अटलजी से जुड़ी यादों को किया साझा

गत 16 सितंबर को पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहली मासिक पुण्यतिथि के मौके पर ‘अटल काव्यांजलि’ कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद किया गया। देशभर में लगभग 4 हजार स्थानों पर यह कार्यक्रम संपन्न हुआ। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने जोधपुर (राजस्थान) में आयोजित काव्यांजलि कार्यक्रम को संबोधित किया। इन कार्यक्रमों में जहां अटलजी की कविताएं सुनाई गईं, वहीं अन्य कवियों ने अपनी रचनाएं सुनाईं एवं वक्ताओं ने अपने संस्मरण सुनाए। बता दें कि 16 अगस्त को श्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन हो गया था।

भारतीय जनता पार्टी, नई दिल्ली जिला इकाई द्वारा 16 सितंबर को डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेन्टर में ‘अटल काव्यांजलि’ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने किया और समापन सत्र को केन्द्रीय विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने सम्बोधित किया।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि अटल जी एक परोपकारी संस्कारों से पोषित व्यक्तित्व थे, जिनके विचारों को लोग राजनीतिक विचारधारा की भिन्नता के बाद भी सुनते और समझते थे। उन्होंने कहा कि अटल जी विदेश नीति में भी निपुण थे। जब उनके शासनकाल में चीन ने सिक्किम को भारत का अभिन्न अंग मानने से इंकार किया उस वक्त उन्होंने ऐसी कूटनीतिक विदेश नीति रखी जिसके चलते उनके 2003 के दौरे के दौरान चीन को स्वीकार करना पड़ा कि सिक्किम भारत का अभिन्न अंग है।

श्री सिंह ने कहा कि 1999 में जब पाकिस्तान ने भारत की सीमाओं में घुसने की चेष्टा की, तब अटलजी ने सेना को सख्ती से निपटने का आदेश दिया जिसके चलते भारतीय सेना पाकिस्तान को खदेड़ते हुये उसकी सीमा के अंदर वापस ले गई। परोपकारी स्वभाव के अटलजी ने सेना को पाकिस्तान में और अधिक अंदर न जाने को कहा। इसके पीछे उनका यह विश्वास था कि भारतीय सभ्यता अतिक्रमणकारी नहीं है और यह उनकी विशाल हृदयता का भी प्रमाण है।

दिल्ली प्रदेश भाजपाध्यक्ष श्री मनोज तिवारी ने कहा कि आज दिल्ली भर में ऐसे ही अटल काव्यांजलि कार्यक्रम हो रहे हैं जैसे कार्यक्रम में हम यहां डॉ़ अम्बेडकर सेन्टर में उपस्थित हैं। उन्होंने कहा कि अटलजी बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे और हमेशा छोटे राजनीतिक विवादों से ऊपर रहते थे। संसद में एक विपक्ष के नेता के तौर पर वह अपनी वाकपटुता एवं कविताओं से सत्ताधारी दल के सदस्यों का भी दिल जीत लेते थे। केंद्रीय मंत्री श्री विजय गोयल ने भी अटलजी से जुड़े संस्मरणों को साझा किया।

अपने सम्बोधन में श्रीमती सुषमा स्वराज ने लगभग 1977 से अटल बिहारी वाजपेयी से प्रारम्भ हुये अपने लम्बे राजनीतिक संबंधों को की चर्चा करते हुये कहा कि चाहे सरकार में हों या विपक्ष में एक अच्छे वक्ता के रूप में वह हमेशा अपनी छाप छोड़ते थे। हम उनमें एक पिता तुल्य संरक्षक देखते थे।

उन्होंने कहा कि अटल जी को विभिन्न प्रकार के व्यंजन खाने-खिलाने का बहुत शोक था और विभिन्न अवसरों पर वह आने वालों को लजीज व्यंजन खिलाते थे। उनकी कवितायें जहां राष्ट्र एवं सामाजिक चिंतन से जुड़ी हैं, वहीं विभिन्न मुद्दों पर उनके निजी विचारों को भी प्रस्तुत करती हैं। श्रीमती स्वराज ने कहा कि अटल जी के जीवन में संतों के समान मानवीयता थी तो वहीं एक प्रशासक के रूप में भी उन्होंने गरीबों के लिए अपने समर्पण के चलते करोड़ों लोगों का दिल जीता।