‘विवादित स्थल में ही भगवान राम का जन्म और वे ही भूमि के स्वामी’


अयोध्या के रामजन्मभूमि मामले में सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक निर्णय

र्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर को सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया और केन्द्र को निर्देश दिया कि नयी मस्जिद के निर्माण के लिये सुन्नी वक्फ बोर्ड को प्रमुख स्थान पर वैकल्पिक पांच एकड़ का भूखंड आबंटित किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने इस व्यवस्था के साथ ही 134 साल से भी अधिक पुराने इस विवाद का पटाक्षेप कर दिया। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति सर्वश्री एस.ए. बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई. चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर शामिल थे।

संविधान पीठ ने अपने 1045 पन्नों के फैसले में कहा कि नयी मस्जिद का निर्माण ‘प्रमुख स्थल’ पर किया जाना चाहिए। साथ ही उस स्थान पर मंदिर निर्माण के लिये तीन महीने के भीतर एक ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि 2.77 एकड़ की विवादित भूमि का अधिकार राम लला विराजमान को सौंप दिया जाये, जो इस मामले में एक वादकारी हैं। हालांकि यह भूमि केन्द्र सरकार के रिसीवर के कब्जे में ही रहेगी।
न्यायालय ने कहा कि हिन्दू यह साबित करने में सफल रहे हैं कि विवादित ढांचे के बाहरी बरामदे पर उनका कब्जा था और उप्र सुन्नी वक्फ बोर्ड अध्योध्या विवाद में अपना मामला साबित करने में विफल रहा है।

संविधान पीठ ने यह माना कि विवादित स्थल के बाहरी बरामदे में हिन्दुओं द्वारा व्यापक रूप से पूजा अर्चना की जाती रही है। संविधान पीठ ने कहा कि अयोध्या में विवादित स्थल के नीचे मिली संरचना इस्लामिक नहीं थी।

न्यायालय ने कहा कि पुरातत्व सर्वेक्षण के साक्ष्यों को महज राय बताना इस संस्था के साथ अन्याय होगा। न्यायालय ने कहा कि हिन्दू विवादित स्थल को ही भगवान राम का जन्म स्थान मानते हैं और मुस्लिम भी इस स्थान के बारे में यही कहते हैं।

पीठ ने कहा कि विवादित ढांचे में ही भगवान राम का जन्म होने के बारे में हिन्दुओं की आस्था अविवादित है। यही नहीं, सीता रसोई, राम चबूतरा और भण्डार गृह की उपस्थिति इस स्थान के धार्मिक तथ्य की गवाह हैं।

हालांकि, न्यायालय ने कहा कि सिर्फ आस्था और विश्वास के आधार पर मालिकाना हक स्थापित नहीं किया जा सकता और ये विवाद का निबटारा करने में सूचक हो सकते हैं।

संविधान पीठ ने 2.77 एकड़ विवादित भूमि तीन पक्षकारों- सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान- के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर 16 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की थी।

रामलला विराजमान की ओर से बहस करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन ने इस निर्णय पर प्रतिक्रया व्यक्त करते हुये कहा, ‘यह बहुत ही संतुलित है और यह जनता की जीत है।” इस वाद के एक अन्य पक्षकार निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि उसे उसका दावा खारिज होने का कोई अफसोस नहीं है।

फैसले को जीत या हार के रू प में नहीं देखा जाना चाहिए: नरेन्द्र मोदी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 9 नवंबर को अयोध्या मामले में फैसले पर शांति एवं सद्भाव बनाये रखने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या मुद्दे पर अपना फैसला दे दिया है। इस फैसले को किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चाहे राम भक्ति हो या रहीम भक्ति, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने राष्ट्र भक्ति की भावना को मजबूत किया है। शांति एवं सद्भाव कायम रहे।

श्री मोदी ने कहा कि अयोध्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला उल्लेखनीय है, क्योंकि यह इस बात को उजागर करता है कि किसी भी विवाद को कानून की उचित प्रक्रिया के जरिये हल किया जा सकता है। यह हमारी न्यायपालिका की स्वतंत्रता, पारदर्शिता और दूरदर्शिता की पुष्टि करता है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कानून के समक्ष हर कोई समान है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसले ने दशकों से चल रहे विवाद को एक अंजाम तक पहुंचाया है। सुनवाई के दौरान हरेक पक्ष को विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया। यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में लोगों के विश्वास को और बढ़ाएगा।

श्री मोदी ने कहा कि आज के फैसले के दौरान 130 करोड़ भारतीयों ने शांति एवं सद्भाव बनाए रखा जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एकता और एकजुटता की यह भावना हमारे राष्ट्र को विकास के लिए शक्ति प्रदान करे। हरेक भारतीय सशक्त बने।

