मोदी हैं, तो भरोसा है


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 70वें जन्मदिवस पर विशेष लेख

   -जगत प्रकाश नड्डा

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी आज विश्वास और उम्मीद के प्रतीक हैं। उनके नेतृत्व में भारत आंतरिक मोर्चे, अंतरराष्ट्रीय मंच और आम जन के विषयों पर दृढ़ विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। जिन संकल्पों को लेकर भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई थी, जिन विषयों पर पार्टी अपने स्थापना काल से मुखर और सक्रिय रही और जिन कार्यों को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसे मनीषियों ने आगे बढ़ाया, पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं ने जिन अभियानों को देश के आम जन तक पहुंचाया और जो संकल्प भारत को विश्वगुरु बनाने तथा समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत बनाने हेतु लिए गए उन संकल्पों को देश मोदी जी के नेतृत्व में आज साकार होते देख रहा है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इन छह सालों में देश के नागरिकों में गर्व और स्वाभिमान का संचार हुआ। अखिल विश्व में भारत के प्रति देखने और सोचने का नजरिया बदला। ‘सवा सौ करोड़ देशवासी’ शब्द हमारी क्षमता और गौरवबोध के संबल बने। नेतृत्व सक्षम हो तो वही परंपरागत तंत्र उच्च मनोबल के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने को आतुर रहता है। प्रधानमंत्री मोदी जी में आम नागरिक ने अपने जीवन की खुशहाली का समाधान देखा। उनके हर वाक्य को मंत्र माना। उनके हर अभियान में देश स्वतः स्फूर्त भागीदार बना। देश के प्रधानमंत्री के प्रति यह भाव व सम्मान होना देश और नागरिकों का सम्मान है, लोकतंत्र का सम्मान है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के रूप में प्रधान सेवक ने देश को विश्वास दिलाया कि यह जनतंत्र है जहां जनता ही जनार्दन है। सत्ता की कुर्सी सेवा के लिए है। देश की जनता प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में जिस अटूट विश्वास को जताती रही है, प्रधानमंत्री जी ने भी उन आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को स्पर्श करने का निरंतर प्रयास किया है।

प्रधानमंत्री जी का ही नेतृत्व है कि हर देशवासी उनके नेतृत्व में देश के प्रति अपने हर योगदान के लिए तत्पर रहता है। हमारे पड़ोसियों से सम्बन्ध जिन पूर्व की नीतियों और निर्णयों के कारण चले आ रहे थे। उन्हें प्रगाढ़ करने के प्रधानमंत्री जी के प्रयासों को देश जानता है। दो कदम आगे बढ़कर हाथ मिलाने और विश्वास करने का वातावरण भारत ने पूरे विश्व के सामने दिखाया। श्रद्धेय अटल जी के अमर वाक्य ‘मित्र बदले जा सकते हैं, पड़ोसी नहीं’ की दृष्टि से अपने पड़ोसियों से मित्रता को जीवंत करने के प्रयास ही नहीं किए, बल्कि पूरा विश्व गवाह है कि भारत किस तरह आत्मीयता और सम्मान से अपने संबंधों के प्रति आग्रही रहता है। पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीति पर भारत का पुराना रवैया और वर्तमान तेवर पाकिस्तान देख चुका है। आज चीन के साथ सीमा पर बनी स्थिति में देश मोदी जी के नेतृत्व में अटूट विश्वास रखते हुए भरोसा करता है, जिससे कि देश का सबसे प्रभावी और मजबूत स्टैंड आज चीन के सामने दिख रहा है जिसने बराबरी के साथ पड़ोसी को एहसास कराया कि नया भारत स्वाभिमान से जीने का आत्मबल लेकर चल रहा है, जहां नागरिक और राष्ट्रहित से समझौता नहीं होता है। यह मनोबल प्रधानमंत्री मोदीजी ने देश को दिया है।

