जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई


तंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए केन्द्र सरकार ने 22 मार्च को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3(1) के तहत जेकेएलएफ (यासीन गुट) को गैर कानूनी संगठन करार दिया।

केन्द्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टोलरेंस की नीति का पालन किया है और आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। सुरक्षाबलों को आतंक से लड़ने के लिए खुली छूट दी गई है।

सरकार अलगाववादी संगठनों के गतिविधियों पर रोक लगाने की नीति का पालन कर रही है। ऐसी गतिविधियां देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा है। एनआईए और प्रर्वतन निदेशालय इन संगठनों के खिलाफ कड़े कदम उठा रही है।

उक्त उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 28 फरवरी 2019 को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3(1) के प्रावधानों के तहत जमात-ए-इस्लामी (जेएंडके) को गैर कानूनी संगठन करार दिया है।

उस समय यह स्पष्ट किया गया था कि जमात-ए-इस्लामी (जेएंडके), जमात ए इस्लामी हिंद से अलग है। 1953 में इसने अपना संविधान बनाया। जमात-ए-इस्लामी (जेएंडके) हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) के गठन के लिए जिम्मेदार है। हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) जम्मू कश्मीर में सक्रिय सबसे बड़ा आतंकी गुट है। जमात-ए-इस्लामी (जेएंडके) हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) को भर्ती, धन, स्थान, लॉजिस्टिक आदि सभी तरह की सहायता उपलब्ध कराता है।

मो. यासीन मलिक के नेतृत्व में जम्मू व कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट ने घाटी में अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम दिया है। 1988 से यह अलगाववादी गतिविधियों की अगुवाई करता रहा है और हिंसा फैलाता रहा है। 1989 में जेकेएलएफ द्वारा कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी। इस घटना का मास्टर माइंड मो. यासीन मलिक था। इसके बाद कश्मीरी पंडित घाटी से पलायन कर गये। कश्मीरी पंडितों के पलायन के लिए और उनकी हत्या के लिए मो. यासीन मलिक दोषी है।

जेकेएलएफ के खिलाफ कई गंभीर अपराध दर्ज हैं। यह संगठन भारतीय वायु सेना के चार सैन्य कर्मियों की हत्या तथा डॉक्टर रूबैया सईद (बीपी सिंह सरकार में तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी) के अपहरण का जिम्मेदार है। यह संगठन आतंकवाद को फैलाने के लिए अवैध धन के इस्तेमाल के लिए भी जिम्मेदार है। जेकेएलएफ ने धन इक्ट्ठा करने और इसे पत्थर फेंकने वालों को वितरित करने में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।

जेकेएलएफ (वाई) की गतिविधियां देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और सम्प्रभुता के लिए गंभीर खतरा हैं। यह संगठन वैधानिक रूप से बनी सरकार के खिलाफ शत्रुता की भावना व घृणा फैलाने तथा सशस्त्र विद्रोह पैदा करने के लिए सक्रिय है।

जेकेएलएफ के खिलाफ जम्मू कश्मीर पुलिस ने 37 एफआईआर दर्ज किये हैं। सीबीआई ने भी दो मामले दर्ज किये हैं। इनमें भारतीय वायु सेना के सैन्य कर्मियों की हत्या का मामला भी शामिल है। एनआईए ने भी एक मामला दर्ज किया है जिसकी जांच चल रही है। स्पष्ट है कि जेकेएलएफ अलगाववाद तथा आतंकवाद को समर्थन देने तथा उकसाने की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल है।

सरकार बड़ी संख्या में अलगाववादी नेताओं को सुरक्षा प्रदान करती है। समीक्षा के बाद सरकार ने ऐसे कई नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।

सरकार ने जम्मू कश्मीर में जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए 2005 के बाद पहली बार 2018 में शहरी स्थानीय निकायों तथा 2011 के बाद पंचायतों का शांतिपूर्ण चुनाव संचालित किया। इन चुनावों में लोगों ने सक्रिय भागीदारी की और औसत मतदान 74 प्रतिशत रहा। इन चुनावों में 3652 सरपंच और 23629 पंच चुने गये। पंचायतों को सशक्त बनाया गया है और उन्हें आम लोगों के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाया गया है। सरपंचों के लिए प्रत्यक्ष चुनाव आयोजित किये गये। पंचायतों की वित्तीय क्षमता को 10 गुना बढ़ाया गया। लगभग 20 विभागों को पंचायती राज के अंतर्गत लाया गया है। सरकार जम्मू, कश्मीर और लद्दाख– तीनों क्षेत्रों के सम्मिलित विकास के लिए प्रतिबद्ध है।