जम्मू–कश्मीर एवं लद्दाख में अनंत संभावनाओं के द्वार खुले


क राष्ट्र के जीवन में वे अवसर अद्भुत होते हैं जब ऐसे निर्णय लिए जाते हैं जिससे इतिहास की धारा मुड़ जाती है। कोई भी राष्ट्र दशकों तक और कभी–कभी तो सदियों तक राह देखता है कि कब वह अवसर आये, जब वह स्वयं अपने हाथों अपने गंतव्य का पथ प्रशस्त करे। ऐसे अवसर विरले ही होते हैं जब समस्त राष्ट्र एकजुट होकर खड़ा होता है और उन पुरातन विचारों की जंजीरों को तोड़ सकारात्मक संभावनाओं से भरे भविष्य की ओर अपने पग बढ़ाता है। इसके लिए ऐसी राजनैतिक इच्छाशक्ति से लबालब नेतृत्व की आवश्यकता पड़ती है जो आत्मविश्वास से ओत–प्रोत एवं दृढ़ निश्चयी हो, जिसमें जीर्ण–शीर्ण व्यवस्था को चुनौती देने का साहस हो तथा जो अपनी संकल्पशक्ति एवं नेतृत्व कौशल से नए अवसरों का सृजन करे। ऐसे अवसर इतिहास के पन्नों पर अपने अमिट निशान छोड़ते हैं तथा आने वाले संततियों को प्रेरित तो करते ही हैं, साथ ही राष्ट्र जीवन को भी नए आत्मविश्वास एवं संकल्प से अनुप्राणित करते हैं। ऐसे ही अवसरों में एक अवसर अभी–अभी देखने को मिला जब देश की संसद ने जम्मू–कश्मीर पर संकल्पों एवं विधेयकों पर विचार कर भारी बहुमत से पारित किया। यह एक ऐतिहासिक अवसर था।

जम्मू–कश्मीर का विषय लंबे समय से पूरे देश पर छाया रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि धारा 370 इस प्रदेश की सारी समस्याओं के मूल में रहा है। परंतु यह देश का दुर्भाग्य रहा कि कुछ निहित स्वार्थी तत्वों के निरंतर प्रोपगेंडा के कारण इस पर बहस भी करना मुश्किल हो गया था। यह विडंबना ही थी कि संविधान में इसे अस्थाई प्रावधान के रूप में शामिल किए जाने के बाद भी कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दल इसे स्थायी मान कर चलते रहे हैं। यह एक भयंकर भूल थी जिसके कारण घाटी के एक वर्ग में अलगाववादी मानसिकता पनपाई गई तथा युवाओं को पाक प्रायोजित आतंकी संगठनों द्वारा दिग्भ्रमित कर आतंकी–अलगाववादी गतिविधियों की ओर धकेला गया। इसमें कोई दो राय नहीं कि यह इस राज्य का शेष भारत के साथ पूर्ण एकीकरण की राह में सबसे बड़ा रोड़ा रहा है। इसकी कीमत देश को अपने वीर जवानों के बलिदान से दशकों तक चुकाना पड़ा है। साथ ही धारा 370 से राज्य की जनता को भी कोई लाभ नहीं मिल पाया और वह विकास की दौड़ में लगातार पिछड़ती गयी। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री श्री अमित शाह की दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज धारा 370 निरस्त होने से देश में एक काले अध्याय का अंत हुआ। पूरा देश इस निर्णय के साथ एकजुट खड़ा है तथा देश के कोने–कोने में लोग उत्सव मना रहे हैं।

कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दलों ने धारा 370 के समाप्ति का विरोध कर अक्षम्य अपराध किया हैं। कांग्रेस का यह कदम राष्ट्र की जनभावना के विरुद्ध तो था ही साथ ही जम्मू–कश्मीर के विषय के स्थायी समाधान पाने के राह में रोड़े अटकाने का प्रयास भी था। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस एवं इसके सहयोगी दलों ने वोट–बैंक की राजनीति को राष्ट्रहित से ऊपर रखा है। देश की जनता कांग्रेस को कई बार सबक सिखा चुकी है, परंतु इस बार वोट–बैंक की राजनीति में यह इतना नीचे गिर चुकी है कि अब इसका संभलना अत्यंत कठिन लगता है। देश की जनता इतने बड़े विश्वासघात के लिए कांग्रेस को शायद ही कभी क्षमा करेगी।

जम्मू–कश्मीर एवं लद्दाख तथा संपूर्ण राष्ट्र के लिए एक बड़ा निर्णय लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इतिहास रच दिया। मोदी सरकार द्वारा धारा 370 के निरस्तीकरण एवं जम्मू–कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित प्रदेश के निर्माण के निर्णय को संसद के दोनों सदनों में जिस प्रखरता एवं तार्किक आधार पर गृहमंत्री श्री अमित शाह ने पारित करवाया, उसे निश्चय रूप से लंबे समय तक देश याद रखेगा। इस निर्णय से इस प्रदेश की जनता के लिए अनगिनत सम्भावनाओं के द्वार खुल गए हैं। अब जम्मू–कश्मीर लद्दाख की जनता को शेष भारत के साथ विकास एवं प्रगति की राह पर कदम से कदम मिलाकर चलने से कोई रोक नहीं सकता। इस निर्णय से न केवल जम्मू–कश्मीर की जनता को भारी लाभ पहुंचने वाला है, बल्कि लद्दाख की जनता भी अपने सपनों को साकार करने में सक्षम हो गई है। इससे दोनों क्षेत्रों के लिए लाभ ही लाभ है तथा शेष भारत के साथ पूर्ण एकीकरण का वर्ग प्रशस्त हुआ है। आज इस क्षेत्र में विकास, प्रगति एवं शांति के नए युग का शुभारंभ हो रहा है। यह निर्णय डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, जनसंघ–भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ताओं के संघर्ष, लाखों–करोड़ों देशवासियों के अरमानों एवं असंख्य वीर सैनिकों के बलिदानों को सच्ची श्रद्धांजलि है।

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