जम्मू-कश्मीर पृथ्वी का स्वर्ग था, है और रहेगा : अमित शाह


त 6 अगस्त को लोक सभा में केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक प्रस्तुत किया। इस विधेयक पर बहस के दौरान कांग्रेस नेता श्री अधीर रंजन चौधरी ने केंद्र पर नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया, जिस पर गृह मंत्री श्री अमित शाह ने ऐतराज जताया। श्री शाह ने पूछा- आप बताएं कि कौन सा नियम तोड़ा गया।

लोक सभा में कांग्रेस के सदन के नेता श्री अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि आप कश्मीर के अंदरूनी मसला बताते हैं लेकिन 1948 से यूएन इस मामले को देख रहा है। इसे अंदरूनी मामला कैसे कह सकते हैं ?

हमारे एक प्रधानमंत्री ने शिमला समझौता किया, दूसरे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर समझौता किया। हमने इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए और इसे द्विपक्षीय मुद्दा बताया तो अचानक जम्मू-कश्मीर अचानक आंतरिक मसला कैसे हो गया ?

कुछ दिन पहले एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से कहा था कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा है, आप इसमें दखलअंदाजी नहीं कर सकते। क्या अब भी जम्मू-कश्मीर अंदरूनी मसला रह जाता है ?

कांग्रेस सासंद ने कहा कि ‘आपने कहा कि कश्मीर आंतरिक मामला है, लेकिन 1948 से संयुक्त राष्ट्र की नजर यहां पर बनी हुई है।’ श्री अधीर के इस बयान को बीच में काटते हुए गृह मंत्री श्री अमित शाह ने पूछा कि क्या कांग्रेस का यह स्टैंड है कि यूनाइटेड नेशन कश्मीर को मॉनिटर कर सकता है? इस पर कांग्रेस सांसद बैकफुट पर आ गए और कहा कि वह सिर्फ स्पष्टीकरण चाहते हैं। वह सिर्फ जानना चाहते हैं कि स्थिति क्या है ?

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने जवाब देते हुये कहा कि मामला 1948 में यूएन में पहुंचाया गया था। फिर भूतपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाधी ने जो शिमला समझौता किया था, उसका जिक्र किया। उन्होंने एक तरह से इस सदन की क्षमता पर सवाल उठाया है कि यह सदन इस बिल पर चर्चा कर सकता है कि नहीं? जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसकी स्पष्टता भारत और जम्मू-कश्मीर के संविधान में है। जम्मू-कश्मीर के संविधान में भी इसका स्पष्ट जिक्र है।

