कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव


हाल ही में संपन्न हुए संसद के मानसून सत्र को कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों के लिए इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा जाएगा। कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण दो विधेयकों को पारित कर किसानों की आय को दुगुना करने का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया है, अब किसान अपनी उपज को किसी को भी और किसी भी स्थान पर बेचने को स्वतंत्र हैं। इससे किसानों की अपनी उपज के मोल-भाव करने की शक्ति बढ़ी है और उसे अच्छे मूल्य प्राप्त होंगे। कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020 तथा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर विधेयक, 2020- ऐसे दो विधेयक हैं जिससे अब किसान देश के किसी भी भाग में अपनी उपज बेच सकेगा तथा किसी भी कृषि व्यापार इकाई से अनुबंध कर सकेगा। इससे जहां एक ओर किसानों के उपज की कुशल, पारदर्शी एवं बाधा-रहित अंतरराज्यीय एवं राज्य के अंदर व्यापार एवं वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर इससे किसानों को अपनी उपज का अधिकतम मूल्य मिलने के साथ कृषि क्षेत्र में आधुनिक संरचना का विकास होगा।

किसानों के कल्याण के लिए एक और बड़ा कदम उठाते हुए संसद ने आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक, 2020 पारित कर अनाज, दालें, तेलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू की आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा दिया। इससे न केवल कोल्ड स्टोरेज, प्रसंस्करण और निर्यात में निवेश के दरवाजे खुल गए, बल्कि किसानों को उनकी उपज का अधिकतम दाम भी मिल पाएगा जो बंपर पैदावार की स्थिति में नहीं मिल पाता था। इस संशोधन से कृषि क्षेत्र उन जंजीरों से आजाद हो गया, जिसने इसके विकास को जकड़ रखा था। अब इस क्षेत्र में भी अवसंरचनाओं का विकास और आधुनिकीकरण होगा और हमारे किसान पूरे विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेंगे।

जब भी देश के सामने कोई चुनौती आई, देश के अन्नदाताओं ने आगे बढ़कर देश की झोली भर दी। आज जब देश कोविड-19 महामारी से पूरी शक्ति से लड़ रहा है, भारत के किसानों ने यह प्रमाणित कर दिया कि वे चुनौतियों से दो-दो हाथ करने में और भी अधिक शक्ति से कार्य कर सकते हैं। एक ओर जहां पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष खाद की बिक्री अधिक हुई, वहीं इस वर्ष खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में 8.56 प्रतिशत अधिक रही। अब तक सामान्य वर्षा रहने के कारण यह अनुमान है कुल उपज पिछले वर्ष की तुलना में अधिक रहने वाली है। यह अत्यंत दुर्भाग्यजनक है कि एक ओर तो किसान हर संकट में अपना अधिकतम योगदान करते हैं, परंतु कांग्रेस ने दशकों तक किसानों की कोई सुध नहीं ली। यह पहली बार है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं करिश्माई नेतृत्व में ऐसे कदम उठाए जा रहे हैं जिससे कृषि क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन होगा तथा देश के किसान समृद्ध एवं सशक्त होंगे।

शुरू से ही मोदी सरकार ऐसे कदम उठा रही है जिससे देश में किसानों की आय दुगुनी होगी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि अब तक उपेक्षित ग्रामीण अर्थव्यवस्था काे अधिक से अधिक बजटीय आवंटन मिले तथा साथ ही उन्होंने कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार कर विश्वस्तरीय स्पर्धा में इसकी सकारात्मक भागीदारी का मार्ग प्रशस्त किया है। जिस प्रकार से कृषक, कृषि क्षेत्र एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पिछले छह वर्षों में प्राथमिकता दी गई है, इसके पूर्व में कभी नहीं हुआ। एक लाख करोड़ रुपए की कृषि अवसंरचना निधि, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, ई-गोपाला, कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, उपज का डेढ़ गुणा करने जैसे अनेक कदमों से किसानों को उपज का दुगुना मूल्य दिलाने के लिए मोदी सरकार कृतसंकल्पित है। हमारे देश के किसान न तो कमजोर हैं न ही उपज कम है और न ही मेहनत में कमी है। कमी थी तो सरकार की सोच, मानसिकता एवं व्यवस्था में सुधार के लिए दृढ़ राजनैतिक इच्छाशक्ति की। अब जबकि मोदी सरकार मजबूती से किसानों के हित में बड़े-बड़े निर्णय ले रही है उससे न केवल किसान आत्मनिर्भर होंगे, बल्कि देश ‘आत्मनिर्भर’ बनेगा।

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