भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था


विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर भारत ने पुन: एक शानदार उपलब्धि प्राप्त की है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं सुदृढ़ नेतृत्व में भारत उपलब्धियों का अंबार लगा रहा है तथा राष्ट्रीय–अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पूरा देश गौरवान्वित हो रहा है। इसमें कोई संदेह नहीं कि अपनी नयी ऊर्जा, शक्ति एवं आकांक्षाओं के पंख लगाकर देश नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। देश को आगे ले जाने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता, नई कार्य–संस्कृति तथा हर मोर्चे पर देश के लिए उत्कृष्ट उपलब्धियों के रूप में देखा जा सकता है। जब से मोदी सरकार केंद्र में आयी है, परिणाम अत्यंत उत्साहवर्द्धक रहे हैं तथा हर क्षेत्र में देश नए–नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिससे जन–जन के मन में आशा की किरण का संचार हुआ है। एक नया भारत, अपनी नई यात्रा एक गौरवशाली भविष्य के लिए शुरू कर चुका है।

विश्व की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था बनना एक ऐसी उपलब्धि है जिस पर हर भारतीय को गर्व हो रहा है। भारत अब 2.94 ट्रिलियन डाॅलर की अर्थव्यवस्था बनकर इंग्लैंड एवं फ्रांस को पीछे छोड़ चुका है। यह एक ऐसा स्थान है जिस पर भारत निर्णायक रूप से स्थापित हो चुका है और यदि अर्थशास्रियों की मानें तो आने वाले वर्षों में भारत और भी ऊंचे पायदानों पर दिखाई देगा। यह बहुत पुरानी बात नहीं है कि जब 2010 में भारत नौंवे स्थान पर था और मात्र नौ वर्षों में भारत अब पांचवें स्थान तक की यात्रा कर चुका है। पिछले पांच वर्षों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था में एक ट्रिलियन डॉलर जोड़ा है तथा विश्व आर्थिक परिदृश्य में अपने बढ़ते हुए कद का अहसास दिलाया हैं। अब जबकि भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने को कृतसंकल्पित है, आने वाले दिनों में भारत की अर्थव्यवस्था और भी अधिक सुदृढ़ होकर विकास के नए आयाम स्थापित करेगी। क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) में भारत 10.5 ट्रिलियन डाॅलर अर्थव्यवस्था के रूप में पहले से ही विश्व में अमेरिका एवं चीन के बाद तीसरे स्थान पर है। जहां तक नॉमिनल जीडीपी का प्रश्न है, भारत अब अमेरिका, चीन, जापान एवं जर्मनी के बाद पांचवें स्थान पर है। आने वाले वर्षों में जैसे–जैसे भारत पांच ट्रिलियन डाॅलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के करीब पहुंचता जाएगा, इसके कदम विश्व में और अिधक ऊंचे पायदान की ओर बढ़ेंगे।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में ‘रिफॉर्म, परफॉर्म एवं ‘ट्रांसफाॅर्म’ के एक युग की शुरुआत कर भारत ने पूरे विश्व के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। ‘अंत्योदय’ के सिद्धांतों पर कार्य करते हुए देश के गरीब से गरीब की मौलिक अवश्यकताओं को पूरा करते हुए देश ने एक लंबा रास्ता तय किया है। यह निरंतर अथक मेहनत एवं प्रयासों का ही परिणाम है कि देश में गरीबी में भारी कमी हुई है और पिछले छह वर्षों में 16 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। गरीबी जो 2011 में 21.2 प्रतिशत थी, 2018 में केवल 6.3 प्रतिशत रह गई है, जो पूरे देश के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। भारत एक ऐसा देश है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग सभी मानदंडों पर खरा उतर कर पूरे विश्व को अचम्भे में डाल दिया है।

जन धन, स्वच्छता मिशन, आयुष्मान भारत, पीएम–किसान सम्मान निधि, उज्ज्वला, उजाला, पीएम–आवास जैसे अनेक अभिनव योजनाओं से समाज के गरीब से गरीब वर्गों का भारी सशक्तिकरण हुआ है। इसके अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं कृषि पर बल के साथ–साथ पूरे देश में आधारभूत संरचना का जिस प्रकार से विकास हो रहा है, उससे सफलता के नए–नए आयाम गढ़े जा रहे हैं। हर ओर विभिन्न प्रकार के सुधारों की धमक पूरे विश्व में सुनाई पड़ रही है तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मानदंडों पर चमत्कारी छलांग के साथ भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड तोड़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब पूरे आत्मविश्वास के साथ अपनी विकास की कहानी लिख रहा है तथा ‘न्यू इंडिया’ के लक्ष्यों को प्राप्त करने को तत्पर है। आज जबकि भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का सपना अब सच दिखाई पड़ रहा है।

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