देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय है आपातकाल : अमित शाह

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने 26 जून को अहमदाबाद में आपातकाल के दौरान कांग्रेस सरकार द्वारा जेल में बंद किये गए लोकतंत्र के प्रहरी मीसा बंदियों और जन संघ कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित किया और लोकतंत्र का गला घोंटनेवाली मानसिकता के लिए कांग्रेस पर जम कर प्रहार किया।

श्री शाह ने कहा कि आपातकाल देश के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने इस दिवस को काले दिन के रूप में मनाने का निर्णय इसलिए लिया है ताकि देश की जनता एवं भावी पीढ़ी सजग व सतर्क रहें, आपातकाल के दंश को कभी न भूलें और फिर से लोकतंत्र का अपहरण कर देश में आपातकाल लगाने की कोई हिम्मत न कर पाए। उन्होंने कहा कि यह हमारा कर्तव्य है कि हम देश भर में कार्यक्रमों का आयोजन करके देश की भावी पीढ़ी को लोकतंत्र पर वज्राघात करने का पाप करने वाली कांग्रेस की मानसिकता के खिलाफ जागरूक करें और लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने के लिए सदैव तत्पर रहें।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले अपने ही पुरखों के काले कारनामों को भूल जाते हैं कि किस तरह कांग्रेस पार्टी ने अपने शासनकाल के दौरान अखबारों, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर कुठाराघात किया था और लोकप्रिय गायक श्री किशोर कुमार को भी प्रतिबंधित कर दिया था। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी, लोक अधिकारों और मीडिया एवं न्यायपालिका के अधिकारों की रक्षा के लिए यदि सबसे ज्यादा किसी को प्रताड़ित किया गया तो भारतीय जनता पार्टी (तब जन संघ) एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित किया गया था। उन्होंने कहा कि आपातकाल के खिलाफ सबसे ज्यादा संघर्ष किसी ने किया तो भारतीय जनता पार्टी (तब जन संघ) और संघ के कार्यकर्ताओं ने किया था। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों को बिना किसी क़ानून और एफआईआर के मीसा के तहत जेल में बंद कर दिया गया जिसमें लगभग 95 हजार कार्यकर्ता भाजपा और संघ के थे। उन्होंने कहा कि श्री जेपी नारायण, श्री अटल बिहारी वाजपेयी, श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री मोरारजी देसाई सरीखे नेताओं को बिना किसी चार्जशीट के जेल में डाल दिया गया, देश भर में नेताओं की गिरफ्तारी की गई और जनता की आवाज को दबाने का कुचक्र रचा गया। उन्होंने कहा कि आज 19 महीनों तक जेल की सलाखों के पीछे रह कर लोकतंत्र को बचाने वाले पुण्यात्माओं का स्मरण करने का दिन है।

श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद भारत के लोकतंत्र की जड़ों को हिलाने का सबसे पहला प्रयास आपातकाल के रूप में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने किया था। धारा 356 का दुरुपयोग कर अकारण चुनी हुई सरकारों को गिराने की शुरुआत भी इंदिरा गांधी ने ही किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सबसे ज्यादा बार धारा 356 का दुरुपयोग कर चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया और इसमें भी सभी अधिक बार इंदिरा गांधी ने किया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी के समय ऐसे चाटुकारों और चापलूसों की फ़ौज तैयार हो गई कि तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष तो यहाँ तक कहने लगे कि ‘इंडिया इज इंदिरा एंड इंदिरा इस इंडिया’। उन्होंने कहा कि सत्ता के मदांध लोगों ने बच्चे तक को गाड़ी से कुचल दिया और किसी ने उफ़ तक न की। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि यह आजाद भारत में पहली बार हुआ था कि देश की प्रधानमंत्री संसद में बैठ तो सकती थीं लेकिन वोट नहीं डाल सकती थी और इसी से बचने के लिए अदालत की अवमानना करते हुए श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश पर आपातकाल थोप कर लोकतंत्र का गला घोंटने की शुरुआत की।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि हमारा स्पष्ट मानना है कि परिस्थितियों और अध्यादेशों से आपातकाल नहीं लाई जाती, यह नेता की मानसिकता से आती है जैसा कि इंदिरा गांधी ने किया। उन्होंने कहा कि जो लोकतंत्र को नहीं मानते, जो आंतरिक लोकतंत्र में विश्वास नहीं रखते, वही आपातकाल के बारे में सोचते हैं। उन्होंने कहा कि हमने महज एक वोट से भी सरकार गंवाई है, 13 दिनों में भी सरकार गंवाई है लेकिन कभी आपातकाल के बारे में सोचा तक नहीं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने तीन बुराइयों परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की राजनीति को देश के लोकतंत्र में प्रविष्ट कराया ताकि अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने के लिए लोकतंत्र की जड़ों को खोखला किया जा सके। उन्होंने कहा कि उस समय इंदिरा गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में तीन वरिष्ठ जजों को बाईपास करते हुए एक जज को मुख्य न्यायाधीश घोषित कर दिया।

