नरेन्द्र मोदी: विकसित भारत का वैश्विक चेहरा


-सर्बानंद सोनोवाल

भारत को विश्वगुरु के आसन पर प्रतिष्ठित करने के लक्ष्य से महान जननेता, विशाल व्यक्तित्व के धनी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मूल्यबोध एवं भारतीय दर्शन पर आधारित उठाए गए कदमों से वैश्विक स्तर पर हमारे देश की छवि मजबूत हुई है। इस महान व्यक्ति का जीवन और कर्म आज विश्ववासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुका है। राजनीति, समाज नीति, अर्थव्यस्था, विज्ञान, तकनीक समेत सभी क्षेत्रों में परिवर्तन की लहर बहाकर प्रधानमंत्री मोदी जी ने हरेक भारतीय के आत्मविश्वास को सुदृढ़ किया है।

चुनौतियों के समक्ष सिर नहीं झुकाने वाले इस विश्व समादरित नेता का जीवन जिस तरह से आलोकित हुआ है, वह हरेक व्यक्ति के लिए अत्यंत प्रेरक है। एक चाय दुकान से विश्व के शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश भारतवर्ष के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचना कोई साधारण बात नहीं है। चुनौतियों के विरुद्ध साहस के साथ लड़ते हुए आगे बढ़ने की प्रगाढ़ मानसिकता के अधिकारी हैं मोदीजी। आर्थिक रूप से कमजोर एक परिवार में जन्म लेकर पिता के उपार्जनस्थली एकमात्र चाय दुकान में हाथ बंटाते हुए मोदी जी ने जिस तरह अपनी पढ़ाई भी जारी रखी, यह उनकी दृढ़ निश्चय का परिचायक है। कठोर जीवन संग्राम में लगे रहने के बावजूद भारतमाता की सेवा की अदम्य इच्छा के कारण वे अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल हुए हैं। कठोर परिश्रम के आदर्श और पिता के प्रति अनुराग समाज के लिए एक विरल दृष्टिकोण है।

2014 में देश का प्रधानमंत्री बनने के साथ ही देश को विश्व में शक्तिशाली बनाने के लिए ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ की नीति के आधार सभी जाति-जनजाति, भाषा-भाषी, धर्मावलंबी लोगों को लेकर उन्होंने जो यात्रा आरंभ की थी, उसका फलदायी परिणाम आज हरेक भारतवासी देख रहा है। इस महान नेता के भविष्य में झांकने की क्षमता के कारण अप्रवासी भारतीय भी आज स्वयं को भारतीय कहलाने में गौरव का अनुभव करते हैं। प्रत्येक विदेश दौरे में मिले अपार आदर और स्नेह पर्वतसम व्यक्तित्व के धनी इस प्रधानमंत्री की विश्वव्यापी लोकप्रियता को प्रमाणित करता है।

प्रधानमंत्री जी पांच हजार वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता-संस्कृति से समग्र देशवासी को आगे लेकर बढ़े और विश्वमंच को हमारे देश की शक्ति और सामर्थ्य से परिचित कराने के लिए किए गए उनके प्रयास के फलस्वरूप विश्व की 750 करोड़ आबादी भारत की तरफ आकर्षित हुई। भारतीय संस्कृति और मूल्यबोध ने आज विश्व को नई प्रेरणा दी है। प्रधानमंत्री जी के आह्वान का समर्थन करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की औपचारिक घोषणा करके विश्व नेता के रूप में उनके व्यक्तित्व को अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति प्रदान की। मोदी जी के मजबूत पदक्षेप के कारण ही आज विश्ववासी विश्व शांति, स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए योगाभ्यास की जरूरत को समझ पाए हैं।
21वीं सदी विज्ञान और प्रौद्योेगिकी का युग है। नई-नई प्रौद्योगिकी के माध्यम से देश की नई पीढ़ी को आगे ले जाने के लिए 2014 में जब माननीय प्रधानमंत्री जी ने ‘डिजिटल इंडिया अभियान’ का नारा दिया था, तब अधिकतर लोग उनके इस पदक्षेप की गहराई समझ नहीं पाए थे। विज्ञानसम्मत नजरिये से संचार साधन, प्रशासन में पूरी तरह पारदर्शिता और सभी कामकाज डिजिटल माध्यम से पूरा करके भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की उनकी पहल से आज देश तेजी से आगे बढ़ने में सफल हुआ है। आज आगामी पीढ़ी आगे बढ़कर ‘डिजिटल इंडिया’ के स्वप्न को वास्तविक रूप देने के लिए खुद आगे बढ़ रही है। कोविड-19 जैसे महासंकट के समय देशवासियों ने डिजिटल के उपयोग की गंभीरता और महत्व को समझा। शिक्षा से लेकर सरकारी-गैरसरकारी कार्यालयों में कामकाज आज डिजिटल माध्यम से करना संभव हो पाया है।