‘सर्वधर्म समभाव’ व समाज का ताना-बाना और मजबूत होगा: अमित शाह

श्रीराम जन्मभूमि मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद केंद्रीय गृह मंत्री व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने 9 नवंबर को कहा कि मैं श्रीराम जन्मभूमि मामले पर सर्वसम्मति से दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक और सर्वसमावेशी निर्णय का हृदय से स्वागत करता हूं। इससे सर्वधर्म समभाव व समाज का ताना-बाना और मजबूत होगा। इस निर्णय से न केवल वर्षों से चले आ रहे इससे जुड़े सभी मुद्दों का समाधान हुआ है, बल्कि यह निर्णय देश की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और बल भी देने वाला है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि मैं सभी समुदायों और सभी धर्म के लोगों से अपील करता हूं कि हम इस निर्णय को सहजता से स्वीकारते हुए शांति और सौहार्द से परिपूर्ण ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्प के प्रति कटिबद्ध रहें। भारतीय जनता पार्टी विश्वास व्यक्त करती है कि इस निर्णय से इस मामले से जुड़ी सभी चिंताएं समाप्त होंगी और भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ एकता के सूत्र पर और मजबूत होकर चलेगा।

श्री शाह ने कहा कि दशकों से चले आ रहे श्रीराम जन्मभूमि के इस कानूनी विवाद को आज इस निर्णय से अंतिम रूप मिला है। मैं भारत की न्याय प्रणाली व सभी न्यायमूर्तियों का अभिनंदन करता हूं। श्रीराम जन्मभूमि कानूनी विवाद के लिए प्रयासरत सभी संस्थाएं, पूरे देश के संत समाज और अनगिनत अज्ञात लोगों जिन्होंने इतने वर्षों तक इसके प्रयास किया, मैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।
उन्होंने कहा कि मुझे पूर्ण विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह निर्णय भारत की एकता, अखंडता और महान संस्कृति को और बल प्रदान करेगा।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जैसाकि हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि देश की न्यायपालिका के मान-सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए समाज के सभी पक्षों ने, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने, सभी पक्षकारों ने बीते दिनों सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए स्वागत योग्य एवं सराहनीय कदम उठाये हैं। अदालत के इस निर्णय के बाद भी हम सबको मिलकर सौहार्द बनाए रखना है, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाए कि संपूर्ण भारत एकजुट है एवं भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मजबूत हैं। भारत की महान सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत के साथ देश शांति और समृद्धि की ओर बढ़े, यही हमारी कामना है।

यह निर्णय समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले
सभी समावेशी विचारों का एक उदाहरण: जेपी नड्डा

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ‘श्री राम जन्मभूमि’ मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक और सर्वसम्मत निर्णय का स्वागत किया।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि “यह निर्णय समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी समावेशी विचारों का एक उम्दा उदाहरण है। हम इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हैं। इस फैसले ने न केवल इससे संबंधित सभी मुद्दों को हल किया है, बल्कि यह देश की शांति, एकता और सद्भावना की महान परंपरा को और मजबूती देने वाला है।

भाजपा इस निर्णायक और समयबद्ध फैसले के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय, माननीय न्यायाधीशों और विशेष रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ का आभार व्यक्त करती है, जिसके कारण दशकों से लंबित यह मामला अपने अंजाम तक पहुंचा है। भारतीय जनता पार्टी देश के उन लोगों का स्वागत और सत्कार करती है जिन्होंने एकजुट होकर देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ताने-बाने को अक्षुण्ण रखा है।

भारतीय जनता पार्टी देशवासियों से अपील करती है कि वे इस फैसले का तहे दिल से स्वागत करें और अफवाहों पर ध्यान दिए बिना समानता, सामाजिक सद्भाव और शांति की अमूल्य विरासत को बचाने के लिए एक उदाहरण स्थापित करें। इस फैसले ने स्पष्ट संदेश दिया है कि हम एकजुट हैं और भारत में लोकतंत्र की जड़ें बहुत मजबूत हैं।

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जैसा कहा कि देश की न्यायपालिका की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए, समाज के सभी पक्षों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने इस मामले से संबंधित सभी पक्षों ने इसका स्वागत किया है और एक शांतिपूर्ण बनाने के लिए अतीत में भी सराहनीय कदम उठाए हैं। कोर्ट के इस फैसले के बाद भी हम सभी को मिलकर सद्भाव बनाए रखना है। भारतीय जनता पार्टी इस बात का स्वागत करती है और विश्वास रखती है कि न्यायालय के निर्णय के बाद इस मामले से संबंधित सभी विवाद समाप्त हो जाएंगे और भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ ‘एकता के सिद्धांतों’ पर और मजबूत होगा।

