‘ये बहुत ही भावुक पल हैं’

प्रधानमंत्री द्वारा डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 अप्रैल को 26 अलीपुर रोड स्थित डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक देश को समर्पित किया। संविधान निर्माता अम्बेडकर को समर्पित इस स्मारक की आधारशिला प्रधानमंत्री ने 21 मार्च 2016 को रखी थी। यह स्मारक भारत के संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर के जीवन और उनके योगदान को समर्पित है। गौरतलब है कि भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जन्म मध्य प्रदेश में मऊ में 14 अप्रैल, 1891 को हुआ था और वह स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री थे। 1 नवम्बर, 1951 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद, डॉ. अम्बेडकर 26, अलीपुर रोड, दिल्ली में सिरोही के महाराजा के घर में रहने लगे, जहां उन्होंने 6 दिसम्बर, 1956 को आखिरी सांस ली और महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। डॉ. अम्बेडकर की स्मृति में पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2 दिसम्बर, 2003 को महापरिनिर्वाण स्थल राष्ट्र को समर्पित किया था। बाबा साहब के अनुयायी उस स्थान को पवित्र मानते हैं, जहां उन्होंने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया। चूंकि इस इमारत को संविधान निर्माता बाबा साहब के स्मारक के रूप में निर्मित किया गया है, इसलिए इमारत को पुस्तक का आकार दिया गया है।

इस इमारत में एक प्रदर्शनी स्थल, स्मारक, बुद्ध की प्रतिमा के साथ ध्यान केन्द्र , डॉ. अम्बेडकर की 12 फुट की कांस्य प्रतिमा है। प्रवेश द्वार पर अशोक स्तम्भ (11 मीटर) और पीछे की तरफ ध्यान केन्द्र बनाया गया है। इसमें सीवेज शोधन संयंत्र, वर्षा जल सिंचाई प्रणाली और नेट मीटरिंग के साथ छत पर सौर ऊर्जा (50 किलोवाट) संयंत्र स्थापित किया गया है। इमारत 7374 वर्ग मीटर क्षेत्र में खड़ी की गई है और इसका कुल निर्मित क्षेत्र 6758 वर्ग मीटर है।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से िकतनी सरकारें आईं, कितना वक्त गुजर गया, लेकिन जो कार्य बहुत पहले हो जाना चाहिए था, वो काम दशकों के बाद आज हो रहा है और इसलिए ये जगह, इस जगह पर आना इस कार्यक्रम में शामिल होना, उस जमीन पर खड़े होना जहां बाबा साहेब ने आखिरी समय गुजारा था; ये बहुत ही भावुक पल है। बाबा साहेब के नाम पर उनकी याद में निर्मित ये राष्ट्रीय स्मारक, देश की तरफ से उन्हें एक भावभीनी श्रद्धांजलि है। कल बाबा साहेब की जन्म जयंती है और उसके एक दिन पूर्व यहां इस समारोह का आयोजन बाबा साहेब के प्रति हम सबकी अटूट श्रद्धा को प्रकट करता है, सरकार की प्रतिबद्धता को प्रकट करता है।

श्री मोदी ने कहा कि अब आज से ये 26 अलीपुर रोड पर बना ये स्मारक दिल्ली ही नहीं, देश के मानचित्र पर हमेशा-हमेशा के लिए अंकित हो गया है। यहां आकर लोग बाबा साहेब के जीवन से जुड़ी बातों को, उनकी दृष्टि को और बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। ये स्मारक एक असाधारण व्यक्ति के असाधारण जीवन का प्रतीक है। ये स्मारक मां भारती के होनहार सपूत के आखिरी दिनों की यादगार है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस स्मारक को एक किताब की शक्ल में तैयार किया गया है। ये किताब हमारे देश का वो संविधान जिसके शिल्पकार डाक्टर बाबा साहेब अम्बेडकर थे। जिस संविधान को रचकर, बाबा साहेब ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को, लोकतांत्रिक बने रहने का रास्ता सुनिश्चित किया था। आज की नई पीढ़ी, जब इस मैमोरियल में यहां आएगी, तो यहां लगी प्रदर्शनी देखकर, यहां म्यूजियम में आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके जीवन के अहम पड़ावों को देखकर, बाबा साहेब के जीवन के अथाह विस्तार को वो भलीभांति समझ पाएगी।

श्री मोदी ने कहा कि ये हमारी सरकार के लिए सौभाग्य की बात है कि उसे बाबा साहेब आंबेडकर से जुड़े पांच महत्वपूर्ण स्थान, जिसे मैं हमेशा पंचतीर्थ के तौर पर पुण्य भाव से स्मरण करता हूं, उन्हें विकसित करने का हमें अवसर मिला। मध्य प्रदेश के महू में बाबा साहेब की जन्मभूमि, लंदन में डॉक्टर अंबेडकर मेमोरियल- उनकी शिक्षाभूमि, नागपुर में दीक्षाभूमि, मुंबई में चैत्य भूमि और यहां दिल्ली में इस नेशनल मेमोरियल के तौर पर उनकी महापरिनिर्वाण भूमि। ये स्थान, ये तीर्थ, सिर्फ ईंट-गारे की इमारत भर नहीं हैं, बल्कि जीवंत संस्थाएं हैं, आचार-विचार के सबसे बड़े संस्थान हैं।