उसी तरह देश की सभी जाति-जनजाति की स्वयं की भाषा-संस्कृति को पुनर्जीवित कर स्वाभिमान के साथ जीवित रह सके, इसके लिए मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से लागू की गई ‘नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ से जो राह दिखाई गई है, उसे आज देशवासी अच्छी तरह महसूस कर रहे हैं। विश्व मंच पर आधुनिक चिंतनधारा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय परंपरा व मूल्यबोध की नींव पर जीवन गढ़ने के लिए यह शिक्षा नीति नई आशा और उत्साह ले आई है। नई शिक्षा नीति के वास्तविक रूप से लागू होने से भारतवर्ष विश्व का बौद्धिक ज्ञान केंद्र बन उठेगा।

प्रधानमंत्री जी वैश्विक स्तर पर हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के लक्ष्य से आरंभ से ही कार्य क्षेत्र में लगे हुए हैं। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में मोदीजी की अगाध आस्था है। प्रधानमंत्री के रूप में संसद में पहली बार प्रवेश करने के समय संसद भवन की सीढ़ी पर मत्था टेक कर लोकतंत्र के प्रति अपनी गहरी आस्था का उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री जी ने यह दर्शाया है कि संसदीय लोकतंत्र हमारे जीवन का प्रवाह और विकास का पावन क्षेत्र है। प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने स्वयं को एक सेवक बताया है। देश सेवा ही उनके जीवन का मूलमंत्र है, पिछले छह वर्षों से देशवासी स्वयं अपनी आंखों से इसे देख रहे हैं।

भारत की सार्वभौमिकता, एकता और अखंडता की रक्षा के लिए प्रधानमंत्री जी के उठाए गए कदमों से आज देशवासियों में आत्मविश्वास बढ़ा है। पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक, भारत-चीन सीमा पर भारतीय सेना की मजबूत स्थिति–प्रधानमंत्री का देश के प्रति गंभीर दायित्व का प्रमाण है। कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर उन्होंने भारतवासियों में ‘एक राष्ट्र, एक संविधान’ के आदर्श की अवधारणा कायम की है। महात्मा गांधी के रामराज्य के सपने को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री जी ने भारतीय मूल्यों पर आधारित जो-जो कदम उठाए हैं, वे सब हमारे लिए एक महत आदर्श हैं। 500 वर्ष पुराने राम मंदिर भूमि विवाद का कानून के अनुसार निपटारा तथा राम मंदिर भूमि पूजन कर माननीय प्रधानमंत्री ने देशवासियों की दीर्घकालिक आकांक्षाओं को पूरा किया है।

देश के अन्य प्रदेशों के साथ ही असम तथा पूर्वोत्तर को समान रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री जी आरंभ से ही पूरी दृढ़ता के साथ विभिन्न कदम उठा रहे हैं। इसके पहले के किसी भी प्रधानमंत्री ने असम तथा पूर्वोत्तर की प्राकृतिक संपदाओं और संभावनाओं को लेकर इस तरह का काम नहीं किया था। प्राकृतिक संपदाओं से समृद्ध होने के बावजूद पहले की सरकारों की उपेक्षा के कारण इस क्षेत्र के लोगों का मनोबल तेजी से गिरने लगा था। फलस्वरूप पूर्वोत्तर के लोग देश की विकास प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बन पा रहे थे। इसके विपरीत आज माननीय प्रधानमंत्री की दूरदर्शी नीति के कारण इस अंचल के आम लोगों का मनोबल बढ़ा है।