भारतीय जनता पार्टी हमेशा राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध रही है। पालमपुर संकल्प से लेकर आज तक, भाजपा ने इस मुद्दे पर हमेशा सकारात्मक भूमिका निभाते हुए अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है।

यह हमारे लिए बहुत संतोष की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान राम मंदिर मुद्दे का हल निकला है। जब भी देश का इतिहास फिर से लिखा जाएगा, केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार का यह कार्यकाल स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। हम इस ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हैं।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

हम सभी को मिलकर भव्य राममंदिर का निर्माण करना है: मोहन भागवत

अयोध्या मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने 9 नवंबर को कहा कि दशकों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह विधिसम्मत और ‘अंतिम निर्णय’ हुआ है और अब अतीत की बातों को भुलाकर सभी को मिलकर भव्य राममंदिर का निर्माण करना है।

श्री भागवत ने कहा, ‘‘रामजन्मभूमि के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इस देश की जनभावना, आस्था और श्रद्धा को न्याय देने वाले निर्णय का संघ स्वागत करता है। दशकों तक चली लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह विधिसम्मत अंतिम निर्णय हुआ है।” उन्होंने देशवासियों से संयम बनाये रखने की अपील करते हुए कहा, “इस निर्णय को जय, पराजय की दृष्टि से नहीं देखना चाहिये।”

संघ प्रमुख ने कहा, ‘‘संपूर्ण देशवासियों से अनुरोध है कि विधि और संविधान की मर्यादा में रहकर संयमित और सात्विक रीति से अपने आनंद को अभिव्यक्त करें।” श्री भागवत ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस विवाद के समापन की दिशा में न्यायालय के निर्णय के अनुरूप परस्पर विवाद को समाप्त करने वाली पहल सरकार की ओर से शीघ्र होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘अतीत की सभी बातों को भुलाकर हम सभी मिलकर रामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर के निर्माण में अपने कर्तव्य का पालन करेंगे।”

पूरी हुई मनोकामना, खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं: लालकृष्ण आडवाणी

भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि वह पूरे दिल से अयोध्या मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के आए फैसले का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके रुख की पुष्टि हुई है और वह खुद को धन्य महसूस करते हैं।

इस पल को मनोकामना पूर्ण होने वाला बताते हुए 92 वर्षीय श्री आडवाणी ने कहा कि यह क्षण मेरी कामना पूर्ण होने का है। ईश्वर ने मुझे विशाल आंदोलन में योगदान देने का अवसर दिया।

उन्होंने कहा कि लंबे समय से अयोध्या में चल रहे मंदिर-मस्जिद विवाद का पटाक्षेप हो गया और समय आ गया है कि विवाद एवं कटुता को पीछे छोड़कर सांप्रदायिक एकता और सहमति को गले लगाया जाए।

मंदिर आंदोलन को स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा आंदोलन करार देते हुए कहा कि इसका लक्ष्य प्राप्त करना फैसले से संभव हुआ है।

उन्होंने फैसले का दिल से स्वागत करते हुए कहा, ‘मैं अपने रुख पर कायम हूं और खुद को धन्य महसूस कर रहा हूं कि सर्वोच्च न्यायालय ने एकमत से अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर बनाने का रास्ता साफ किया।’

श्री आडवाणी ने जोर देकर कहा कि राम और रामायण भारतीय संस्कृति और सभ्यता की विरासत में उच्च स्थान रखते हैं। राम जन्मभूमि का करोड़ों देशवासियों के दिलों में पवित्र स्थान है।

श्री आडवाणी ने भारत के विभिन्न समुदायों से अपील की कि वे एकजुट होकर देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए काम करें।

उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पांच एकड़ जमीन अयोध्या में मस्जिद बनाने के लिए देने के फैसले का भी स्वागत किया।

उन्होंने कहा, ‘अयोध्या के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ की ओर से दिए गए ऐतिहासिक फैसले का खुले दिल से स्वागत करने के लिए मैं देशवासियों के साथ खड़ा हूं।’
उल्लेखनीय है कि श्री लालकृष्ण आडवाणी के भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते पार्टी ने 1989 के पालमपुर अधिवेशन में राम मंदिर आंदोलन के समर्थन में प्रस्ताव पारित किया था।

श्री आडवाणी ने अयोध्या के विवादित स्थल पर राम मंदिर के लिए जनसमर्थन जुटाने हेतु गुजरात के सोमनाथ मंदिर से रथ यात्रा शुरू की थी।