  • यह पॉलिटिकल चीज नहीं है। यह कानूनी विषय है। जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, इस बारे में कोई कानूनी विवाद नहीं है। भारत और जम्मू-कश्मीर के संविधान में बहुत साफ है कि वह भारत का अभिन्न अंग है। जम्मू कश्मीर में संविधान के आर्टिकल 1 के सारे अनुच्छेद लागू हैं। इस अनुच्छेद के मुताबिक भारत एक सभी राज्यों को संघ है। सीमाओं के व्याख्या करते हुए राज्यों की लिस्ट भी दी है। इसमें 15वें नंबर पर जम्मू कश्मीर है। हमारे संविधान ने जम्मू-कश्मीर की जो सीमाएं तय की हैं, उसमें पीओके भी आता है।
  • मैं जब जम्मू-कश्मीर की बात करता हूं तो उसमें पीओके और अक्साई चीन भी समाहित है। मैं इसलिए आक्रामक हूं कि जम्मू और कश्मीर के पीओके को आप भारत का हिस्सा नहीं मानते हैं क्या?… क्या बात कर रहे हो आप… जान दे देंगे इसके लिए।
  •  इससे साफ है कि जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर पर बिल को लेकर सदन के अधिकार पर सवाल उठाया है। श्री अमित शाह ने कहा कि यह केवल राजनीतिक मामला नहीं है, बल्कि क़ानूनी मामला भी है।
  •  जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और इसे लेकर कोई क़ानूनी और सियासी बाधा नहीं है। इस पर कानून बनाने के लिए देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद को अधिकार है। हमें कोई कानून बनाने और संकल्प के लिए कोई रोक नहीं सकता है। इसी अधिकार के तहत कैबिनेट की अनुशंसा पर राष्ट्रपति जी की मंजूरी से मैंने ये दोनों चीजें यहां पर लाया हूं।
  •  इस सदन ने बहुत सारे ऐतिहासिक क्षण देखे हैं। मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूं कि यह प्रस्ताव और बिल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखे जाएंगे। कल अनुच्छेद 370 1डी का प्रस्ताव पास किया गया। इसमें उल्लेख किया गया है कि जम्मू-कश्मीर को विधानसभा कहकर ही बुलाया जाएगा। अनुच्छेद 370 की धारा तीन के तहत राष्ट्रपति को अधिकार है कि एक नोटिफिकेशन जारी कर 370 को निष्क्रिय कर सकते हैं। वे तब ही नोटिफिकेशन जारी कर सकते हैं, जब जम्मू-कश्मीर संविधान की अनुशंसा हो। उसके बाद ही यह हुआ है। कांग्रेस ने भी 1952 और 1965 में इसका इस्तेमाल किया था। राष्ट्रपति ने कैबिनेट की अनुशंसा के बाद ही ऐसा किया है। मुझे उम्मीद है कि सदन के सभी सदस्य धारा 370 हटाने के लिए एक साथ वोट करेंगे।
  •  ये प्रस्ताव और बिल भारत के स्वर्णिम इतिहास का हिस्सा होगा। इस बिल से आने वाले वक्त में जम्मू-कश्मीर सदियों तक भारत का हो जाएगा।
  •  अनुच्छेद 370 की धारा तीन में यह अधिकार निहित है और सभी सदस्य इस धारा को ध्यान से पढ़ लें कि राष्ट्रपति को यह अधिकार है। राष्ट्रपति इस पर फ़ैसला ले सकते हैं। इसका मतलब ये होता है अनुच्छेद 370 की धारा तीन का उपयोग कर अनुच्छेद 370 को ख़त्म किया जा सकता है।
  •  राष्ट्रपति ये अधिसूचना तभी निकाल सकते हैं जब जम्मू-कश्मीर की विधानसभा से ऐसी अनुशंसा आए। इस पर भी समझ लीजिए इसी प्रोविजन का इस्तेमाल कांग्रेस ने दो बार किया। इसी के तहत कांग्रेस ने महाराजा को ख़त्म कर सदर-ए-रियासत किया और बाद में सदर-ए-रियासत को हटाकर गवर्नर किया।
  • जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में राष्ट्रपति शासन चल रहा है। धारा 356 के एक बी के अनुसार राज्यपाल के पास विधानसभा की सारी शक्तियां हासिल हैं और राज्यपाल की अनुशंसा से ये बिल लाया गया है।
  •  जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने पर बोले गृह मंत्री, ‘दोनों हिल काउंसिल अस्तित्व में रहेंगे। हिल काउंसिल के सदस्यों को मंत्री का दर्जा मिलेगा।’
    श्री अमित शाह ने आगे कहा कि –
  •  सदस्यों के मन के भाव को समझ रहा हूं क्योंकि सब लोग 70 साल से एक दर्द को दबाकर बैठे हैं।
  • कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है लेकिन किसी अन्य राज्य को नहीं बोलते, उसकी वजह 370 है क्योंकि इसी ने जनमानस के मन में शंका पैदा की थी, कश्मीर भारत का अंग है या नहीं। धारा 370 कश्मीर को भारत से जोड़ती नहीं बल्कि जोड़ने से रोकती है, जो आज सदन के आदेश के बाद खत्म हो जाएगी।
  • मैं प्रधानमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति की तारीफ़ करता हूं। उनके कारण 370 का कलंक हटा है जो वोट बैंक के लालच के कारण अब तक नहीं हट पाया था।
  • देश का बच्चा-बच्चा बोलता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। हम ये क्यों नहीं बोलते कि यूपी देश का अभिन्न अंग है, तमिलनाडु देश का अभिन्न अंग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 370 ने इस देश और दुनिया के मन में एक शंका पैदा कर दी थी कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है या नहीं।
    v यहां उपस्थित एक दो लोगों के अलावा किसी ने अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध नहीं किया। वो भी चाहते हैं कि 370 हट जाए, लेकिन उनके सामने वोट बैंक का प्रश्न आ जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र का इस मामले में कोई दखल नहीं है, भारतीय संसद को जम्मू-कश्मीर के विभाजन का पूरा अधिकार है। शिमला समझौता भी इसे और स्पष्ट कर देता है। भारत की सीमाओं के अंदर कोई भी निर्णय लेने के लिए भारत के संसद के दोनों सदनों को पूरा संवैधानिक अधिकार है।
  • जहां तक केंद्र शासित राज्य का सवाल है तो मैं देश और मुख्य रूप से घाटी के लोगों को विश्वास दिलाता हूं कि स्थिति सामान्य होते ही पूर्ण राज्य का दर्जा देने में हमें कोई संकोच नहीं होगा।
  • मोदी सरकार PoK को कभी देने वाली नहीं है और वहां की 24 सीटें आज भी हमारा हिस्सा रहने वाली हैं। इस पर हमारा दावा उतना ही मजबूत है जितना पहले था।
  • कश्मीर मुद्दा 1948 में UN में पहुंचा था। लेकिन जब भारत-पाकिस्तान ने UN को प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तब किसी भी देश की सेना को सीमाओं के उल्लंघन का अधिकार नहीं था। लेकिन 1965 में पाकिस्तान की ओर से सीमा का उल्लंघन करने पर यह प्रस्ताव खारिज हो गया था। जम्मू-कश्मीर के लिए इस सदन को संपूर्ण अधिकार हासिल हैं कोई भी बाध्यता नहीं है।
  • संयुक्त राष्ट्र में इस विषय को कौन लेकर गया, आकाशवाणी से गृह मंत्री को बगैर भरोसे में लिए हुए मसले को UN में ले जाया गया। यह काम भी नेहरूजी ने ही किया था। धारा 370 की वजह से अलगाववाद की भावना को पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में भड़का रहा है। उन्होंने कहा कि 370 से इस देश के कानून की पहुंच वहां नहीं होती थी।
  • जब हमारी सेना कश्मीर में विजयी हो रही थी और पाकिस्तानी कबीलाइयों को भगाया जा रहा था तब अचानक शस्त्र विराम किसने किया, वो भी नेहरू जी ने किया और उसी के कारण आज PoK है, अगर सेनाओं को उस वक्त छूट दी होती तो पूरा PoK भारत का हिस्सा होता।
  • 370 जम्मू-कश्मीर के संबंध में अस्थायी उपबंध है। इसे हटाने की ज़रूरत इसलिए है क्योंकि यह देश की संसद के अधिकारों को जम्मू-कश्मीर में कम करता है। इस कारण जम्मू कश्मीर के लोगों में अलगाववाद होता है, देश का क़ानून वहां की विधानसभा की सहमति के बिना वहां नहीं पहुंच सकता। जबकि 371 देश के अन्य राज्यों को विकासात्मक कार्यों के लिए, उनकी समस्याओं को निपटाने के अधिकार देता है। यह देश एकता की एकता और अखंडता के लिए बाधक नहीं है। इसे क्यों हटाएंगे? संबंधित राज्य आश्वस्त रहें, इसे हटाने का हमारा कोई इरादा नहीं। राज्यों के कुछ समस्याओं को 371 में रखा गया है और इनकी तुलना संभव नहीं है और हम इसे कतई हटाने नहीं जा रहे हैं।
