प्रताड़ित अल्पसंख्यकों का खुले दिल से स्वागत


नागरिकता संशोधन अधिनियम पर पूरे देश में कुव्यवस्था फैलाने का कांग्रेसी षड्यंत्र लोगों के सामने उजागर हो चुका है। कांग्रेस यहां तक चली गई कि पूरे देश में इसने दुष्प्रचार कर लोगों के मन में शंका का बीज डालना चाहा ताकि देश में सांप्रदायिक विभाजन की लकीरें खींच जाये। जिस प्रकार से कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दलों ने लोगों के बीच भ्रम उत्पन्न कर उन्हें गुमराह करने का कुप्रयास किया, वह सर्वथा निंदनीय एवं विभाजनकारी राजनीति का खतरनाक खेल है। कांग्रेस को समझना चाहिए कि झूठ एवं मिथ्या प्रचार से अफवाह फैलाकर समाज में थोड़े समय के लिए भ्रम की स्थिति पैदा की जा सकती है, परंतु अंतत: ऐसी राजनीति को पराजय का मुख ही देखना पड़ता है। पहले भी इसने समाज को बांटकर ‘वोट–बैंक’ की राजनीति करनी चाही परंतु जनता ने इसकी राजनीति को नकार कर चुनावों में इसे बार–बार धूल चटाई है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस ने लगातार जनता द्वारा पाठ पढ़ाने के बाद भी वोट–बैंक की राजनीति का दामन नहीं छोड़ा है तथा वह समाज को बराबर बांटने के कुप्रयास में संलिप्त है।

नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019, जिसका लक्ष्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का है, उसके संबंध में समाज में निराधार भ्रम उत्पन्न कर कांग्रेस और इसके सहयोगी दल विरोध कर रहे हैं। वे यहां तक जा चुके हैं कि महात्मा गांधी की इच्छाओं का विरोध करने से भी नहीं हिचक रहे। महात्मा गांधी ने कहा था कि पाकिस्तान के हिंदुओं एवं सिखों के प्रति भारत का नैतिक दायित्व है। जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद के सिद्धांत पर भारत का विभाजन मजहब के आधार पर हुआ था, जिसकी हृदय विदारक तस्वीरें अभी हर भारतीय को दहलाती हैं। यह विश्व की एक ऐसी बड़ी त्रासदी थी जिसमें लाखों–करोड़ों लोग या तो मारे गए या विस्थापित होने को मजबूर हो गए। विभाजन की उस त्रासदी को आज भी इन देशों के अल्पसंख्यक सहने को मजबूर हैं तथा उनके जान–माल, परिवार, महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है। इनमें से अनेक को या तो धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जाता है अथवा वे भारत में आकर शरण लेने को विवश हैं। बड़ी संख्या में वहां से पलायित अल्पसंख्यक भारत के विभिन्न भागों में शरणार्थी के रूप में दयनीय स्थिति में जीवन जीने को मजबूर हैं। नागरिकता मिलने से वे एक नई जिंदगी भारत में शुरू कर सकते हैं। विभिन्न अवसरों पर लगभग सभी राजनैतिक दलों के नेताओं ने प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की मांग की है। इसमें कोई शंका नहीं कि वे विभाजन के शिकार हैं और भारत में शरण लेने के सिवा अब उनके पास कोई और रास्ता नहीं है। प्राचीन काल से ही विश्व के विभिन्न भागों में प्रताड़ित समुदायों को आश्रय देने की भारत की परंपरा रही है। सदियों पहले जिन लोगों ने भारत में शरण ली थी आज भी शांतिपूर्ण तरीके से देश में रहकर भारतीय समाज एवं संस्कृति में अपना अनुपम योगदान दे रहे हैं। पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान से आये प्रताड़ित अल्पसंख्यक जो अपने जान–माल, धर्म, स्वाभिमान की सुरक्षा के लिए भारत आये हैं, वो अपनी जिंदगी में एक नई रोशनी की राह देख रहे हैं। भारत का इनके प्रति एक नैतिक दायित्व है, परंतु यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रख कर ‘वोट–बैंक’ की राजनीति को ही सर्वोपरि मान रखा है।

यह अत्यंत संतोषजनक है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय संसद के दोनों सदनों ने ‘नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को भारी बहुमत से पारित कर दिया तथा राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद अब यह एक कानून में परिवर्तित हो चुका है। पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान से आये प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदायों जिनमें हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी एवं ईसाई शामिल हैं, इससे उनके जीवन में एक नया सवेरा आया है। अब ये प्रताड़ित अल्पसंख्यक एक नई जिंदगी शुरू कर सकते हैं तथा एक बार फिर उनके जीवन में नए रंग भरने की आशा जगी है। इस कदम के लिए जिस प्रकार की दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति देश को देखने को मिला है उससे इस अधिनियम को जगह–जगह पर भारी समर्थन मिल रहा है तथा मोदी सरकार के इस पुनीत कार्य की लोग मुक्त कंठ से सराहना कर रहे हैं। संसद में जिस प्रकार से विधेयक को देश के गृहमंत्री एवं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने प्रस्तुत किया तथा हर प्रश्न का जवाब देकर इस विधेयक का विरोध करने वालों की बोलती बंद कर दी, उसकी देश के कोने–कोने में भूरि–भूरि प्रशंसा हो रही है। मोदी सरकार ने देश की अनेक चिरलंबित समस्याओं का समाधान कर दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन कर शांति, सुरक्षा एवं समृद्धि से परिपूर्ण एक नए भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है। पूरा राष्ट्र, सीमा पार से आये प्रताड़ित अल्पसंख्यकों का खुले दिल से आज स्वागत कर रहा है।

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