भारत अब दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था : आईएमएफ


क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) के संदर्भ में भारत की जीडीपी (पीपीपी) 10.51 ट्रिलियन डॉलर है

श्रीनरेन्द्र मोदी के निर्णायक और दूरदर्शी नेतृत्व में भारत 2.94 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। जब साल 2014 में श्री नरेंद्र मोदी ने देश का शासन संभाला था, तब विश्व अर्थव्यवस्था में भारत 9वें स्थान पर था। अक्टूबर में आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार भारत अब फ्रांस, ब्रिटेन से आगे निकल गया और दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

देश की जीडीपी वृद्धि दर पिछले एक दशक में दुनिया में सबसे अधिक रही है- जो नियमित रूप से 6-7% की वार्षिक दर से बढ़ी है।

मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की साल 2016 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस तेजी के लिए कई कारक जिम्मेदार है, जिसमें मुख्य रूप से शहरीकरण और प्रौद्योगिकियों क्षेत्र में सुधार शामिल है।
साल 2010 तक भारत, ब्राजील और इटली जैसे देशों से पीछे था और 9वें स्थान पर बना हुआ था।
पिछले 25 वर्षों में भारत का उदय एक नाटकीय अंदाज में हुआ है और साल 1995 के बाद भारत की में 700% से अधिक की वृद्धि देखी गई है।

यह प्रगति उल्लेखनीय है। अत्यधिक गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या में, साल 2000 से साल 2015 तक 160 िमलियन की कमी आयी है।

विश्व बैंक के अनुसार, देश ने सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर अपनी नीतियों को समायोजित किया है और भारत भविष्य में अपने विकास की संभावानाओं को अधिक मजबूत और समावेशी बनाने के उपाय कर रहा है।

अमेरिका-आधारित थिंक टैंक वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2.94 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ दुनिया में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था गया है, साल 2019 में ब्रिटेन और फ्रांस को पछाड़कर भारत ने इस मुकाम को हासिल किया है। गौरतलब है कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था का आकार 2.83 ट्रिलियन डॉलर है और फ्रांस की अर्थव्यवस्था का आकार 2.71 ट्रिलियन डॉलर है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) के संदर्भ में भारत की जीडीपी (पीपीपी) 10.51 ट्रिलियन डॉलर है, जो जापान और जर्मनी से अधिक है। भारत की अधिक जनसंख्या के कारण भारत का जीडीपी प्रति व्यक्ति आय 2,170 डॉलर (यूएस का 62,794 डॉलर) है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में आर्थिक उदारीकरण 1990 के शुरुआती दौर में आरंभ हुआ। इसमें औद्योगिक नियंत्रण, विदेशी व्यापार और निवेश पर नियंत्रण और राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों का निजीकरण शामिल था।

”इन उपायों ने भारत को अपने आर्थिक विकास में तेजी लाने में मदद की है।”

भारत का सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का 60 प्रतिशत है और 28 प्रतिशत रोजगार देने वाले के साथ दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विनिर्माण और कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था के दो अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं।