ननकाना साहेब की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार की कहानी


नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के विरोध के नाम पर सड़कों पर जिस प्रकार की गुंडागर्दी, दंगे, आगजनी एवं अराजकता देखी गई, उसकी न केवल कड़ी निंदा होनी चाहिए बल्कि इसे लोकतंत्र पर एक बड़े खतरे के रूप में भी देखना चाहिए। पूरे देश में कई जगहों पर इस कारण जान-माल का भारी नुकसान हुआ तथा खुलेआम संसद एवं लोकतांत्रिक संस्थाओं को चुनौतियां दी गईं। यह अति दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस दौरान कांग्रेस एवं इसके सहयोगी लगातार अफवाह फैलाकर, तरह-तरह के झूठे किस्से कहानियां गढ़कर तथा दुष्प्रचार से हिंसक विरोध के लिये लोगों को उकसाते रहे हैं। इस प्रकार की राजनीति ही कांग्रेस का चरित्र रहा है जो सत्ता प्राप्ति के लिए समाज को बांटने की विभाजनकारी राजनीति करने से भी नहीं हिचकती, पर ऐसी राजनीति के दिन अब लद चुके हैं। लोगों के सामने अब कांग्रेस बेनकाब हो चुकी है और जनता इसकी बांटने वाली राजनीति को नकार चुकी है।

पूरे देश में मोदी सरकार को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 पर भारी जनसमर्थन मिल रहा है। पड़ोसी देशों से आये प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के इस कदम का देश के कोने-कोने में स्वागत हो रहा है। ये ऐसे लोग हैं जिनका पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में भयावह धार्मिक उत्पीड़न हुआ है और वे वहां से भागकर भारत में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। इनमें से कइयों को अपनी पहचान छुपाकर रहना पड़ रहा है, क्योंकि वे कानूनी रूप से नागरिकता प्राप्त करने में असमर्थ हैं। वे अत्यंत दयनीय अवस्था में जी रहे हैं और जीवन को नई शुरुआत करना चाहते हैं। नागरिता (संशोधन) अधिनियम उनके जीवन में आशा की एक नई किरण लेकर आया है। कांग्रेस एवं इसके सहयोगियों को मोदी सरकार के इस मानवीय कार्य का खुले दिल से स्वागत करना चाहिए था, परंतु यह अत्यंत दुःख का विषय है कि प्रताड़ित शरणार्थियों के हितों को नजरअंदाज कर कांग्रेस ने ‘वोट बैंक’ की राजनीति को चुनना स्वीकार किया। कांग्रेस एवं इसके सहयोगियों ने यह बहुत बड़ी भूल की है जिसके लिए आने वाले समय में उससे देश की जनता अवश्य जवाब मांगेगी।

ननकाना साहेब में घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों की दर्दनाक कहानी कहती है। यह और भी बड़ी विडंबना है कि कांग्रेस एवं इसके सहयोगियों का विरोध केवल बयानबाजी तक रहा और इस घटना के बावजूद वे नागरिकता (संशोधन) अधिनियम का विरोध करते रहे। जिस दिन ननकाना साहेब की दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी थी, उसी दिन इस कानून का विरोध करने वालों का सिर शर्म से झुक जाना चाहिए था और सारे विरोध को वापस लेकर कांग्रेस को पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए थी। परंतु बड़े दुःख की बात है कि इस प्रकार की कायरतापूर्ण उत्पीड़न से कांग्रेस एवं इसके सहयोगियों को कोई फर्क नहीं पड़ता और वे पाकिस्तान तक की निंदा करने से बचना चाहते हैं।

यह वास्तविकता है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक अमानवीय स्थिति, जान-माल की असुरक्षा एवं जबरन मतांतरण से जूझ रहे हैं तथा कई भयावह घटनाओं का ब्यौरा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी छप चुका है। इन देशों में अल्पसंख्यकों की घटती आबादी इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों का लगातार एवं सोंची-समझी सािजस के साथ उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्हें या तो जबरन मतांतरित होने पर मजबूर किया जा रहा है या देश छोड़कर भारत में शरणार्थी बनने को वे विवश हो रहे हैं। चूंकि देश का बंटवारा कांग्रेस ने मजहब के आधार पर स्वीकार किया था इसलिए पाकिस्तान में रह रहे अल्पसंख्यकों के जान-माल एवं स्वाभिमान की रक्षा का नैतिक दायित्व भी भारत का रहा है।

यही कारण है कि भारत-पाकिस्तान के बीच नेहरू-लियाकत समझौता अल्पसंख्यकों के हितों को सुनिश्चित करने के लिए की गई थी, परंतु इसमें अब कोई संदेह नहीं कि यह समझौता बुरी तरह असफल साबित हुआ। ऐसी परिस्थिति में पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान के हिंदू, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी एवं ईसाई के हितों की रक्षा का नैतिक दायित्व भारत पर है। इसी नैतिक दायित्व का निर्वहन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस कानून को लाकर किया है, जिसकी हर ओर प्रशंसा हो रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह एवं कार्यकारी अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में भाजपा ने पूरे देश में जनसंपर्क अभियान शुरू किया है जिसे भारी जनसमर्थन मिल रहा है। पूरा राष्ट्र इस कानून के पक्ष में आज मजबूती से खड़ा है और जन-जन द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का अभिनंदन किया जा रहा है।

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