कौशल भारत: नीतियां हर महिला को अपनी क्षमता हासिल करने में सहयोगी बनाएं


चाहे वह भारत की आजादी के लिए 1857 का विद्रोह हो या आजादी का संघर्ष हो,
महिलाओं ने हमेशा भारत को गौरवान्वित किया है

महेन्द्र नाथ पाण्डेय

8 मार्च को हम अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिलाओं का सम्मान करते हैं। हमारे देश में महिलाएं सामाजिक, वित्तीय और राजनीतिक क्षेत्रों में प्रगति कर रही हैं। महिलाओं के लिए समर्पित इस दिन पर व्यक्तिगत तौर पर कुछ शब्दों लिखते हुए मुझे बहुत खुशी मिलती है।

चाहे वह भारत की आजादी के लिए 1857 का विद्रोह हो या आजादी का संघर्ष हो, महिलाओं ने हमेशा भारत को गौरवान्वित किया है। आज भी, महिलाएं देश के विकास और समाज के उत्थान के लिए पूरी निष्ठा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन कर रही हैं। वे विभिन्न क्षेत्रों में कुशलतापूर्वक काम कर रही हैं, जैसे शिक्षाविद, साहित्य, संगीत और नृत्य, खेल, मीडिया, व्यवसाय, सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राजनीति और सामाजिक विकास आदि।

यही नहीं, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरीय शहरों की महिलाएं राजनीति से लेकर कॉर्पोरेट क्षेत्र में मौजूद बाधाओं को तोड़ रही हैं। साथ ही, महिलाएं अपने नेतृत्व और पंचायत चुनावों में अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी के माध्यम से समाज को एक नई दिशा दे रही हैं। बढ़ती जागरूकता और स्पष्ट इरादे के साथ महिलाएं आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतिष्ठानों को मजबूत कर रही है। एक लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए यह बहुत अच्छी बात है।

कॉरपोरेट क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में निरंतर इजाफा हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महिला भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सूचना प्रौद्योगिकी के साथ-साथ बैंकिंग और वित्त क्षेत्र में भी महिलाओं की उपस्थिति बढ़ रही है। पिछले साल, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान -2 की कमान दो महिलाओं को सौंपने का फैसला किया और इन महिलाओं ने इस मिशन की तैयारी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

महिलाओं को सम्मान देते हुए हमारे प्राचीन शास्त्रों में कहा गया है कि “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”, जिसका अर्थ है “जहां महिलाओं की पूजा की जाती है वहीं ईश्वर का निवास होता है”। यह सच है कि यदि हम सभी क्षेत्रों में महिलाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण से जोड़ते हैं, तो हम अपने देश और समाज की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे। यही कारण है कि हमें अपनी बेटियों को सर्वोत्तम शिक्षा देनी होगी और उन्हें देश के विकास की धारा के साथ जोड़ना होगा।

मेरी ऐसा मत है कि यदि हम महिलाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं, तो पहले हमें उनका कौशल विकास करना होगा। जब एक महिला शिक्षित और कुशल होती है, तो वह न केवल एक परिवार, बल्कि पूरे समाज को शिक्षित और कुशल भी बनाती है। जब तक महिलाएं पूरी तरह से शिक्षित, कुशल और समृद्ध नहीं होंगी, तब तक देश वांछित आर्थिक विकास हासिल नहीं कर सकता है।
हमारी सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है जैसेकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला ई-हाट योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, साक्षी योजना, लाडली योजना, डिजिटल लाडो और स्वच्छ भारत मिशन शामिल है। हमारी सरकार महिलाओं के पोषण से जुड़े मुद्दों पर भी बड़े पैमाने पर काम कर रही है।

मुझे खुशी है कि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस संबंध में मिलकर काम कर रहे हैं।

हम जानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति के पास एक अद्वितीय कौशल होता है। लेकिन आवश्यक है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि एक तंत्र इस कौशल की सर्वोत्तम संभव तरीके से पहचाना करें और इससे आगे बढ़ाने में आवश्यक सहयोग प्रदान करें। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री के रूप में यह सुनिश्चित करना मेरी मौलिक जिम्मेदारी है कि हमारे देश की विभिन्न व्यवसायों से जुड़ी सभी महिलाएं अपने-अपने कौशल में प्रशिक्षण प्राप्त कर उसे रोजगारपरक बनाने में सफलता हासिल करें। हम चाहते हैं कि उनके इस कौशल का प्रयोग स्वरोजगार और उनकी प्रगति में किया जा सकें। हम भी तेज गति से इस उद्देश्य को प्राप्त करने में सफल हो रहे हैं।

भारत में लगभग 68.12 लाख महिलाओं को प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 2.0 के तहत प्रशिक्षित किया गया है। जन शिक्षण संस्थान योजना के तहत लगभग 4.08 लाख महिलाओं को 2018-2020 अवधि में प्रशिक्षित किया गया है, जबकि 38.72 लाख महिलाओं को औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षित किया गया है। वर्तमान में महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए देश भर में 18 राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान हैं। महिलाओं को बुनियादी, सैद्धांतिक और उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए विशेष कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है।

यह खुशी और गर्व की बात है कि जहां भारत में महिलाएं इलेक्ट्रॉनिक्स, फैशन डिजाइन, प्रौद्योगिकी और व्यवसाय प्रबंधन जैसे विषयों का अध्ययन कर रही हैं। वहीं ऐसे महिलाएं भी हैं जो नए जमाने के विषयों जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा एनालिटिक्स, 3 डी प्रिंटिंग इत्यादि के साथ पारंपरिक कौशल जैसे सौंदर्य, स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सेवा में भी आगे बढ़ रही है, ऐसी महिलाएं की संख्या में भी इजाफा देखने को मिला है जो गैर-पारंपरिक कौशल क्षेत्रों जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और हार्डवेयर के क्षेत्र में अपना करियर बना रही हैं।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ने महिलाओं के कौशल को मजबूत किया है और उन्हें रोजगार के लिए तैयार किया है। प्रधानमंत्री कौशल केंद्रों में स्वरोजगार जैसे दर्जी, सौंदर्य चिकित्सक, ग्राहक सेवा अधिकारी, हेयर स्टाइलिस्ट, योग प्रशिक्षक आदि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हम बहुत ही जल्द केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे आयुष्मान भारत योजना, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी मिशन में महिलाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए देखेंगे। इन कार्यक्रमों में शामिल होकर महिलाएं समाज को एक नया आयाम देने जा रही है। वास्तव में नए भारत के निर्माण में महिलाओं की शिक्षा और कौशल विकास एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने जा रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं को शुरू किया है, जिन्होंने हमारे देश की महिलाओं को प्रोत्साहित किया है और उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाया है।

हमारी सरकार के प्रयासों ने देश की महिलाओं के बीच विश्वास के माहौल को जन्म दिया है। उन्हें अब इस बात का यकीन हो गया है कि देश का सरकारी तंत्र उनके साथ खड़ा है, जो महिलाओं के सम्मान और विकास के प्रति वचनबद्ध है। पिछले कुछ वर्षों में हमारी सरकार ने महिलाओं की शिक्षा और उनके कौशल को सम्मानित करते हुए प्रगति की एक नई मिसाल कायम की है। हम यह सुनिश्चित करने की प्रतिज्ञा करते हैं कि सरकार के यह प्रयास प्रत्येक भारतीय महिला तक पहुंचे। हम पूरे संयम के साथ इस प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए तरह से तैयार हैं। मैं भारतीय महिलाओं की शक्ति को सलाम करता हूं।

लेखक केन्द्रीय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री हैं