28 फीसदी के जीएसटी स्लैब से 178 उत्पादों का टैक्स घटा

आम लोगों को भारी राहत

जीएसटी काउंसिल की गुवाहटी (असम) बैठक में 10 नवंबर को एक अति महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। काउंसिल ने 178 सामानों को 28 फीसदी के जीएसटी स्लैब से हटाकर 18 फ़ीसदी के कर दायरे में ला दिया। गौरतलब है कि पहले 228 सामान पर 28 फीसदी टैक्स लगता था, अब बस 50 सामान इस स्लैब में रह जाएंगे। यानी करीब 80 फीसदी चीजों को 18 फीसदी के स्लैब में लाया गया। दरअसल, दरें तय करने वाली (फिटमैंट) समिति ने 28 प्रतिशत के स्लैब में आने वाली वस्तुओं की संख्या को घटाकर 62 करने की सिफारिश की थी, जबकि कौसिंल ने इसमें वस्तुओं की संख्या को और घटाकर 50 कर दिया।

इस फैसले के बाद सभी तरह की च्युइंगम, चॉकलेट, फेशियल मैकअप तैयारी के सामान, शैविंग और शैविंग के बाद काम आने वाले सामान, शैंपू, डियोडोरेंट, कपड़े धोने के डिटरजेंट पाउडर व ग्रेनाइट और मार्बल पर अब 18 प्रतिशत दर से जीएसटी लगेगा।
साथ ही कई दूसरी चीजों पर भी जीएसटी की दर कम की गई। काउंसिल ने 6 उत्पादों पर 18 फ़ीसदी जीएसटी को घटाकर 5 फ़ीसदी कर दिया। आठ उत्पादों पर 12 फ़ीसदी जीएसटी को घटाकर पांच फ़ीसदी किया गया। इतना ही नहीं, छह उत्पादों पर 5 फ़ीसदी जीएसटी को घटाकर शून्य कर दिया गया। जीएसटी काउंसिल ने कंपोजीशन स्कीम के तहत कारोबार करने वाले लोगों को काफी राहत दी। अब 1 फीसदी का टैक्स केवल टैक्सेबल आइटम पर ही लगाया जाएगा।

गौरतलब है कि देश में नई जीएसटी प्रणाली का कार्यान्वयन एक जुलाई से किया गया है। इसमें पांच कर स्लैब 0 प्रतिशत, पांच प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 18 प्रतिशत व 28 प्रतिशत रखे गए हैं।

बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने कहा, “इन नए टैक्स रेट को 15 नवंबर से लागू किया जाएगा। केन्द्र और राज्य सरकारें इसके लिए जरूरी नोटिफिकेशन जारी करेंगी।” श्री जेटली ने कहा, “इलेक्ट्रिक गुड्स, सैनिटरी फिटिंग्स, डिटरजेन्ट्स, मार्बल फ्लोरिंग, टायलेटरीज को भी 18% के स्लैब में लाया गया है।”

दरअसल, ये तय किया गया कि 28 फीसदी की स्लैब में सेस वाले आईटम जैसे लग्जरी और सिन गुड्स, एयरक्राफ्ट और यॉट के पार्ट्स जैसे सामानों को छोड़कर सभी को हटा दिया जाए। हालांकि, माना जा रहा है कि आम लोगों को सबसे बड़ी राहत रेस्टोरेंट के खाने को लेकर मिली है, जिसकी अब सिर्फ एक दर 5 फीसदी रखी गई है। श्री जेटली ने कहा, “जो भी ग्राहक रेस्टोरेन्ट जाएगा, उसको अब 18% के बजाय 5% टैक्स देना पड़ेगा। होटलों पर टैक्स दरें-अभी नॉन एसी होटलों, रेस्त्रां में 12 फीसदी व एसी होटलों में खाने पर 18 फीसदी जीएसटी लिया जाता था। अब यह एक समान 5 फीसदी लिया जाएगा। चूंकि होटल पूर्व में दी गई इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ ग्राहकों को नहीं देते थे, इसलिए उसे खत्म कर दिया गया है।

जीएसटी काउंसिल के इस निर्णय पर बिहार के उप-मुख्यमंत्री श्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि कौंसिल ने 28 प्रतिशत के सर्वाधिक कर दर वाले स्लैब में वस्तुओं की संख्या को घटाकर सिर्फ 50 कर दिया है जो कि पहले 228 थी। श्री मोदी ने कहा कि फिटमैंट समिति ने इसमें वस्तुओं की संख्या घटाकर 62 करने की सिफारिश की थी, जबकि जीएसटी कौसिंल ने इससे भी आगे बढ़कर 12 और वस्तुओं को इसके दायरे से हटाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि इस बात पर सहमति थी कि 28 प्रतिशत श्रेणी में केवल अहितकर व गैर जरूरी सामान ही होंगे। श्री मोदी ने कहा कि जीएसटी कौंसिल के आज के फैसले का राजस्व पर असर 20,000 करोड़ रुपए सालाना होगा।

मार्च तक जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 भरने से मुक्ति

जीएसटीएन काउंसिल ने रिटर्न फाइलिंग के नियमों में बड़ी छूट दी है। जिन कारोबारियों का सालाना टर्नओवर डेढ़ करोड़ रुपए से कम है, उन्हें जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 फाइल करने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे व्यापारी मार्च, 2018 तक हर तिमाही में सिर्फ एक बार जीएसटीआर-1 के रूप में अपना रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। सभी कारोबारियों को जीएसटीआर-3बी रिटर्न दाखिल करने की सुविधा अगले साल मार्च तक मिलती रहेगी। फिलहाल यह सुविधा सिर्फ दिसंबर तक ही थी।