भाजपा कर्नाटक में जीत की नई इबारत लिखेगी और तमिलनाडु में अधिक सीटें हासिल करेगी: मुरलीधर राव


                              विशेष साक्षात्कार – लोकसभा चुनाव 2019

भाजपा राष्ट्रीय महासचिव श्री मुरलीधर राव लोकसभा चुनाव 2019 के लिए पार्टी के कर्नाटक और तमिलनाडु प्रदेश प्रभारी हैं। उन्होंने पिछले कई महीने इन राज्यों में पार्टी के उम्मीदवारों के लिए व्यापक प्रचार किया और भाजपानीत राजग को जीत दिलाने के लिए अथक प्रयास किया। कर्नाटक और तमिलनाडु में मतदान संपन्न हो गया है। कमल संदेश के सहायक संपादक संजीव कुमार सिन्हा ने श्री राव के साथ इन राज्यों में भाजपा के चुनावी अभियान, रणनीति और भाजपानीत राजग के प्रदर्शन के बारे में विस्तृत रूप से चर्चा की। श्री मुरलीधर राव ने बताया कि इस बार भाजपा कैसे जीत की नई इबारत लिखेगी और तमिलनाडु में अधिक सीटें प्राप्त करेंगी। प्रस्तुत है मुख्य अंशः

कर्नाटक और तमिलनाडु में लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं जहां के आप प्रदेश प्रभारी हैं। इन राज्यों में पार्टी का प्रचार अभियान किस तरह चला और प्रमुख मुद्दे क्या थे ?

कर्नाटक में भाजपा को हमेशा एक मजबूत शक्ति के रूप में देखा जाता है लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में हम सत्ता में नहीं आए क्योंकि हम कुछ सीटों से पीछे रह गए। हालांकि, भाजपा 104 सीटों के साथ नंबर एक राजनीतिक दल के रूप में उभरी।

पिछले विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और जद(एस) दोनों को अपनी शक्ति का एहसास हुआ और अपने अस्तित्व के लिए उन्हें गठबंधन सरकार बनाने के लिए एक साथ आना पड़ा। कांग्रेस इतनी डरी हुई थी कि उसने खुद को गठबंधन सरकार में एक अधीनस्थ दल के रूप में प्रस्तुत किया तथा केवल 38 सीटों के साथ जद (एस) ने मुख्यमंत्री पद ग्रहण किया और सरकार में मुख्य भूमिका निभाई। इस गठजोड़ ने वास्तव में गठबंधन की मजबूरियों और कमजोरियों का प्रदर्शन किया है और दिखाया है कि कैसे ब्लैकमेल और आंतरिक झगड़ा आए दिन का क्रम बन गया है। कर्नाटक के लोग इस स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इससे भाजपा को एक तरह का फायदा हुआ है, इसीलिए भाजपा सरकार या मोदी सरकार की जरूरत है।

इस एक आख्यान (नैरेटिव) के साथ-साथ राष्ट्रीय आख्यान – राष्ट्रीय सुरक्षा, विकास, सुशासन, पारदर्शी शासन और भ्रष्टाचारमुक्त शासन, गरीबों के कल्याण आदि मुद्दे ने भाजपा की बहुत मदद की है।
कर्नाटक में भाजपा का चुनाव अभियान हमारे विचारों के अनुरूप आगे बढ़ा। यह मोदीजी बनाम अन्य का रहा। इसलिए यह अभियान मोदीजी और उनकी उपलब्धियों के आसपास केंद्रित था।
इसलिए, इस बार मुझे उम्मीद है कि विभिन्न क्षेत्रों के फीडबैक के अनुसार हम कर्नाटक में भाजपा की जीत में कुछ और सीटें जोड़ेंगे और राज्य में एक नई इबारत लिखेंगे। निश्चित रूप से पार्टी ने 2014 में जो प्रदर्शन किया था, उससे हम आगे जाएंगे।

तमिलनाडु में भाजपा को किस तरह का समर्थन मिल रहा है ?