  • 370 हटाना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वह देश की संसद के महत्व को कम करता है। देश का कानून वहां तक नहीं पहुंचता है। जिसकी वजह से पाकिस्तान वहां के लोगों के मन में अलगाववाद को बढ़ाता है।
  • इसी रास्ते पर चलकर कांग्रेस ने 2 बार 370 के अंदर संशोधन किया है। क्या उस वक्त वो रास्ता ठीक था, रास्ता तो ठीक है लेकिन यह आपके वोट बैंक के आड़े आता है इसलिए आपको ठीक नहीं लगता।
  •  (सुप्रिया सुले के सवालों पर) वहां 1989-95 तक आतंकवाद इतना बढ़ा कि सालों तक कश्मीर में कर्फ्यू रखना पड़ा था, हमने स्थिति न बिगड़े इसके लिए इंतजाम किए हैं। सरकार पहले से तैयार है और उससे नहीं रोका जा सकता। वहां से सुरक्षाबल नहीं हटेंगे और न हम दबाव में आएंगे। 70 साल तक चर्चा चल रही है तीन पीढ़िया आ गईं, जो पाकिस्तान से प्रेरणा लेते हैं उनसे चर्चा करें, हम हुर्रियत से चर्चा नहीं करना चाहते।
  • जम्मू कश्मीर ने दर्द को सहा है और 40 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं। उनके विकास के लिए जो भी करना है वो हम करके दिखाएंगे। मोदीजी का दिल बड़ा है पहले कार्यकाल में सवा लाख करोड़ दिया था जिसमें से 80 हजार करोड़ खर्च हो चुका है और भी देने जा रहे हैं।
  • इतिहास में जो गलतियां हुईं थीं, उन्हें हम नहीं दोहराने जा रहे। बेरोजगारी हर राज्य की समस्या है लेकिन वहां आतंकवाद क्यों नहीं पनपा, धारा 370 से घाटी में अलगाववाद बढ़ा जिस पर पाकिस्तान ने पेट्रोल डालने का काम किया।
  • आंध्र का विभाजन बगैर चर्चा के हुआ। विधानसभा ने प्रस्ताव खारिज किया, मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया, फिर आपने कैसी चर्चा करके यह फैसला लिया। अगर आपने किया तो अब हमें क्यों टोक रहे हैं। मार्शलों ने सांसदों को बाहर फेंका, काला दिन आज नहीं है, काला दिन वो था।
  • हम हुर्रियत के साथ चर्चा नहीं करना चाहते। घाटी के लोग हमारे हैं, हम उनको सीने से लगाएंगे, उनको प्यार से रखेंगे, पूरा हिंदुस्तान उन्हें प्यार से रखेगा। अगर उनके मन में कोई आशंका है तो जरूर चर्चा करेंगे, हमें कोई आपत्ति नहीं है।
  • केंद्र शासित प्रदेश का सवाल है तो बता दूं कि यह लद्दाख की मांग थी लेकिन कश्मीर के बारे में फिर से विचार किया जाएगा। नेहरू जी ने तो 370 को भी अस्थाई बताया था उसे हटाने में 70 साल लगे लेकिन हमें 70 साल नहीं लगेंगे।
  • जम्मू कश्मीर में विधानसभा, मुख्यमंत्री, मंत्री सब रहेंगे। श्री शाह ने कहा कि जनमत संग्रह तभी खत्म हो गया जब पाकिस्तान ने भारत की सीमाओं को तोड़ा था, अब UN में जनमत संग्रह को कोई मुद्दा नहीं है। घाटी में स्थिति न बिगड़े इसके लिए कर्फ्यू डाला है, स्थिति बिगड़ी है इसलिए नहीं लगाया। जम्मू-कश्मीर के लिए बनाया गया कानून किसी भी सूरत में सांप्रदायिक नहीं हो सकता, यह आरोप मैं सिरे से खारिज करता हूं।
  • असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हम ऐतिहासिक ग़लती करने जा रहे हैं। हम ग़लती करने नहीं बल्कि ऐतिहासिक ग़लती को सुधारने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में पांच साल के बाद जम्मू कश्मीर का विकास देखकर घाटी के लोगों को समझ आएगा कि अनुच्छेद 370 की ख़ामियां क्या थीं।
  • 1989 से लेकर अब तक 41 हजार लोग मारे गए फिर भी क्या हम उसी रास्ते पर चलना चाहते हैं। 70 साल इसी रास्ते पर चले हैं अब क्या रास्ता बदलना नहीं चाहिए। कब तक वोट बैंक की राजनीति करते रहेंगे, कब देश हित और घाटी के हित के बारे में सोचेंगे, लद्दाख के युवाओं के बारे में कब सोचेंगे। जम्मू-कश्मीर के अंदर मोदी सरकार में होने वाले विकास को पूरी दुनिया देखेगी।