‘गरीबी’ और ‘आम जनता’ अभी तक पोस्टरों और नारों में स्थायी भाव के साथ मौजूद थे। मोदी जी ने उनकी चिंताओं के समाधान को धरातल पर उतारा। सरकार के वायदों पर टकटकी लगाकर प्रतीक्षा करने वाले देश के आम जन को विश्वास दिलाया कि उनकी सरकार उन्हीं की सेवा हेतु कृतसंकल्प है। आज देश के नागरिक सरकार की योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। योजनाएं उनके जीवन के हर पहलू को स्पर्श कर रही हैं और पारदर्शी रूप में उनके पास चलकर आ रही हैं। समाज के हर वर्ग का अपनी सरकार के प्रति आदर भाव होना बताता है कि सरकार ने लोकतंत्र में लोक के सम्मान का भाव उत्पन्न किया है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कालखंड में गरीब को ध्यान में रखकर बनी योजना और नीति प्रत्यक्ष रूप से गरीब की सेवा कर रही है। उनके सम्मान, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास, रोजगार जैसे मूलभूत विषयों का मोदी सरकार द्वारा समाधान हो रहा है। शौचालय जैसे आवश्यक किंतु उपेक्षित विषय पर लाल किले की प्राचीर से चिंता जता कर मोदी जी ने पूर्व की परंपरा ही नहीं तोड़ी, बल्कि अहसास दिलाया कि राष्ट्र के संबोधन में केवल भारी भरकम विषयों और अलंकारों से कहने के बजाय धरातल की सच्चाई पर चर्चा होनी चाहिये और उसे साकार करने का संकल्प ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर लेना चाहिये।

जन-धन खाते, रोजगार, आवास योजना, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि और आयुष्मान भारत जैसे विषय बताते हैं कि सत्ता सुख भोगने या पीढ़ियों को उपकृत करने का साधन नहीं है। लीक से हटकर मोदी जी ने ‘टू द पीपल, फ़ॉर द पीपल, बाय द पीपल’ के विचार को सार्थक किया। आमजन को सरकार की उपयोगिता, सरकार के निर्णय और स्वयं नागरिक होने की जिम्मेदारी के बोध होने और राष्ट्रीय अभियानों में नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का वातावरण बनाया।

पूर्व में दलों द्वारा सत्ता को स्थायी बनाए रखने के उपक्रम इस देश में चले। वोट बैंक के खेल के माइंडसेट से बाहर निकल कर देश के लिए सोचने का नजरिया प्रधानमंत्री मोदी जी का ब्लूप्रिंट है, जिसमें गरीब, जरूरतमंद की चिंता प्राथमिक है। लोकतंत्र में विकास के अवसर क्षेत्र, वर्ग या व्यक्ति के आधार पर न होकर आवश्यकता के आधार पर होंगे। यह नजरिया आज सिस्टम में भी विकसित हुआ है। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाकर इसी विचार को पुष्ट किया गया है कि देश के सभी नागरिक और क्षेत्र समान हैं। सबका विकास समान अधिकारों के साथ होगा। हमारे पूज्य डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसी विचार के लिए बलिदान दिया। अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने का सपना भी मोदी सरकार में ही मुमकिन हुआ। मुस्लिम बहनों के लिए तीन तलाक जैसा अपमानजनक विषय इसलिए समाप्त किया गया कि किसी समाज की आधी आबादी को किसी प्रथा से पीड़ित नहीं किया जा सकता। आजादी के बाद से ही सरकारों ने सरकारी सिस्टम को अपने निजी हितों को साधने और अपने सांचे में ढाल कर जिस तरह पिंजरे में बंद रखा था, आज वही तंत्र देश के आमजन के लिए जवाबदेह और दायित्वशील होकर विकास की नई इबारत लिख रहा है। यह सोच प्रधानमंत्री मोदीजी द्वारा सिस्टम को दिया गया नया नजरिया आज हमें उसके कामकाज में दिखाई दे रहा है।

प्रधानमंत्री जी ने सदैव अपने संबोधन में एक सौ पच्चीस करोड़ देशवासियों को देश की तकदीर बदलने वाला साधन और संसाधन माना। अभी तक जिसे भीड़ की संज्ञा और बढ़ती आबादी को सभी दिक्कतों की जड़ माना जाता था उसे नया नजरिया देकर प्रधानमंत्री जी ने उसे नए मायने दिए ‘अगर हम उपभोक्ता हैं तो उत्पादक क्यों नहीं।’ हमारी बाहरी देशों व तकनीकी पर निर्भरता बदलने का काम प्रधानमंत्री जी ने किया। मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया जैसे अभियान देश की धमनियों में विकास रोजगार का संचार करने वाले साबित हुए। यही कारण है कि प्रधानमंत्री जी के संबोधन में देश को हर बार नई उम्मीद और ऊर्जा का संचार होता है देश उनके अभियान में स्वतः सम्मिलित हो जाता है। उनके प्रेरक अभियान देश को नया भारत बनाने के लिए है। पिछले 6 वर्षों में देश ने वे सभी बदलाव अनुभव किए हैं। जीवन के हर पहलू को स्पर्श करती प्रधानमंत्री मोदीजी की सोच और दर्शन उन्हें देश के भरोसे का प्रतीक बनाती है।