इस युगद्रष्टा ने पूर्वोत्तर को ‘अष्टलक्ष्मी’ और ‘देश के विकास का इंजन’ मानते हुए तेजी के साथ विकास योजनाओं को लागू करने लिए ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। इस अंचल के लिए केंद्रीय योजनाएं समय पर और सही ढंग से लागू हो सकें, इसके लिए उन्होंने हरेक केंद्रीय मंत्री को हर पखवाड़े एक बार इस अंचल का दौरा करने का निर्देश दिया है। वहीं देश के इतिहास में एक मिसाल कायम करते हुए प्रधानमंत्री मोदी जी ने स्वयं 30 से अधिक बार इस अंचल का दौरा किया है। यह दर्शाता है कि पूर्वोत्तर के लिए उनके हृदय में कितना गहरा लगाव है। प्रधानमंत्री जी के ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के जरिए असम तथा पूर्वोत्तर के साथ दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ने के उपायों के फलस्वरूप यातायात, संचार, व्यवसाय-वाणिज्य, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, खेल, सूचना-तकनीक, कृषि इत्यादि हर क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खुले हैं।
प्रधानमंत्री जी ने असमिया जाति के मान-सम्मान को आज देश और दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई है। निजी जीवन के साथ ही विभिन्न राष्ट्रीय-अतंरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में असमिया गामोछा पहनकर उन्होंने असमिया बुनकरों के स्वाभिमान को विश्व भर में उज्ज्वलित किया है। बुनकरों के हथकरघे में बुने सपनों को मान देकर उन्होंने समग्र जाति के स्वाभिमान को बढ़ाया है। सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका को देश का सर्वोच्च सम्मान ‘भारत रत्न’ प्रदान कर असमिया संस्कृति को और अधिक उज्ज्वल करने के साथ ही हमारे क्षेत्रीय स्वाभिमान को नए रूप में संजीवनी दी है। असम की हरेक जाति-जनगोष्ठी के प्रति उनकी सद्भावना अतुलनीय है। बीटीआर समझौते के जरिए राज्य में शांति स्थापना के प्रयासों के फलस्वरूप आज राज्य में विकास प्रक्रिया को विशेष गति मिली है।

प्रधानमंत्री ने देशवासियोें के समक्ष कर्म-संस्कृति की नई मिसाल पेश की है। एक सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र के सपने को साकार करने की दिशा में परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है। दूसरों को उपदेश देने के बजाय स्वयं एक आदर्श स्थापित करते हुए मोदी जी ने आज देशवासियों को कठिन परिश्रम करने के लिए प्रेरित किया है। रोजाना 20 घंटे काम में लगे रहकर उन्होंने एक आदर्श दृष्टिकोण हमारे सामने रखा है।

देश के प्रत्येक व्यक्ति के समान विकास के लिए प्रधानमंत्री जी ने स्वयं को समर्पित किया है। विशेष रूप से समर्थ व्यक्ति को दिव्यांग की आख्या देकर उन्हें सामाजिक मान-मर्यादा और स्वाभिमान से जीवन-यापन का अवसर उपलब्ध कराया है। महिला, शिशु, किसान, श्रमिक, बेरोजगार सभी के लिए योजनाएं बनाकर उन्हें जमीनी स्तर तक ले जाने में सफल रहे हैं। लॉकडाउन के कारण मंद पड़ी देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए उन्होंने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की और अब उसे लागू भी किया जा रहा है। ‘आत्मनिर्भर’ भारत बनाने के प्रधानमंत्री जी के प्रयासों से देशवासियों का आत्मविश्वास बढ़ा है। देशवासियों के हित में किसी सरकार द्वारा वृहद आर्थिक पैकेज घोषित करने का उदाहरण भारत के इतिहास में नहीं मिलता।

गौरवमयी संस्कृति और परंपरा से समृद्ध भारतवर्ष गढ़ने के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों ने आज देशवासियों में आत्मानुभति का संचार किया है। हरेक नागरिक राष्ट्र निर्माण का हिस्सेदार बनने को उत्सुक है। देश की प्रगति की गति को तेज करने के प्रधानमंत्री के प्रयासों से भारतवर्ष का विश्व का एक प्रमुख शक्तिशाली राष्ट्र बनना निश्चित है। इस बात को यथार्थ अनुभवों के साथ हम सभी समझ चुके हैं।

(लेखक असम के मुख्यमंत्री हैं)