तमिलनाडु 39+1 (पांडिचेरी), 40 सीटों वाला एक बहुत बड़ा राज्य है। 2014 के चुनावों में मोदीजी के पक्ष की लहर ने हमारी बहुत मदद की, उस समय अनेक छोटे दलों के साथ हमारा गठबंधन था। हमें 19.5 प्रतिशत का महत्वपूर्ण वोट शेयर मिला, लेकिन इसके मुताबिक यह सीट में परिणत नहीं हो सका था। इसलिए हम केवल दो सीटें पाने में कामयाब हुए थे।

अब, इस चुनाव में डीएमके और कांग्रेस के गठजोड़ के खिलाफ हम एआइडीएमके, पीएमके, डीएमडीके और अन्य कुछ दलों के साथ एक अच्छा जीवंत गठबंधन बनाने में कामयाब रहे। तमिलनाडु में इस गठबंधन के कारण लड़ाई बहुत तीव्र हो गई और मेरे विचार से मोदीजी के नेतृत्व एवं उनके अभियान के चलते हम एक नई रचना बनाने में सक्षम हुए, जिसे हम गठबंधन सहयोगियों और लोगों के बीच बनाना चाहते थे। इसलिए, निश्चित रूप से हम वहां एक सफल राजग की पटकथा लिखने के लिए सोच रहे हैं। मोदीजी के नेतृत्व में एनडीए को इस बार तमिलनाडु में अच्छी संख्या प्राप्त होगी।

विपक्षी दलों के महागठबंधन से भाजपा और राजग को किस तरह की चुनौती मिल रही है ?

पूरे देश में महागठबंधन नहीं है। पूरे देश में विपक्षी एकता नहीं है। वे भाजपा बनाम अन्य के बीच की लड़ाई देखना चाहते थे। जैसा आप जानते हैं अन्य का प्रतिनिधित्व एक प्रत्याशी करता है जो भाजपा के खिलाफ है। विपक्ष की रणनीति यह है कि भाजपा विरोधी मत को विभाजित होने से रोका जाए।

हालांकि, कई महत्वपूर्ण राज्यों में वे ऐसा नहीं कर पाए। अगर आप उत्तर प्रदेश का उदाहरण लें तो कोई एकजुट लड़ाई नहीं है, बंगाल में कोई एकजुट लड़ाई नहीं है, ओडिशा में कोई एकजुट लड़ाई नहीं है, केरल में एकजुट लड़ाई नहीं है और आंध्र प्रदेश में ऐसा कुछ नहीं है।

इसलिए, महागठबंधन अब केवल एक नारा है और यह एक प्रकार का स्वप्नलोक है और जमीन पर ऐसा कोई महागठबंधन नहीं है और यह महागठबंधन संभव नहीं हो पाया है क्योंकि वे एक नेता पर सहमत नहीं हैं, वे इस बात पर सहमत नहीं हैं कि कौन शासन करेगा और एजेंडा क्या होगा, कार्यक्रम क्या होगा ?

किसी ने राहुल गांधी का नाम प्रस्तावित किया है और अन्य दल इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं। अन्य दलों ने कुछ अन्य नामों का प्रस्ताव किया है और कांग्रेस ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है। यहां तक कि ऐसी पांच पार्टियां जो महज पांच सीटें जीतने को सोच रही हैं, वे भी प्रधानमंत्री बनने का महास्वप्न देख रही हैं। यही कारण था कि महागठबंधन स्थापित नहीं हो सका।

लोग इसे जानते भी थे। उन्हें एक स्थिर सरकार, निर्णायक सरकार और ऐसी सरकार की जरूरत है जो फैसले ले सके, ऐसा केवल मोदीजी कर सकते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भाजपानीत राजग का प्रदर्शन कैसा रहेगा ?

केंद्र में मोदी सरकार के बारे में आम जनता ने जो आख्यान तैयार किया है, वह यह है कि मोदीजी के हाथों में राष्ट्र सुरक्षित है, मोदीजी के नेतृत्व में इस देश को स्थिर सरकार मिली है, मोदीजी का नेतृत्व निर्णायक है तथा मजबूत एवं असमझौतावादी नेतृत्व के चलते वैश्विक एजेंसियों, बहुपक्षीय एजेंसियों एवं सभी महत्त्वपूर्ण देशों से बातचीत करने में सक्षम है एवं हमारे देश के हितों को केवल मोदी सरकार द्वारा संरक्षित किया जा सकता है। इसलिए, लोग इन मुद्दों पर भी चर्चा कर रहे हैं और इस आधार पर भाजपानीत राजग का समर्थन कर रहे हैं।

वे राष्ट्रीय सुरक्षा, राष्ट्रीय विकास, गरीबों के कल्याण, सुशासन और भ्रष्टाचारमुक्त शासन जैसे मुद्दों के महत्व को महसूस कर रहे हैं, इसलिए मुझे लगता है कि इन सकारात्मक पहलों के लिए भाजपानीत राजग को 2014 में जो प्राप्त हुआ था उसे अधिक सीटें मिलेंगी।