किसानों की आमदनी दोगुनी करने में लघु कृषक कृषि व्यापार संघ का महत्वपूर्ण योगदान : राधा मोहन सिंह


                                        2014-18 के दौरान 551 कृषक उत्पादक कंपनियों का गठन

 

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने 17 जनवरी को नई दिल्ली में लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे माननीय प्रधानमंत्री का स्वप्न है कि भारत के किसान खुशहाल हों और 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी हो सके। इसे साकार करने में लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) का कार्य सराहनीय है।

श्री राधामोहन सिंह ने कहा कि लघु, मध्यम एवं सीमांत कृषकों को प्रोत्साहित करने के लिए मोदी सरकार द्वारा कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओं) को बढ़ावा दिया जा रहा है। भारत में लगभग 5000 किसान उत्पादक संगठनों का गठन विभिन्न संस्थान जैसे कि लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी), नाबार्ड एवं विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा किया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि लघु कृषक कृषि व्यापार संघ द्वारा वर्ष 2014-18 के दौरान 551 कृषक उत्पादक कंपनियों का गठन किया गया है, जो वर्ष 2011-14 में गठित 223 कृषक उत्पादक कंपनियों की तुलना में 147.09 प्रतिशत अधिक है। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 7.52 लाख लघु, मध्यम एवं सीमांत कृषकों को संगठित कर एफपीओं से जोड़ा गया है।

उन्होंने बताया कि एसएफएसी द्वारा इन कृषक उत्पादक संगठनों को अधिक सक्षम एवं मजबूत बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम जैसेकि पेशेवर प्रशिक्षण, पेशेवर हैंड होल्डिंग, दिल्ली किसान मंडी, एफपीओ-क्रेता ई-इंटरफेस पोर्टल एवं मूलभूत ढांचों के सशक्तिकरण इत्यादि का संचालन किया जा रहा है।

इसके साथ ही एसएफएसी द्वारा कृषक उत्पादक संगठनों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से पूंजी अनुदान, ऋण गांरटी योजना एवं उद्यम पूंजी सहायता योजना का संचालन किया जा रहा है। वर्ष 2014 से अभी तक 349 एफपीओ को 20 करोड़ रुपये की पूंजी अनुदान प्रदान किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 38 एफपीओ ने ऋण गांरटी योजना का लाभ लिया है। उद्यम पूंजी सहायता के अंतर्गत 2014 तक 850 प्रकल्पों को रुपए 264.32 करोड़ दिए गए थे, जो कि पिछले 4 वर्षों में बढ़कर 1426 प्रकल्पों में रुपए 404.45 करोड़ हो गए। इससे प्रकल्पों में 67.76 प्रतिशत एवं उद्यम पूंजी सहायता राशि में 53.03 प्रतिशत की सराहनीय वृद्धि हुई है।

श्री सिंह ने राष्ट्रीय कृषि बाज़ार (ई-नाम) परियोजना के बारे मे जानकारी देते हुए बताया कि यह परियोजना कृषि बाज़ार को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने का एक प्रयास है। इसके प्रथम चरण में विभिन्न राज्यों की 585 कृषि मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाज़ार पोर्टल से जोड़ा जा चुका है। ई-नाम परियोजना को पूरे देश में विस्तार करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम बनाया गया है, जिसके अंतर्गत 2018-19 में 200 नई मंडिया एवं 2019-20 में 215 नई मंडियों को इस परियोजना से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। इस तरह 2020 के अंत तक 1000 मंडियां ई-नाम परियोजना में सम्मिलित हो जाएगी।

उन्होंने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि 31 दिसम्बर, 2018 तक ई-नाम पर कुल 58930 करोड़ रुपए की 2.25 करोड़ मीट्रिक टन कृषि जिन्सों/उत्पादों का व्यापार हो चुका है तथा 1.41 करोड़ किसान व अन्य विक्रेता इस प्लेमटफार्म से जुड़ चुके हैं, जिसमें 63.75 लाख किसानों ने ई-नाम पोर्टल पर अपनी फसलों का विक्रय कर लाभ प्राप्त किया है।

एसएफएसी अधिक से अधिक कृषक उत्पादक संगठनों को ई-नाम योजना द्वारा लाभ पहुंचाने के लिए प्रयासरत है। जिसके तहत लघु, मध्यम एवं सीमांत किसानों को ई-नाम द्वारा लाभ पहुंचाने जाने के लिए 16 राज्यों में 634 कृषक उत्पादक संगठनों का समावेश किया गया है। अभी तक इन कृषक उत्पादक संगठनों ने 549 मीट्रिक टन कृषि जिन्सों/उत्पादों का विक्रय किया है, जिसका मूल्य 1.89 करोड़ रुपए है। मंत्री महोदय ने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी लघु, मध्यम एवं सीमांत किसानों की आर्थिक संपन्नता में इजाफे के लिए प्रयासरत रहते हुए उनके कल्याण की दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करेगी।