम संहिताओं को किया पारित
लोक सभा ने 22 सितंबर को तीन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने वाली श्रम संहिताओं को पारित कर दिया है। ये संहिताएं हैं- (i) औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (ii) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता, 2020 तथा (iii) सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020।

नई श्रम संहिताओं में 50 करोड़ से अधिक संगठित, असंगठित तथा स्व-नियोजित कामगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी, सामाजिक सुरक्षा आदि का प्रावधान किया गया है। ईएसआईसी और ईपीएफओ के सामाजिक सुरक्षा आवरण को और व्यापक बनाकर सभी कामगारों और स्व-नियोजित व्यक्तियों के लिए उपलब्ध कराया गया है।

इससे गिग तथा प्लेटफार्म कामगारों के साथ-साथ 40 करोड़ असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए ‘सामाजिक सुरक्षा निधि’ की स्थापना से सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज को और व्यापक बनाने में सहायता मिलेगी। नियतकालिक कर्मचारी की सेवा शर्तें, उपदान, अवकाश और सामाजिक सुरक्षा नियमित कर्मचारी की तरह ही होंगी।
महिला कामगारों को पुरुष कामगारों की तुलना में वेतन की समानता और दुर्घटना की स्थिति में जुर्माने का 50 प्रतिशत भाग कामगार को अन्य बकायों के साथ दिया जाएगा। प्रवासी कामगारों को वर्ष में एक बार अपने गृह नगर की यात्रा के लिए ‎नियोक्ता से यात्रा भत्ता प्राप्त होगा।

राज्यसभा से पास हुआ विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक 2020

राज्यसभा ने 23 सितंबर को विदेशी अभिदाय विनियमन संशोधन विधेयक 2020 को मंजूरी दे दी, जिसमें विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों के कामकाज में पारदर्शिता के लिए जरूरी प्रावधान किए गए हैं।

विधेयक के उद्देश्यों के अनुसार एफसीआरए के तहत पूर्व अनुमति या पंजीकरण अथवा एफसीआरए के लाइसेंस नवीनीकरण का अनुरोध करने वाले किसी भी व्यक्ति को अब अपने सभी पदाधिकारियों या निदेशकों के आधार नंबर देने होंगे, विदेशी नागरिक होने की स्थिति में पासपोर्ट की एक प्रति या ओसीआई कार्ड की प्रति देना जरूरी होगा।
विधेयक के प्रावधानों से विदेशों से आने वाले अभिदाय की निगरानी में आसानी होगी और पैसे के दुरुपयोग पर रोक लग सकेगी। एनजीओ को जिस कार्य के लिये पैसा मिले, वह उसी कार्य में खर्च होना चाहिए। एनजीओ को विदेशी अनुदान के संबंध में दिल्ली में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में खाता खोलना होगा।
हालांकि, इसके लिए उन्हें दिल्ली आने की जरूरत नहीं होगी और अपने आसपास की किसी भी शाखा के जरिए यह खाता खोला जा सकता है। इस संशोधन विधेयक में एनजीओ के प्रशासनिक खर्च को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 20 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया गया है।