कॉलोनियों के नियमितीकरण का ये फैसला घर और जमीन के अधिकार से जुड़ा तो है ही, ये कारोबार को भी गति देने वाला है : नरेन्द्र मोदी


भी हाल में जो संसद का सत्र समाप्त हुआ, उसमें दिल्ली की कॉलोनियों से जुड़े बिल के अलावा, दूसरा महत्वपूर्ण बिल पास हुआ- सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल। लेकिन इस बिल के पास होने के बाद कुछ राजनीतिक दल तरह-तरह की अफवाहें फैलाने में लगे हैं, लोगों को भ्रमित कर रहे हैं, भावनाओं को भड़का रहे हैं। मैं उनसे जानना चाहता हूं- क्या जब हमने दिल्ली की सैकड़ों कॉलोनियों को वैध करने का काम किया, तो किसी से पूछा कि आपका धर्म क्या है, आपकी आस्था किस तरफ है, आप किस पार्टी के समर्थक हैं? नहीं। केंद्र सरकार के इस फैसले का लाभ हिंदुओं को भी मिला, मुसलमानों को मिला, सिख और ईसाई भाई-बहनों को भी मिला।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ये बातें 22 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई भाजपा की आभार रैली में कहीं। इस रैली में लाखों की संख्या में पहुंचे दिल्लीवासियों ने 1,700 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। श्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “दशकों तक दिल्ली की एक बड़ी आबादी को अपने घरों को लेकर डर, चिंता, अनिश्चितता, छल-कपट और झूठे चुनावी वादों से गुजरना पड़ा है। हमने इस साल मार्च में ये काम खुद अपने हाथ में लिया और बिल पास कराया। टेक्नोलॉजी की मदद से 1,700 से ज्यादा कॉलोनियों की बाउंड्री को चिह्नित किया। 1,200 से ज्यादा कॉलोनियों के नक्शे भी पोर्टल पर डाले जा चुके हैं। कॉलोनियों के नियमितीकरण का ये फैसला घर और जमीन के अधिकार से जुड़ा तो है ही, ये दिल्ली के कारोबार को भी गति देने वाला है।”

श्री मोदी ने इस मौके पर नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के बारे में कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे एक-एक झूठ और भ्रम को लोगों के सामने रखा और कहा कि यह कानून देश के 130 करोड़ लोगों में से किसी के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सीएए को गरीबों के खिलाफ बता रहे हैं, लेकिन ऐसे झूठ बेचने वालों और अफवाह फैलाने वालों को पहचानने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा, “एक ही सत्र में दो बिल पारित हुए हैं। एक बिल में दिल्ली के 40 लाख लोगों को अधिकार दे रहा हूं और ये झूठ फैला रहे हैं कि मैं अधिकार छीनने वाला कानून बना रहा हूं। यह झूठ चलने वाला नहीं है, देश स्वीकार करने वाला नहीं है। मैं झूठ फैलाने वालों को चुनौती देता हूं, जाइए मेरे काम की पड़ताल कीजिए। कहीं पर दूर-दूर तक भेदभाव की बू आती है, तो देश के सामने लाकर रख दीजिए।‘’

उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून किसी की नागरिकता छीनने के लिए नहीं है, बल्कि कुछ गरीबों को नागरिकता देने के लिए है। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, “इस कानून का देश में रहने वाले 130 करोड़ लोगों से कोई वास्ता नहीं है। ये कानून पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से धार्मिक प्रताड़ना की वजह से आए लोगों को सुरक्षा देने के लिए है। नागरिकता संशोधन कानून का फायदा किसी नए शरणार्थी को नहीं मिलेगा, यह उन पर लागू होगा, जो वर्षों से भारत में ही रह रहे हैं।” श्री मोदी ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह, ममता बनर्जी और अशोक गहलोत जैसे नेता पहले ऐसी मांग कर चुके हैं कि पड़ोस के देशों से आए उन लोगों को नागरिकता देनी चाहिए, जिनका अपनी आस्था की वजह से उत्पीड़न हो रहा है। लेकिन आज जब मौजूदा सरकार ने उसी दिशा में ठोस कदम उठाया है, तो उन्हीं नेताओं की पार्टियां अपने राजनीतिक हित के कारण लोगों को गुमराह कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि एनआरसी जो अभी आया ही नहीं, जिसके लिए अभी तक नियम-कायदे भी तय नहीं हुए, उसे लेकर हौवा बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और अर्बन नक्सलियों द्वारा उड़ाई गई डिटेन्शन सेंटर की अफवाह सरासर झूठ है। जो इस देश की मिट्टी के मुसलमान हैं, जिनके पुरखे मां भारती की ही संतान थे, उन पर नागरिकता कानून और एनआरसी दोनों का ही कोई लेना-देना नहीं है। कोई देश के मुसलमानों को डिटेन्शन सेंटर में नहीं भेजने जा रहा।”

उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी पर भ्रम फैलाने वालों ने दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के कई शहरों को अराजकता और डर के माहौल में धकेलने की नापाक कोशिश की है, साजिश की है। प्रधानमंत्री ने हिंसा करने वालों से कहा, “अगर पत्थर मारना ही है तो मोदी को मारो, जलाना ही है तो मोदी का पुतला जला लो, लेकिन कम से कम किसी गरीब का नुकसान तो मत करो। गरीब ऑटो वालों, गरीब बस वालों को मारकर, पीटकर आपको क्या मिलेगा? जिन पुलिसवालों पर आप पत्थर बरसा रहे हैं, उन्हें जख्मी करके आपको क्या मिलेगा? मत भूलिए, आजादी के बाद 33 हजार से ज्यादा पुलिसवालों ने शांति के लिए, आपकी सुरक्षा के लिए शहादत दी है। जब कोई संकट आता है, कोई मुश्किल आती है तो पुलिस ये नहीं पूछती कि आपका धर्म क्या है।”

श्री मोदी ने दिल्लीवासियों को संबोधित करते हुए यह भी बताया कि किस प्रकार दिल्ली की मौजूदा राज्य सरकार यहां पीने के पानी समस्या पर आंख मूंद कर बैठी है, जो यहां की सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि अधिकांश जगहों पर नल से या तो पानी आता ही नहीं है और जो पानी आता भी है, उस पर लोगों को विश्वास नहीं है। लेकिन इस स्थिति के बावजूद दिल्ली की सरकार नहीं मानती कि यहां पानी की गंदगी जैसी कोई दिक्कत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली के लोगों का जीवन आसान बने, ईज ऑफ लिविंग बढ़े, ये केंद्र सरकार की प्राथमिकता रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए उनकी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कई मोर्चों पर काम किए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, “2014 के पहले दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क में औसतन करीब 14 किलोमीटर प्रतिवर्ष का विस्तार हो रहा था। हमारी सरकार आने के बाद अब ये करीब-करीब 25 किलोमीटर प्रतिवर्ष हो गया है। यानी दिल्ली में अब सालाना करीब 25 किलोमीटर नया मेट्रो रूट बन रहा है। पिछले पांच साल में दिल्ली में 116 किलोमीटर नई लाइनें शुरू हुई हैं। इसके अलावा अभी करीब 70 किलोमीटर नए रूट पर काम हो रहा है।”

उन्होंने कहा कि अपने दफ्तर आने-जाने में, अपने घर आने-जाने में दिल्ली के लोगों को कम से कम परेशानी हो, इसका भी निरंतर प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा, “दिल्ली के भीतर सड़कों पर ध्यान देने के साथ ही दिल्ली के चारों ओर पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का निर्माण किया गया है। ये एक्सप्रेसवे भी बरसों से अटका हुआ था। इसे पूरा करने का काम भी हमारी ही सरकार ने किया। अब इसके बन जाने से रोजाना 30-40 हजार ट्रकों की एंट्री दिल्ली के भीतर नहीं होती, वो बाहर ही बाहर निकल जाते हैं। इससे दिल्ली के ट्रैफिक पर भी बोझ कुछ कम हुआ है।”