भारत-अमेरिका के गहरे होते रिश्ते


मस्ते ट्रंप’ इतना भव्य कार्यक्रम रहा कि भारत एवं अमेरिका के लिए आने वाले समय में एक अविस्मरणीय आयोजन बन चुका है। अहमदाबाद की सड़कों पर जितनी भारी संख्या में लोग जुटे तथा हवाई अड्डे से साबरमती आश्रम तथा आश्रम से मोटेरा स्टेडियम तक के रास्ते में दोनों ओर खड़े होकर राष्ट्रपति ट्रंप, उनके परिवार एवं अन्य अतिथियों का जो दिल खोलकर भारतीयों ने स्वागत किया, वह अमेरिका के लोग शायद ही भूल पायें। मोटेरा स्टेडियम जो लोगों से पूरी तरह से भरा हुआ था, वहां उपस्थित 1.25 लाख लोगों ने जब बार–बार तालियों की गड़गड़ाहट से राष्ट्रपति ट्रंप, उनके परिवार एवं अन्य अतिथियों का स्वागत किया तब लगता था जैसे पूरा आसमान गुंजायमान हो रहा हो। इस पूरे कार्यक्रम के उत्साह एवं उमंग से विश्व के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के बीच बढ़ रहे परस्पर आदर एवं सद्भावना परिलक्षित हो रही थी। भारत के लोगों ने दिल खोलकर अपने अमेरिकी अतिथियों का स्वागत कर अमेरिका की जनता को अपनी मित्रता एवं प्रेम का संदेश दिया है।

आज भारत एवं अमेरिका के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग तो बढ़ ही रहा है साथ ही एक–दूसरे के प्रति आदर का भाव भी गहरा हो रहा है। भारत न केवल विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, बल्कि लोकतांत्रिक सिद्धांतों एवं मूल्यों पर अडिग रहकर इसने संपूर्ण विश्व के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। भारत आतंकवाद के हमलों का शुरू से ही सामना करता रहा, जबकि अमेरिका को भी 9/11 आतंकवादी हमला सहना पड़ा, जिससे इन दोनों देशों के मन में कोई भी संशय नहीं कि आतंकवाद पूरे विश्व में मानवता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। भारत और अमेरिका वैश्विक मंचों पर आतंकवाद रोकने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इसका एक बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को जाता है जिन्होंने हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे प्रमुख विषय बनाया। यह इसका ही परिणाम है कि आज आतंकवादी संगठनों को पनाह या आर्थिक सहयोग देने के खिलाफ पूरा विश्व कड़ाई से पेश आ रहा है और पाकिस्तान को एफएटीएफ ने अपनी ‘निगरानी सूची’ में डाल रखा है। यह बहुत ही हर्ष की बात थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में उग्र इस्लामी आतंकवाद के खतरे का विशेष रूप से उल्लेख किया, जिससे इस विषय पर भारत के दृष्टिकोण को विश्व–स्तर पर बल मिला है।

भारत एवं अमेरिका के बीच 3 बिलियन डॉलर के रक्षा–सौदा ने दोनों देशों के रिश्ते को और मजबूत किया है। तेल एवं प्राकृतिक गैस पर हुए समझौते से आने वाले दिनों में दोनों देश और भी अधिक करीब आयेंगे। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारत एवं अमेरिका के बीच साझेदारी करने के लिए एक बहुत व्यापक एवं अत्यंत विविध क्षेत्र उपलब्ध है जिस पर दोनों देश का नेतृत्व दीर्घकालिक भागीदारी कर सकता है। स्वास्थ्य पर हुआ समझौता इसी दिशा की ओर इंगित करता है कि दोनों देश भागीदारी के नए क्षेत्र तलाश सकते हैं। ऐसे प्रयास निस्संदेह स्वागत योग्य हैं जिससे विभिन्न क्षेत्रों में भारत–अमेरिका साझेदारी बढ़े तथा ऊर्जा, अंतरिक्ष, रक्षा, शिक्षा, नवाचार, उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में दोनों देश के रिश्ते और भी अधिक गहरे हों। भारत एवं अमेरिका के विविध क्षेत्रों में करीब आना न केवल इन दोनों देशों के परस्पर हित में होगा, बल्कि पूरे विश्व एवं मानवता के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलने में भी सहायक होगा।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं अमेरिकी राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रंप दूरदृष्टि से के गहरे होते परस्पर विश्वास, समझदारी, आदर एवं परस्पर भ्रातृभाव के आधार पर दीर्घकालिक भागीदारी सुनिश्चित होगी। भारत–अमेरिका कांप्रिहेंसिव ग्लोबर पार्टनरशिप के मजबूत होने से दोनों देशों के मध्य सद्भाव एवं परस्पर विश्वास बढ़ा है। भारत एवं अमेरिका के गहरे होते रिश्ते से भारत–प्रशांत क्षेत्र में निश्चित रूप से शांति एवं समृद्धि में सहायता मिलेगी। एक व्यापक व्यापार समझौते की ओर इशारा, संयुक्त राष्ट्र में सुधार, संयुक्त राष्ट्र रक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता, भारत का न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में प्रवेश जैसे विषयों पर अमेरिका की स्थिति स्पष्ट होने से भारत–अमेरिका संबंधों को बहुत बल मिला है। इसमें कोई संदेह नहीं कि विभिन्न क्षेत्रों में भारत–अमेरिका संबंधों को सुदृढ़ करने का समय अब आ चुका है। ‘नमस्ते ट्रंप’ से भारत–अमेरिका के लोगों के बीच साझीदारी, सद्भाव, आदर एवं परस्पर विश्वास के बंधन और अधिक सुदृढ़ होंगे।
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