  • हम सिर्फ वोट बैंक और चुनावी फायदे के लिए ऐसे फैसले नहीं लेते, बल्कि देश हित और देश की सुरक्षा के लिए ऐसे फैसले लिए जाते हैं। घाटी की जनता की भलाई के लिए ही यह फैसले लिए जा रहे हैं। धारा 370 के फायदों के बारे में एक भी सदस्य ने नहीं बताया अगर इसे चालू रखना है तो इसका कुछ फायदा भी तो होना चाहिए।
  • जो कश्मीर में धारा 370 लागू रखना चाहते हैं वह लोग बाल विवाह का समर्थन करते हैं और उसे जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में आज तक बाल विवाह कानून लागू नहीं है। वहां के सिख, जैन और बौद्ध भाइयों के लिए अल्पसंख्यक आयोग क्यों नहीं बनना चाहिए।
    v शिक्षा का अधिकार जम्मू कश्मीर के बच्चों को क्यों नहीं मिलना चाहिए। भूमि अधिग्रहण और दिव्यांगों को लिए बने कानून में वहां लागू नहीं होते।
  • देश भर में परिसीमन हुआ लेकिन जम्मू कश्मीर में कितनी भी आबादी बढ़ जाए लेकिन परिसीमन नहीं हो सकता क्योंकि वोट बैंक को परेशानी हो रही थी, लेकिन 370 के हटते ही परिसीमन किया जा सकेगा।
  • जम्मू कश्मीर में चिंता 370 की नहीं है बल्कि राष्ट्रपति शासन में खुलने वाली फाइलों से चिंता है। राष्ट्रपति शासन आते ही वहां ठंड में पसीने आने लगे हैं और अब फाइलें खुल रही हैं।
  • दलितों और आदिवासियों के आरक्षण का क्या कांग्रेस विरोध कर रही है। वहां के लोगों को आरक्षण का लाभ क्यों नहीं मिलना चाहिए, धारा 370 के पक्ष में खड़े लोग क्या इस आरक्षण के खिलाफ हैं।
  • धारा 370 को बचाने वाले यह भी याद रखें उन्हें जनता के बीच जवाब देना होगा। इस धारा की वजह से जम्मू कश्मीर के विकास को रोका गया और लोकतंत्र का गला घोंटा गया। वहां कांग्रेस सरकार में आए संविधान संशोधन भी लागू नहीं हुए, क्योंकि वोट बैंक प्रभावित हो रहा था। तीन परिवारों की वजह से वहां का विकास नहीं हो सका।
  • अगर तीन परिवारों के नाम बता दूंगे तो तिलमिला जाएंगे, पूरा देश जानता है कि वो कौन तीन परिवार हैं। गृह मंत्री ने कहा कि जल कल्याण का जो पैसा केंद्र से गया उससे जनता का पूरा विकास नहीं हुआ क्योंकि 370 की वजह से भ्रष्टाचार चलता रहा। यह पैसा कहां गया, इसी 370 को ढाल बनाकर भ्रष्टाचार करने का काम वहां के नेताओं ने किया है।
  • आतंकवाद का मूल गरीबी नहीं है, गरीब देश का वफादार होता है कभी हाथ में हथियार नहीं उठाता। धारा 370 का दुष्प्रचार हुआ जिससे वहां आतंकवाद बढ़ता चला गया, लोगों को बरगलाया गया और वहां की जनता को गरीबी के अलावा कुछ नहीं मिला। देशभर के बाकी राज्यों में आतंकवाद क्यों नहीं पनपा क्योंकि वहां 370 नहीं थी जो अलगाववाद का मूल पैदा करती थी।
  • यदि मनमोहन सिंह जी और इंद्र कुमार गुजराल जी शरणार्थी के रूप में जम्मू-कश्मीर गए होते तो उन्हें वोटिंग का अधिकार भी न मिला होता। वे पंजाब गए और देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे। ये कैसा 370 है और कैसा मानवाधिकार ?
  • 370 ने हमेशा पाकिस्तान को भारत के खिलाफ उकसाने का मौका दिया, आप सोचिए कि इससे अब तक क्या मिला। यह कानून घाटी के लोगों को अपने नजदीक ला पाएंगे और वहां विकास के नए रास्ते खुलेंगे।
  • जम्मू कश्मीर पृथ्वी का स्वर्ग था, है और रहेगा। गृह मंत्री ने कहा कि अटलजी पूरे जीवन 370 के खिलाफ लड़े हैं और जेल भी गए थे। आज अटलजी की पार्टी के ही नरेंद्र मोदी को पूर्ण बहुमत मिला और आज 370 हट रही है।
  • लोहिया जी ने 370 को भारत और कश्मीर को अलग करने वाले अनुच्छेद बताते हुए इसे हटाने की अपील इसी सदन में की थी, क्या वो सेक्युलर नहीं थे।
  • कश्मीरी पंडितों, सूफी संतों के मानव अधिकार नहीं थे जिन्हें कश्मीर से बाहर निकालकर फेंक दिया गया। 370 के समर्थक दलित, आदिवासी, महिला, शिक्षा के विरोधी हैं। इसे हटाने का समर्थन करने वाले आतंकवाद विरोधी है और मेरी सरकार इसका समर्थन नहीं कर सकती। सभी प्रदेशों की तरह पहली बार जम्मू-कश्मीर को भी आजादी के बाद अधिकार दिए जा रहे हैं।