उन्होंने कहा कि इस देश में कमिटेड ज्यूडिशियरी के सिद्धांत की शुरुआत यदि किसी ने की तो इंदिरा गांधी जी ने की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विचारों में इतना विरोधाभास है कि यदि अदालत का कोई फैसला उनके पक्ष में आ जाता है तो कांग्रेस के हिसाब से ज्यूडिशियरी अच्छी है लेकिन यदि एक भी फैसला खिलाफ चला जाता है तो वह देश के सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने से भी नहीं हिचकिचाती और आज वही कांग्रेस न्यायतंत्र, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रेस की स्वतंत्रता की दुहाई दे रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी पर संवैधानिक संस्थाओं को खोखला करने का झूठा और निरर्थक आरोप लगाते हैं जबकि कांग्रेस ने तो संवैधानिक संस्थाओं पर बुलडोजर चलाने का कार्य किया था। उन्होंने कहा कि 26 जून का इतिहास यदि कांग्रेस के नेता अच्छे से पढ़ें तो वे अभिव्यक्ति की आजादी, मजबूत न्यायतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान की बात करने की हिम्मत भी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने अपने हिसाब से कई संविधान संशोधन कर संविधान को पंगु बनाने का काम किया लेकिन जनता ने आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस को करारी शिकस्त देकर अपनी शक्ति का वास्तविक अहसास करा दिया।

श्री शाह ने पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि हमने पार्टी में परिवारवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की नीति को पनपने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हमारे मनीषियों ने कार्यकर्ता आधारित एक ऐसी पार्टी का निर्माण किया जहां एक साधारण कार्यकर्ता भी पार्टी का अध्यक्ष बन सकता है और गरीब-से-गरीब घर में जन्म लेने वाला एक आम कार्यकर्ता भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने वंशवाद, जातिवाद और तुष्टीकरण की नीति को स्वीकार कर लिया, वह लोकतंत्र को कदापि मजबूती नहीं दे सकती। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जन संघ से लेकर आज तक पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र को बचाए रखने के लिए काफी मजबूती से कार्य किया है जहां हर तीन वर्ष पर पंचायत-स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक चुनाव होते हैं।

राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक पार्टी का परिचय उसकी विचारधाराओं, आंदोलनों और उसकी सरकार के कार्यक्रमों से होती है। उन्होंने कहा कि आजादी से लेकर आज तक जन संघ से भारतीय जनता पार्टी तक की यात्रा में हमारी सभी नीतियां देश के हित में बनी हैं और सभी आंदोलन देश की भलाई के लिए किये गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की योजनाओं के केंद्र में देश के गाँव, गरीब, किसान, दलित, पीड़ित, आदिवासी, युवा एवं महिलायें ही हैं और हमने विकास को समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रबंध किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद की भावना से ओत-प्रोत हमारे हर मनीषी नेताओं का जीवन निष्कलंक रहा है जिनके जीवन का क्षण-क्षण और शरीर का कण-कण राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत की युवा पीढ़ी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पुस्तक ‘संघर्षमय गुजरात’ से आपातकाल के समय उनके संघर्ष से प्रेरणा लेकर देश के नवनिर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम है कि 10 सदस्यों से जन संघ के रूप में शुरू हुए सफ़र में आज भारतीय जनता पार्टी के 11 करोड़ से अधिक सदस्य हैं, 330 सांसद हैं, 1500 से अधिक विधायक हैं, 18 राज्यों में सरकारें हैं और केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की लोक-कल्याणकारी एवं विकासोन्मुख सरकार है। उन्होंने कहा कि आज हमारा यह दायित्व बनता है कि हम पार्टी के आचार, विचार और संस्कार को और मजबूती देते हुए आने वाली पीढ़ी के हाथों में दें। उन्होंने कहा कि आपातकाल सिर्फ हमारे लोकतंत्र के इतहास में केवल काला अध्याय भर नहीं है, यह नई पीढ़ी के लिए लोकतंत्र को बचाने की सीख लेने वाला दिन भी है।