स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 1333 परियोजनाएं पूर्ण या क्रियान्वित की जा रही है

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 50,626 करोड़ रुपयों की 1333 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं या क्रियान्वित की जा रही है/निविदा चरण में हैं। दरअसल, अब तक चुने गए 99 स्मार्ट सिटी में से 91 स्मार्ट सिटी में एसपीवी (स्पेशल पर्पस विहिकल्स) शामिल हो चुके हैं। 9 स्मार्ट सिटी अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा, विशाखापट्टनम, भोपाल, पुणे, काकिनडा, सूरत और नागपुर में एकीकृत सिटी कमान और नियंत्रण कक्ष (आईसीसीसी) स्थापित किए जा चुके हैं। 14 और स्मार्ट सिटी में कार्य प्रगति पर है और 32 स्मार्ट सिटी निविदा चरण में हैं।

चार स्मार्ट सिटी में 228 करोड़ रुपये की लागत से स्मार्ट सड़क परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 40 स्मार्ट सिटी में 5,123 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। 6 स्मार्ट सिटी में स्मार्ट सौर परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 49 स्मार्ट सिटी में परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। 6 स्मार्ट सिटी में स्मार्ट जल परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 43 स्मार्ट सिटी में परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। 13 स्मार्ट सिटी में 734 करोड़ रुपये की निजी-सरकारी साझेदारी परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं जबकि 52 स्मार्ट सिटी में 7,753 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं। इसके अलावा, 13 स्मार्ट सिटी में 107 करोड़ रुपये की लागत से विरासत संरक्षण, जल घाट विकास, सार्वजनिक स्थल विकास जैसी अन्य अहम परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 5,865 करोड़ रुपये की परियोजनाएं क्रियान्वयन/निविदा के चरण में हैं।

जनवरी, 2018 में 9 स्मार्ट सिटी के साथ ही स्मार्ट सिटी का चुनाव विभिन्न चरणों में पूरा हो चुका है। दरअसल, किसी शहर के स्मार्ट सिटी के रूप में चयन के बाद वहां स्पेशल पर्पस विहिकल शुरू करने, परियोजना प्रबंधन सलाहकार की नियुक्ति, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और निविदा के बाद काम सौंपने में 12 से 18 महीने लग जाते हैं।

स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)

केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को कुल 6,592 करोड़ रुपये जारी किए हैं। कुल 48.67 लाख एकल परिवार शौचालयों एवं 3.3 लाख समुदाय/ सार्वजनिक शौचालय (सीटी/पीटी) सीटों का पहले ही निर्माण किया जा चुका है और 8.3 लाख एकल शौचालय निर्माणाधीन हैं। अब तक 2679 नगरों ने खुद को खुले में शौच से मुक्त घोषित किया है एवं तीसरे पक्ष प्रमाणीकरण के बाद 2,133 नगरों/ यूएलबी को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। 62,436 शहरी वार्डों को ठोस अपशिष्ट को 100 प्रतिशत घर घर जाकर संग्रह करने की योजना के तहत कवर किया गया है, जबकि अपशिष्ट से कंपोस्ट की कुल प्राप्ति 145 कार्यशील संयंत्रों से 13.11 लाख टीपीए है तथा 65 लाख टीपीए पर कार्य प्रगति पर है। अपशिष्ट से लगभग 88 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन किया जा रहा है और अपशिष्ट से मेगावाट के ऊर्जा सृजन के 412 संयंत्रों पर कार्य प्रगति पर है।

डीएवाई-एनयूएलएम

केंद्र सरकार द्वारा इस मिशन के तहत अब तक 1907.5 करोड़ रुपये जारी किये हैं। इस मिशन का विस्तार सभी वैधानिक कस्बों (टाउन) में कर दिया गया है। इस मिशन की शुरुआत से लेकर अब तक 6,36,956 लाभार्थियों के लिए रोजगार सृजित हुए हैं। लगभग 11 लाख शहरी गरीबों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया है, ताकि उनकी रोजगार क्षमता बेहतर हो सके। कुल मिलाकर 2,81,197 स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) का गठन किया गया है और 1,94,879 एसएचजी को रिवॉल्विंग फंड के जरिये सहायता दी गई, जबकि 3,82,746 एसएचजी को ऋणों का वितरण एसएचजी बैंक लिंकेज कार्यक्रम के तहत किया गया है। 2178 कस्बों में स्ट्रीट वेंडर सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है और 16,76,403 स्ट्रीट वेंडरों को चिन्हित किया गया है तथा 7,92,286 आईडी कार्ड जारी किये गये हैं। शहरी बेघरों के लिए 1,565 आश्रय स्थलों को मंजूरी दी गई है और 961 आश्रय स्थल परिचालन में आ चुके हैं।