सामाजिक संकल्प हुआ स्वीकार: लोकसभा में गृह मंत्री की ओर से लाया गया संकल्प स्वीकार किया गया। इसके पक्ष में 351 और विपक्ष में 72 वोट पड़े। एक सांसद गैर मौजूद रहा जबकि कुल 424 सदस्यों ने वोटिंग में हिस्सा लिया।

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल: जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक लोक सभा से भी पारित। इसके पक्ष में 370 और विरोध में 70 मत पड़े।

आरक्षण विधेयक वापस लिया गया: गृहमंत्री जी ने जम्मू-कश्मीर आरक्षण विधेयक वापस लेेते हुए कहा- जब अनुच्छेद 370 निष्प्रभावी हो जाएगा तो भारत के सभी क़ानून वहां लागू हो जाएंगे। ऐसे में इस विधेयक की ज़रूरत नहीं रहेगी। यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो चुका है ऐसे में वहां भी इसे वापस लेने की गुज़ारिश करूंगा।

मोदी सरकार की इच्छा-शक्ति बहुत मजबूत है : केंद्रीय गृह मंत्री

केंद्रीय गृह मंत्री व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने 5 अगस्त को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के लिये जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल 2019 के अंतर्गत उपर्युक्त दो संकल्प और दो बिल विचार तथा पारित करने के लिए प्रस्तुत किये।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि घाटी के लोगों को भी 21वीं सदी के साथ जीने का अधिकार है। धारा 370 के कारण सरकार द्वारा बनाए गए कानून वहां नहीं पहुंच पाते। उनका कहना था कि मोदी सरकार युवाओं को अच्छा भविष्य देना चाहती है, उनको अच्छी शिक्षा, अच्छा रोजगार देना चाहती है, उनको संपन्न बनाना चाहती है ताकि भारत के दूसरे हिस्सों का जिस प्रकार विकास हुआ है उसी तरह की घाटी का भी विकास हो।

श्री शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन है और उस अधिकार के तहत राष्ट्रपति के संविधान आदेश 2019 (जम्मू-कश्मीर के लिये) पर संसद के इस सदन में प्रस्तुतिकरण किया जा रहा है।

श्री शाह ने कहा कि धारा 370 तो पहले से ही अस्थाई है और अस्थाई व्यवस्था को 70 साल तक खींचा गया। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से अनुच्छेद 370 के सिर्फ खंड एक को छोड़कर अन्य खंड लागू नहीं होंगे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा खत्म करने के लिये भी प्रस्ताव रखा तथा जम्मू-कश्मीर में विधान सभा के साथ अलग केंद्र शासित प्रदेश बनेगा, जबकि लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने की बात की। श्री शाह ने कहा कि जम्मू, कश्मीर, लद्दाख और विशेषकर घाटी को धारा 370 से क्या-क्या नुकसान हुए हैं इस बात की किसी ने परवाह नहीं की। उनका कहना था कि धारा 370 के कारण घर-घर में गरीबी दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार ने सदैव ही जम्मू-कश्मीर को प्रति व्यक्ति ज्यादा धन उपलब्ध कराया, फिर भी विकास की गति नहीं बढ़ पाई। केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया करोड़ों रुपया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।

श्री शाह ने यह भी कहा कि धारा 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं हो पाई, यह धारा महिला विरोधी, गरीब विरोधी, आदिवासी विरोधी है। उनका कहना था कि जम्मू कश्मीर में लोकतंत्र प्रफुल्लित नहीं हुआ, भ्रष्टाचार बढ़ा और चरम सीमा पर पहुंच गया।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के बाद, जम्मू-कश्मीर में निजी निवेश के दरवाजे खोले जाएंगे, जिससे वहां विकास की संभावना बढ़ेगी। निवेश में वृद्धि से रोजगार सृजन में वृद्धि होगी और राज्य में सामाजिक-आर्थिक बुनियादी ढांचे में और सुधार होगा। उन्होंने कहा कि भूमि खरीदने से निजी लोगों और बहुराष्ट्रीय कंपनियों से निवेश आएगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

श्री अमित शाह ने सदन में आश्वासन दिया कि उचित समय पर केंद्र शासित प्रदेश से राज्य का दर्जा दिया जायेगा।