एक अत्यंत निर्धन पृष्ठभूमि से आने वाले प्रधानमंत्री मोदीजी ने एक नागरिक के रूप में जिन अनुभवों का जीवन में साक्षात्कार किया, वह उनके चिंतन का स्थायी उत्प्रेरक है जिन्हें वे हर योजना, विचार और कार्यक्रम में प्रमुखता से स्थान देते हैं। आम आदमी उनकी इसी मौलिकता में अपनी निकटता देखता है। शौचालय एक महिला की निजी जिंदगी में कितना महत्वपूर्ण है, उस पर संवेदनशीलता की पराकाष्ठा तक जाकर सोचना और धरातल पर उसके समाधान को उतारने का राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम लाना दुरूह कार्य था, जो जन-आंदोलन बन गया। शौचालय न होने पर किसी महिला की विवशता का जिक्र उनके अनेक संबोधनों में मिलता है। ईंधन की व्यवस्था एक नारी की दिनचर्या का जरूरी और समय खपाने वाला हिस्सा था, जिसका समाधान उज्ज्वला योजना के रूप में एक महाभियान बन गया। प्रधानमंत्री मोदीजी द्वारा बेटियों की शिक्षा, स्वरोजगार, सुरक्षा और मातृत्व से लेकर वृद्धावस्था तक हर जगह सरकार की योजना का संबल देना बताता है कि पदों पर संवेदनशील व्यक्ति के बैठने पर किस तरह समाज को प्रत्यक्ष लाभ मिलता है।

वैश्विक महामारी कोरोना पूरे विश्व को प्रभावित किया है। समाज और जीवन के हर क्षेत्र पर इसका असर पड़ा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। कोरोना के कारण देशवासियों का जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। विश्वभर में भय और निराशा का वातावरण बना, किंतु भारत ने इन परिस्थितियों का डटकर मुकाबला किया। देश के 80 करोड़ लोगों को मार्च से नवंबर तक के लिए मुफ्त राशन की व्यवस्था की गई। 1.70 लाख करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना, 20 लाख करोड़ रुपये की निधि से आत्मनिर्भर भारत अभियान की शुरुआत की गई। गरीबों को रोजगार देने के लिए प्रधानमंत्री गरीब रोजगार योजना की शुरुआत की गई। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर को दुरुस्त करने के लिए एक लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई। वोकल फॉर लोकल का अभियान शुरू कर प्रधानमंत्री जी ने आत्मनिर्भर भारत को एक नई दिशा दी। मोदी हैं, तो भरोसा है, यह भाव प्रधानमंत्री जी ने अचानक पैदा नहीं किया। 2014 की परिस्थितियां याद करें, तब देश केवल भ्रष्टाचार की चर्चाओं और अवसाद की स्थिति में घिरा था। प्रधानमंत्री मोदीजी ने इन परिस्थितियों से देश को उबारा ही नहीं बल्कि सकारात्मक मनोबल भी दिया।

कोरोना काल से पहले देश में वेंटिलेटरों की अपेक्षित संख्या नहीं थी, हमारे स्वास्थ्य ढांचे का तंत्र वैश्विक महामारी से निपटने में सक्षम नहीं था। मास्क और सैनिटाइजर पर भी हमारी लगभग बाहरी निर्भरता थी। लॉकडाउन जैसे ऐतिहासिक निर्णय के समय संक्रमण को रोककर हमने अपने स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत ही नहीं किया, बल्कि सैनिटाइजर और मास्क के उत्पादन से इस कोरोना काल में लघु उद्यम भी खड़ा किया और हमारी बाहरी निर्भरता भी समाप्त हुई। आज हम पीपीई, किट, फेस कवर और वेंटीलेटर्स निर्यात कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के छह वर्षों के कार्यकाल में देश की जनता को आजादी के बाद पहली बार इस बात की अनुभूति हुई है कि गरीबों के लिए काम करने वाली सरकार कैसी होती है, देश को आगे ले जाने वाली सरकार कैसी होती है और देश के प्रति दुनिया के नजरिये में बदलाव लाने वाली सरकार कैसी होती है।

(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)