‘ममता सरकार की तुष्टीकरण नीति से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है’

स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, श्री अरबिंदो, रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बंकिम चंद्र चटर्जी, शरतचंद्र चट्टोपाध्याय जैसे मनीषियों ने न केवल देश बल्कि दुनिया भर में बंगाली अस्मिता को प्रतिष्ठित करने का काम किया, लेकिन आज पहले कम्युनिस्ट और बाद में तृणमूल कांग्रेस के शासन के बाद यह महान प्रदेश आज अपने खोये हुए गौरव को फिर से प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है।

रतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह ने 12 सितंबर को कोलकाता (पश्चिम बंगाल) में जामिनी गैलरी में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन को संबोधित किया और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार की तीन वर्ष की उपलब्धियों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की कई ज्वलंत समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की। अपने उद्बोधन के बाद उन्होंने बुद्धिजीवियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। इससे पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक हिंसा से पीड़ितों एवं उनके परिजनों से मुलाक़ात की।

राजनीतिक हिंसा के शिकार लोगों से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि शायद ही दुनिया के किसी और हिस्से में इससे ज्यादा राजनीतिक हिंसा होती होगी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधारा से असहमत होने के कारण जिस प्रकार की हिंसा सत्ताधारी पार्टी के लोगों द्वारा की जा रही है, यह दुखद है। क्या गुरु रवींद्रनाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद ने इस तरह के बंगाल की कल्पना की थी?

तृणमूल कांग्रेस किस प्रकार की संस्कृति को आगे बढ़ाना चाहती है? उन्होंने कहा कि इस प्रकार की राजनीतिक हिंसा से भारत का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जो लोग राजनीतिक हिंसा में संलिप्त हैं, ये उनके भले के लिए है कि वे हिंसा छोड़ दें। उन्होंने कहा कि तृणमूल और उसके कैडर जिस प्रकार से विरोधियों को राजनीतिक हिंसा का शिकार बना रहे हैं, उन्हें यह याद होना चाहिए कि वे भी कभी इसी हिंसा के खिलाफ कम्युनिस्टों से लड़े थे और इसलिए राज्य की जनता ने उन्हें इतना बड़ा जनादेश भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई सोचता है कि इस प्रकार की हिंसा से भाजपा का विस्तार रुक जाएगा तो वह मुगालते में है। आप भाजपा का जितना दमन करेंगे, जितना अत्याचार करेंगे, भारतीय जनता पार्टी उतना और आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि मैं दुनिया भर के ह्यूमन राइट्स चैम्पियन से भी यह निवेदन करना चाहता हूं कि वे कोलकाता, बसीरहाट, वीरभूम जैसे जगहों पर हो रही राजनीतिक हिंसा की रिपोर्टिंग करें, क्या यह मानवाधिकार का हनन नहीं है? उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के कैडर इस हिंसा और अत्याचार का मजबूती के साथ मुकाबला करेंगे, हम अपना काम जारी रखेंगे। भारतीय जनता पार्टी को पश्चिम बंगाल में आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता।

श्री शाह ने कहा कि स्वामी विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, श्री अरबिंदो, रवीन्द्रनाथ टैगोर, राजा राममोहन राय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, बंकिम चंद्र चटर्जी, शरतचंद्र चट्टोपाध्याय जैसे मनीषियों ने न केवल देश बल्कि दुनिया भर में बंगाली अस्मिता को प्रतिष्ठित करने का काम किया, लेकिन आज पहले कम्युनिस्ट और बाद में तृणमूल कांग्रेस के शासन के बाद यह महान प्रदेश आज अपने खोये हुए गौरव को फिर से प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने देश की आजादी के लिए ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया था। उन्होंने कहा कि जहां से क्रांति की शुरुआत की, जहां से साहित्य की शुरुआत हुई, जहां से रवींद्र संगीत ने पूरे विश्व में पश्चिम बंगाल की संस्कृति का डंका बजाया। वहीं पश्चिम बंगाल आज विकास के दौर में काफी पीछे चला गया है, आज इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करने का समय आ गया है।

