सीएए उदात्त परम्परा की अगली कड़ी


– डॉ. नन्द किशोर गर्ग

भारत सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन क़ानून बनाने के बाद राजधानी दिल्ली सहित देश भर में अनेक स्थानों पर विरोध-प्रदर्शन आरम्भ हो गया। विभिन्न समूहों द्वारा यह भ्रम फैलाया जाने लगा कि यह अधिनियम देश के मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है तथा संविधान विरोधी है। निरंतर यह भी भ्रामक प्रचार किया जा रहा कि इस अधिनियम के साथ-साथ राष्ट्रीय नागरिकता कानून भी लाया जा रहा जो मुस्लिम विरोधी है। इस भ्रामक प्रचार के कारण देश भर में हिंसक प्रदर्शन आरम्भ हो गए जिससे भारी सार्वजनिक क्षति हुई।

वास्तविक स्थिति यह है  कि नागरिकता संशोधन कानून से किसी भी भारतीय नागरिक को कोई लेना देना नहीं है, चाहे वह किसी भी मत पंथ को मानते हो। यह क़ानून भारत की उस उदात्त परंपरा के अनुसार जो शताब्दियों से पीड़ितों और असहायों को अपने यहां आश्रय देती रही है, की अगली कड़ी है। अलग- अलग समय पर अपने-अपने देशों में सताए जा रहे या अपने देश से विस्थापित लोगों को भारत में शरण मिलती रही है। स्वतंत्रता के बाद 1955 में नागरिकता अधिनियम लाया गया जिसके अंतर्गत भारत के नागरिक होने की कुछ शर्तें तय की गयीं। उसके बाद अलग-अलग समय पर अलग-अलग शरणार्थी समूहों को नागरिकता प्रदान की गई। वर्तमान नागरिकता संशोधन कानून पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के ऐसे अल्पसंख्यकों को नागरिकता प्रदान करता है जिनको अपने देशों में अपने पांथिक आस्था के कारण भारी अत्याचार सहना पड़ रहा था।

उनका दमन उनके देशों की दमनकारी नीतियों तथा वहां की बहुसंख्यक आबादी द्वारा निर्ममतापूर्वक निरंतर किया जाता रहा आत्मरक्षार्थ उन लोगों ने भारत में शरण लिया हुआ था। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के दमन का इतिहास उसके अस्तित्व में आने जितना ही प्राचीन है। पाकिस्तान के प्रमुख संस्थापकों में से एक जोगेंद्र नाथ मंडल जो वहां के प्रथम कानून और श्रम मंत्री भी थे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों के कारण केवल चार वर्षों में ही वहां से भारत वापस आ गए थे। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों पर विस्तार से लिखा था। यह जोगेंद्र नाथ मंडल ही थे जिनके कारण असम का अभिन्न अंग सिलहट पाकिस्तान का भाग बना जो आज बंगलादेश का भाग है। उन्हीं के प्रभाव के कारण सिलहट के हिन्दुओं ने मुस्लिम लीग का समर्थन किया और पाकिस्तान के पक्ष में अपना मत दिया। जोगेंद्र नाथ मंडल को पाकिस्तान के समर्थन का पछतावा जीवन भर रहा और गुमनामी में ही उनका शेष जीवन बीता।

नागरिकता संशोधन कानून का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले 6 समुदायों (हिन्दू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और इसाई) के शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है, जो कि दिसंबर 31, 2014 को या इससे पहले उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आये थे। इनमें से अधिकांश शरणार्थी वीजा लेकर भारत आये थे परन्तु वापस नहीं गये। ये लोग घुसपैठिये नहीं थे बल्कि प्रताड़ना के शिकार होकर भारत आये थे, जिनमे से अधिकांश गुजरात, राजस्थान और िदल्ली में रह रहे हैं। वर्तमान राजग सरकार के कार्यकाल में भी हजारों मुस्लिमों को भारत की नागरिकता दी गयी है जिसमें प्रख्यात गायक अदनान सामी जैसे लोग भी शामिल हैं। प्रख्यात लेखिका तसलीमा नसरीन ने भी कई वर्षों से इस्लामिक कट्टरपंथ का शिकार होकर भारत में शरण लिया हुआ है। बांग्लादेश की वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी कई वर्षों तक भारत में शरण ले रखी थी। समावेशी संस्कार और सहिष्णुता भारतीय जीवन दर्शन के मूल में हैं। वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा भारत की ही देन है। भारतीय ऋषियों ने ही “माता भूमि पुत्रोऽहम् पृथिव्याः” का प्रतिपादन किया था। इसलिए इस विरोध का औचित्य क्या है?

भारत सरकार के इस स्वागत योग्य कदम के बावजूद भ्रामक प्रचार के कारण देश के नागरिकों के कुछ हिस्सों में निर्मूल आशंकाओं का बीजारोपण विभिन्न समूहों द्वारा निरंतर किया जा रहा है। सरकार को इस पर त्वरित कारवाई करते हुए अपने तंत्र के द्वारा उन सभी लोगों के समूहों जिनके मन में इसको लेकर कोई आशंका है, से संवाद स्थापित करना चाहिए और उनको इस कानून की वास्तविक स्थति से परिचित कराना चाहिए।

पूर्वोत्तर के राज्यों में भी इस कानून का विरोध हो रहा है। उनकी आशंका है िक बांग्लादेश से आये हुए शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या जो पूर्वोत्तर के राज्यों में है, उनको वहीं की नागरिकता दे दी जायेगी और इस प्रकार पूर्वोत्तर के राज्यों की मूल संस्कृति इससे प्रभावित होगी। सरकार को पूर्वोत्तर के राज्यों से भी बेहतर संवाद स्थापित करना चाहिए, उनकी आशंकाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। सरकार को इन तीनों देशों से आये हुए शरणार्थियों को सघन आबादी वाले क्षेत्रों के बजाय उनको देश के विरल आबादी वाले क्षेत्रों में बसने की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे देश के नागरिकों में किसी भी प्रकार के असंतोष की भावना नहीं पनपे।

(लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक हैं)