संबंधों के नये युग की शुरुआत


शिवप्रकाश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले वर्ष अमेरिका यात्रा के दौरान उनका स्वागत ह्युस्टन में ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के माध्यम से किया गया। अमेरिका में मिले इस मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए भारत में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अभिनंदन के लिए अहमदाबाद के मोटेरा स्टेडियम में ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम आयोजित हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति का भारत का यह दौरा ऐतिहासिक रहा है। ऐतिहासिक इसलिए क्योंकि यह अमेरिका और भारत के संबंधों में एक नये युग की शुरुआत जैसा है। इसने निश्चित रूप से न केवल अमेरिका और भारत के बीच की नजदीकियों को पहले से भी अधिक बढ़ाया है, अपितु अमेरिकी राष्ट्रपति के इस भारत दौरे ने वैश्विक स्तर पर एक नया संदेश भी दिया है।

प्रेसिडेंट ट्रंप का यह दौरा अमेरिका और भारत को सांस्कृतिक और भावनात्मक स्तर पर जोड़ने की शुरुआत है। आमतौर पर किन्हीं दो देशों के बीच संबंधों का आधार कूटनीति या द्विपक्षीय व्यापार का स्तर होता है। भारत की विदेश नीति भी स्वतंत्रता के बाद से मूलतः इन्हीं दो आधारभूत कारकों पर चली है। वर्ष 2014 में देश की सत्ता संभालने वाले नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद विदेश नीति को एक नया आयाम दिया है। कूटनीति और कारोबारी रिश्तों के साथ-साथ मोदी का पूरा जोर अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक और भावनात्मक संबंधों को विकसित करने पर भी रहा है। पिछले पांच वर्ष में दुनिया के तकरीबन सभी प्रमुख और प्रभावशाली नेताओं के साथ उन्होंने एक निजी और भावनात्मक संबंध स्थापित किया है जिसका परिणाम अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ साथ द्विपक्षीय संबंधों में भी स्पष्ट नजर आया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत आज जिस ऊंचाई पर खड़ा है वह कूटनीति के मामले में प्रधानमंत्री मोदी की बदली विदेश नीति का ही परिणाम है। यह कहना गलत नहीं होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप का यह दौरा भारत की मोदी सरकार की बदली विदेश नीति का सकारात्मक परिणाम है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी ‘पंचामृत (सम्मान, संवाद, समृद्धि, सुरक्षा, संस्कृति)’ की नई विदेश नीति से भारत के वैश्विक संबंधों को नई ऊंचाई पर ला दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को भी नई ऊंचाई पर ला दिया है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रक्षा के क्षेत्र में एक पारस्परिक सहमति बनी है जो कारोबारी स्तर को नई दिशा प्रदान करेगी। लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों का नई ऊंचाई पर पहुंचना। मोदी और ट्रंप के निजी संबंधों की गर्माहट ने भारत और अमेरिका की दोस्ती को 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक रिश्ते में बदल दिया है। दोनों नेताओं के रिश्ते समय के साथ साथ गहरे हो रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच संबंधों की इस प्रगाढ़ता की जो शुरुआत मोदी ने 2015 में बराक ओबामा के साथ मिलकर की थी, उसे मोदी ने ट्रंप के साथ मिलकर नये आयाम तक पहुंचा दिया है।

ट्रंप की भारत यात्रा मोदी सरकार की अभूतपूर्व कूटनीति का नतीजा है, अमेरिकी राष्ट्रपति ने राजनैतिक और कूटनीतिक स्तर पर भारत के लिए महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर मुखरता से बात की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंध मजबूत करने की दिशा में प्रधानमंत्री की इसी सोच ने दुनिया के विभिन्न देशों के साथ भारत के रिश्तों को प्रगाढ़ करने सहित भारतीय संस्कृति, सभ्यता के वैशिष्ट्य को अमेरिका समेत तमाम विश्व को समझाने का सफल प्रयास किया है। संबंधों की इसी प्रगाढ़ता का ही नतीजा है कि अमेरिका और भारत एक दूसरे की प्राथमिकता और आवश्यकता को समझ कर एक साथ खड़े है। दोनों देशों की इस अभूतपूर्व दोस्ती ने वैश्विक पटल पर एक नया संदेश उकेरा है।
शांति सहिष्णुता और अहिंसा के उपासक महात्मा गांधी जी के साबरमती नदी के किनारे स्थित आश्रम के चबूतरे पर प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बैठना ना सिर्फ़ गांधी के प्रति उनकी सच्ची श्रद्धांजलि की सशक्त अभिव्यक्ति है, बल्कि पूरे विश्व से भारत की समृद्ध सभ्यता का परिचायक भी है। गांधी जी के मूल्यों और सिद्धांतों पर चलकर भारत ने हमेशा अपने पड़ोसी देशों से शांतिपूर्ण संबंध निभाया है। लेकिन कुछ पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान हमेशा आतंकवाद को प्रायोजित करके भारत की इस सद्भावना को चोट पहुंचाता रहा है।

ट्रंप का यह दौरा आतंकमुक्त विश्व के प्रधानमंत्री मोदी के सपने की दिशा में एक मज़बूत कदम है। राष्ट्रपति ट्रंप के रेडिकल टैररिज्म के ख़िलाफ़ लड़ाई में मज़बूती के साथ खड़े होना का वादा यह और स्पष्ट कर देता है कि अमेरिका भारत के साथ सशक्त भाव से खड़ा है। ट्रंप ने कश्मीर और सीएए जैसे मुद्दों को भारत का आंतरिक मामला स्वीकार कर यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वे भारत की संप्रभुता का सम्मान करते हैं और उन्हें भारतीय नेतृत्व पर पूर्ण विश्वास है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि भारत सरीखी धार्मिक आजादी किसी अन्य देश में नहीं है। यह प्रधानमंत्री मोदी की ‘सबका साथ-सबका विश्वास’ की अवधारणा को मजबूती प्रदान करती है।

लेखक भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन) हैं