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि पश्चिम बंगाल के विकास के लिए पिछले तीन साल में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने कई कार्य किये हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए यूपीए के 13वें वित्त आयोग की तुलना में 14वें वित्त आयोग में लगभग तीन गुना अधिक राशि दी है। उन्होंने कहा कि 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस की यूपीए सरकार ने पश्चिम बंगाल को शेयर इन सेन्ट्रल टैक्स के तहत 1,03,539 करोड़ रुपये की राशि दी थी, जबकि 14वें वित्त आयोग में मोदी सरकार ने राज्य के लिए 2,89,942 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। उन्होंने कहा कि ग्रांट इन ऐड के रूप में लगभग चार गुना वृद्धि करते हुए पश्चिम बंगाल को 2015-20 के लिए 34,732 करोड़ रुपये जारी किये गए हैं, जबकि यूपीए के 13वें वित्त आयोग में इस क्षेत्र में केवल 9,520 करोड़ रुपये जारी किये गए थे। उन्होंने कहा कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट में जहां कांग्रेस की यूपीए सरकार ने पश्चिम बंगाल को कोई मदद नहीं दी थी, वहीं मोदी सरकार ने तमाम वैचारिक मतभेदों के बावजूद पश्चिम बंगाल को 11,760 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि लोकल बॉडीज ग्रांट के रूप में पश्चिम बंगाल को कांग्रेस की यूपीए सरकार ने महज 1,444 करोड़ रुपये ही दिए थे, जबकि मोदी सरकार ने इसमें लगभग साढ़े चौदह गुने की भारी बढ़ोतरी करते हुए पश्चिम बंगाल के लिए 20,832 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई है।

उन्होंने कहा कि स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड और नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड में भी काफी वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि इन सभी को जोड़ दिया जाय तो 13वें वित्त आयोग में कांग्रेस की सोनिया-मनमोहन सरकार ने पश्चिम बंगाल को जहां 1,32,783 करोड़ रुपये की राशि दी थी, वहीं मोदी सरकार ने 3,59,406 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। उन्होंने कहा कि हम तो पश्चिम बंगाल के विकास के लिए ग्रांट भेज रहे हैं, लेकिन क्या ये राशि राज्य के विकास के लिए खर्च हो रही है? उन्होंने कहा कि इन ग्रांट्स के अतिरिक्त केन्द्रीय योजनाओं में तीन साल में पश्चिम बंगाल को 24,705 करोड़ रुपये दिए गए हैं। मुद्रा बैंक योजना में लगभग 29 हजार करोड़ रुपये दिए गए हैं और खदानों की ई-नीलामी से अर्जित राशि में से पश्चिम बंगाल को 21345 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि मैं मीडिया के माध्यम से ममता दीदी को पूछना चाहता हूं कि पश्चिम बंगाल के विकास के लिए हम क्या कर रहे हैं, इसका हिसाब तो दे दिया लेकिन पैसा कहां गया, इसकी जवाबदेही किसकी है? उन्होंने कहा कि इसका हिसाब ममता बनर्जी को देना है। उन्होंने कहा कि क्यों इतने सालों बाद भी पश्चिम बंगाल के गांवों में बिजली नहीं आई, राज्य की साक्षरता दर क्यों नहीं बढ़ी, औद्योगिक विकास नहीं हुआ, स्वच्छ पीने का पानी नहीं पहुंचा, आखिर कहां गया पैसा, ये सारा पैसा सिंडिकेटों में समाप्त हो जाता है।

उन्होंने कहा कि आज पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिले विभाजन से पहले की स्थिति में फिर से आ गए हैं। ममता सरकार की तुष्टिकरण नीति से राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है, राज्य में बम धमाके हो रहे हैं, जाली नोटों का कारोबार फ़ैल रहा है, गायों की तस्करी हो रही है। आखिर क्या हो रहा है आज पश्चिम बंगाल में? उन्होंने कहा कि मां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन करने के लिए कोर्ट में जाना पड़ता है, मां सरस्वती की पूजा नहीं करने देते – ये किस प्रकार के पश्चिम बंगाल का निर्माण हम कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि हम किसी के विरोधी नहीं हैं और बंगाल के लोग तो किसी के विरोधी हो ही नहीं सकते, लेकिन हमारी परंपराओं का ही कोई विरोध करे, इस प्रकार की सोसायटी तो नहीं चल सकती है न? उन्होंने कहा कि देश में कई धर्मों के जुलूस एक साथ निकलते हैं, पश्चिम बंगाल में भी निकलते रहे हैं, लेकिन क्या कारण है कि पश्चिम बंगाल में ऐसे फैसले हो रहे हैं – ये फैसले हिन्दू-मुसलमान के कारण नहीं बल्कि वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण लिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगालवासियों को अपना सहज स्वभाव छोड़ कर निर्णायक बनने का समय आ गया है। राज्य के गरीब लोगों का और राज्य के भविष्य के लिए जब तक आप पहल नहीं करेंगे, तब तक पश्चिम बंगाल आगे नहीं बढ़ सकता।